नगरीय निकाय चुनाव छह महीने तक टलने के आसार

भोपाल। प्रदेश में वर्ष 2027 के नगरीय निकाय चुनाव तय समय पर होंगे या आगे खिसकेंगे, इस पर अभी से संशय के बादल मंडराने लगे हैं। जनगणना के बाद होने वाला परिसीमन और वार्डों का पुनर्गठन चुनाव की समयसीमा में सबसे बड़ा अड़ंगा बन सकता है। मार्च 2027 तक जनगणना पूरी होने के बाद वार्डों की सीमाएं नए सिरे से तय करने और आरक्षण की प्रक्रिया में समय लगने की स्थिति में चुनाव करीब छह महीने तक टल सकते हैं। प्रदेश के मौजूदा नगरीय निकायों का कार्यकाल जुलाई 2027 के आसपास पूरा होना है।
दरअसल, नगरीय निकाय चुनाव से पहले वार्डों की संख्या, सीमाओं और आरक्षण को अंतिम रूप देना जरूरी है। इस बार जनगणना के आंकड़ों के आधार पर होने वाला परिसीमन चुनावी कार्यक्रम की पूरी गणित बदल सकता है। यदि जुलाई 2027 तक परिसीमन और आरक्षण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती है, तो मौजूदा निकायों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी चुनाव कार्यक्रम आगे बढ़ाया जा सकता है। सरकार की तैयारियों के संकेत भी नए परिसीमन के बाद चुनाव कराने की दिशा में माने जा रहे हैं।
413 निकायों में होना है चुनाव
प्रदेश में अगले नगरीय निकाय चुनाव 413 निकायों में प्रस्तावित हैं। इनमें 16 नगर निगम, 99 नगर पालिका और 298 नगर परिषद शामिल हैं। इतने बड़े पैमाने पर चुनाव से पहले वार्डों की संरचना और सीमाओं का निर्धारण तथा आरक्षण की प्रक्रिया पूरी करना प्रशासन के सामने बड़ी कवायद होगी।
आरक्षण की प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू
नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने महापौर और अध्यक्ष पदों के आरक्षण से संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया के लिए आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास को विहित प्राधिकारी नियुक्त किया है। यानी चुनाव से जुड़ी प्रशासनिक तैयारियां आगे बढ़ रही हैं, लेकिन परिसीमन की प्रक्रिया अब भी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बनी हुई है।
उपचुनाव भी हो चुके हैं स्थगित
इससे पहले प्रदेश के कुछ नगरीय निकायों में प्रस्तावित उपचुनाव भी स्थगित किए जा चुके हैं। प्रशासन ने इसके लिए कानून-व्यवस्था और भारी बारिश जैसे कारण बताए थे। अब 2027 के आम नगरीय चुनावों में जनगणना के बाद परिसीमन और आरक्षण की प्रक्रिया पर निगाह रहेगी।
कार्यकाल जुलाई में खत्म, कार्यक्रम बाद में संभव
यदि जनगणना के आंकड़े जारी होने के बाद परिसीमन और आरक्षण में अपेक्षित समय लगता है, तो जुलाई 2027 में मौजूदा निकायों का कार्यकाल पूरा होने के बावजूद चुनाव तत्काल कराना संभव नहीं हो सकता। ऐसी स्थिति में चुनाव का नया कार्यक्रम परिसीमन और आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
  छिंदवाड़ा से तैयार होंगे आधुनिक बसों के चालक
नई तकनीक वाली बसों का संचालन प्रशिक्षित चालकों के हाथ में ही होगा
भोपाल। प्रदेश की सड़कों पर 25 सितंबर से दौड़ने जा रही मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की आधुनिक बसों का स्टेयरिंग ऐसे चालकों के हाथों में होगा, जिन्हें नई तकनीक और सुरक्षा मानकों के अनुरूप प्रशिक्षित किया जा रहा है। इस दिशा में छिंदवाड़ा प्रदेश के प्रमुख प्रशिक्षण केंद्र के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यहां स्थापित इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च सेंटर में बस चालकों को आधुनिक बसों की सुरक्षित ड्राइविंग के साथ इलेक्ट्रिक और सीएनजी बसों की तकनीक, संचालन और सुरक्षा उपायों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों का संचालन किया जाना है। इन बसों में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल होने के कारण चालकों को भी पारंपरिक ड्राइविंग से आगे बढ़कर नई तकनीक की जानकारी देना जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए छिंदवाड़ा के प्रशिक्षण केंद्र में चालकों को आधुनिक बसों के संचालन और सड़क सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं से परिचित कराया जा रहा है।
तकनीक समझेंगे, फिर संभालेंगे स्टेयरिंग
