कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि कुमार ने ऐसे फैसले लिए हैं, जिन्हें कांग्रेस नेता ने पूरी तरह असंवैधानिक और कानून के अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया। चिदंबरम ने ज्ञानेश कुमार से पद छोड़ने की मांग की।
'फैसलों से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक हों'
समाचार एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में चिदंबरम ने कहा कि अगर चुनाव आयोग का दावा है कि सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए, तो उनसे जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कई मामलों में आपत्तियां दर्ज की थीं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में चुनावी सूची और डेटा से जुड़े फैसलों पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
इस विवाद पर चुनाव आयोग ने कहा है कि सदस्यों के बीच अलग-अलग राय होना संस्थागत प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है। आयोग के अनुसार उसके सभी आधिकारिक आदेश और फैसले कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी किए गए हैं। आयोग ने यह भी कहा कि आंतरिक टिप्पणियां और जांच-पड़ताल पारदर्शिता और कानूनी अनुपालन सुनिश्चित करने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
पश्चिम बंगाल ट्रिब्यूनल को लेकर भी सवाल
चिदंबरम ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए बने ट्रिब्यूनल के सामने चुनाव आयोग की ओर से दायर अपीलों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस संबंध में भी संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
राहुल गांधी के समर्थन का जिक्र
चिदंबरम ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कई विपक्षी दल ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर चुके हैं। उन्होंने भी इस मांग का समर्थन किया। फिलहाल चुनाव आयोग ने चिदंबरम के आरोपों के जवाब में अपने आधिकारिक रुख में कहा है कि आयोग के सभी निर्णय स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार लिए गए हैं।