केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने शुक्रवार को भारत के लिए इथेनॉल, इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन से चलने वाले वाहनों को भविष्य का रास्ता बताया। उन्होंने कहा कि वैकल्पिक ईंधन अपनाने से जीवाश्म ईंधन का आयात कम हो सकता है, ग्रामीण इलाकों में नौकरियां पैदा हो सकती हैं और किसानों की आय बढ़ सकती है।
गडकरी ने देश में प्रदूषण कम करने और ईंधन आयात पर निर्भरता घटाने के लिए वैकल्पिक ईंधन और हाइड्रोजन तकनीक पर बड़ा जोर दिया है। स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के अपने संकल्प को दोहराते हुए गडकरी ने खुलासा किया कि वे खुद हाइड्रोजन से चलने वाली कार का उपयोग करते हैं। उन्होंने टोयोटा मिराई (Toyota Mirai) का उदाहरण देते हुए कहा:
"मैं हाइड्रोजन वाहन से यात्रा करता हूं। इसका नाम 'मिराई' है, जिसका अर्थ है 'भविष्य'।"
उन्होंने कहा कि इसी नजरिए के तहत सरकार देश में 10 प्रमुख रूटों पर हाइड्रोजन से चलने वाली बसें शुरू करने जा रही है। इसके साथ ही सरकार इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों सहित अन्य इलेक्ट्रिक वाहनों और क्लीन फ्यूल तकनीकों को भी तेजी से बढ़ावा दे रही है।
भोपाल में 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा' और 'पीएम ई-बस सेवा' का उद्घाटन करने के बाद गडकरी ने कहा कि भारत में 2022 से ई20 पेट्रोल का इस्तेमाल हो रहा है। और अब यह लगभग चार करोड़ दो-पहिया वाहनों में इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने ऐसी रिपोर्टों का जिक्र किया जिनके अनुसार कुछ यूजर्स को ई20 के साथ कोई समस्या नहीं हुई और दावा किया कि कुछ मामलों में ईंधन दक्षता में सुधार हुआ है।
सार्वजनिक परिवहन को किफायती, सुरक्षित और सुलभ बनाने के लिए क्या योजनाएं हैं?
नितिन गडकरी ने बताया कि देश में वायु प्रदूषण का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा ट्रांसपोर्ट सेक्टर से आता है। इसीलिए सार्वजनिक परिवहन को अधिक लोकप्रिय, किफायती और सुरक्षित बनाना सरकार का प्राथमिक सपना है।
- सस्ती AC बस सेवा: मध्य प्रदेश में शुरू की गई नई लोक परिवहन बस सेवा का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि गरीबों को बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए। AC बसों का किराया डीजल बसों की तुलना में 30 प्रतिशत कम होना चाहिए।
- वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए आसान डिजाइन: नई बसों का डिजाइन ऐसा तैयार किया जा रहा है जिससे वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग यात्रियों को चढ़ने-उतरने में आसानी हो।
- वाहन स्क्रैपेज और ड्राइविंग सेंटर: पुरानी गाड़ियों को हटाने के लिए स्क्रैपेज और व्हीकल टेस्टिंग सेंटरों की संख्या बढ़ाई जा रही है। चालकों की कमी दूर करने के लिए अकेले मध्य प्रदेश में 32 ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर शुरू किए जा चुके हैं।
पीएम ई-बस सेवा और ऑटोमोबाइल सेक्टर में विनिर्माण को लेकर क्या लक्ष्य तय किए गए हैं?
भारत इस समय जापान को पीछे छोड़कर दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार बन चुका है। गडकरी ने कहा कि देश को इस क्षेत्र में वैश्विक लीडर बनाने के लिए कई बड़े कदम उठाए जा रहे हैं:
- पीएम ई-बस सेवा स्कीम: इस योजना के तहत 57,000 करोड़ रुपये के बजट से 10,000 इलेक्ट्रिक बसें तैनात करने की योजना है। जिससे 45 लाख से 55 लाख तक प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे। इसमें से 972 बसों को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है।
- 2 लाख नई बसों का निर्माण: भारत में फिलहाल प्रति 1,000 लोगों पर सिर्फ 2 बसें उपलब्ध हैं, जबकि आवश्यकता 8 बसों की है। इस कमी को पूरा करने के लिए सरकार अगले 3 वर्षों में देश के भीतर 2 लाख नई बसों के निर्माण को सुगम बना रही है।
कचरे से सीएनजी और किसानों की आय बढ़ाने की क्या रणनीति है?
कचरे को ईंधन में बदलने के प्रोजेक्ट्स पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों के लिए अतिरिक्त कमाई का जरिया बन रहे हैं:
- नागपुर मॉडल: नागपुर में कचरे (बायो-वेस्ट) से प्रतिदिन 28 टन सीएनजी का उत्पादन किया जा रहा है।
- देशभर में विस्तार: इसी मॉडल की तर्ज पर देशभर में लगभग 4,000 वेस्ट-टू-सीएनजी प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। इससे ईंधन आयात में कमी आएगी और किसानों को आय का एक नया स्रोत मिलेगा।
निजी वाहनों को टैक्सी के रूप में चलाने और अंत्योदय से रोजगार सृजन का क्या मॉडल है?
पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती का स्मरण करते हुए गडकरी ने 'अंत्योदय' यानी समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि किस तरह मोटर वाहन नियमों में 2019 में किए गए सुधारों ने रोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं:
- 4 करोड़ नौकरियों का सृजन: 2019 के संशोधनों के तहत निजी वाहन मालिकों को अपनी गाड़ियों का उपयोग टैक्सी के रूप में करने की अनुमति दी गई। इस फैसले से अब तक 4 करोड़ लोगों को रोजगार मिल चुका है (1.2 करोड़ कार चालक, 55 लाख ऑटो चालक और 2.5 करोड़ टू-व्हीलर चालक)।
- 12 करोड़ रोजगार की संभावना: वर्तमान में यह व्यवस्था केवल 3 राज्यों में लागू है। यदि देश के सभी राज्य इसे लागू कर दें, तो भारत में 12 करोड़ नए रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। जिससे केवल मध्य प्रदेश में ही 40 से 50 लाख युवाओं को सम्मानजनक आजीविका मिल सकती है।