नई तकनीक वाली बसों को सड़क पर उतारने से पहले चालकों को उनकी तकनीकी विशेषताओं और संचालन प्रणाली की जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण में इलेक्ट्रिक और सीएनजी बसों के संचालन, सुरक्षा मानकों तथा सुरक्षित ड्राइविंग के जरूरी पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह है कि आधुनिक बसों का संचालन प्रशिक्षित और तकनीकी रूप से दक्ष चालकों के हाथों में ही हो।
छिंदवाड़ा के साथ इंदौर में भी प्रशिक्षण
प्रदेश में वाहन चालकों को आधुनिक ड्राइविंग का प्रशिक्षण देने के लिए छिंदवाड़ा और इंदौर में इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च सेंटर स्थापित किए गए हैं। इनके माध्यम से चालकों को आधुनिक वाहनों की तकनीक, सुरक्षा मानकों और सुरक्षित संचालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। परिवहन विभाग प्रशिक्षण व्यवस्था को प्रदेश के अन्य हिस्सों तक भी विस्तार दे रहा है। भोपाल, बैतूल, छतरपुर, उज्जैन और ग्वालियर में पांच रीजनल ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर तैयार किए जा रहे हैं। इसके अलावा जिला स्तर पर 22 ड्राइवर ट्रेनिंग सेंटर भी विकसित किए जाएंगे। इन केंद्रों के जरिए भविष्य में बड़ी संख्या में वाहन चालकों को आधुनिक तकनीक और सड़क सुरक्षा का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
25 सितंबर से शुरू होगी सुगम परिवहन सेवा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी 25 सितंबर को भोपाल के बीएचईएल दशहरा मैदान में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत सार्वजनिक यात्री बसों के संचालन का शुभारंभ करेंगे। सेवा के तहत इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों का संचालन प्रस्तावित है।
बालाघाट में स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर, हर पंचायत को ‘सुमन पंचायत’ बनाने का लक्ष्य
दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की समीक्षा
भोपाल। जनजातीय और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण बालाघाट जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और ग्रामीण व दूरस्थ क्षेत्रों तक उपचार की पहुंच बढ़ाने के लिए शासन स्तर पर विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को बेहतर समन्वय के साथ काम करने और मैदानी स्तर पर निरंतर निगरानी के निर्देश दिए।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि गंभीरता और समन्वित प्रयासों से बालाघाट की सभी पंचायतों को ‘सुमन पंचायत’ के रूप में विकसित किया जा सकता है। इसके लिए मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान देने के साथ गर्भवती महिलाओं का शत-प्रतिशत पंजीयन, एएनसी जांच, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान, संस्थागत प्रसव और प्रसवोत्तर एवं नवजात देखभाल सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
27 हजार बच्चों का खसरा-रूबेला टीकाकरण
बालाघाट में खसरा-रूबेला नियंत्रण के लिए बुखार और दाने वाले मामलों की निगरानी की जा रही है। अब तक करीब 27 हजार बच्चों का टीकाकरण किया गया है। दूरस्थ गांवों की मैपिंग कर विशेष निगरानी और टीकाकरण अभियान चलाए जा रहे हैं। वैक्सीन की समय पर उपलब्धता के लिए वैकल्पिक वैक्सीन डिलीवरी व्यवस्था भी मजबूत की गई है।
डायरिया और मलेरिया पर घर-घर निगरानी
डायरिया नियंत्रण के तहत 1,63,902 परिवारों को ओआरएस और 1,60,431 परिवारों को जिंक उपलब्ध कराया गया है। गंभीर रूप से प्रभावित 734 बच्चों का अस्पताल में उपचार किया गया। जिला अस्पताल में बाल रोग बेड 50 से बढ़ाकर 150 और पीआईसीयू बेड 10 से बढ़ाकर 21 किए गए हैं।
मोबाइल मेडिकल यूनिट से दुर्गम गांवों तक पहुंच
बिरसा और बैहर विकासखंडों में छह मोबाइल मेडिकल यूनिट तैनात हैं। इनके माध्यम से ओपीडी, बुखार जांच, एएनसी-पीएनसी, टीबी एवं एनसीडी स्क्रीनिंग और दवा वितरण किया जा रहा है। करीब 50 गांवों तक स्क्रीनिंग गतिविधियां पहुंचाई गई हैं। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 51 नए बॉन्ड डॉक्टर भी पदस्थ हुए हैं।
332 करोड़ के इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट प्लान से मजबूत होगी अधोसंरचना
बालाघाट इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट प्लान के तहत 332 करोड़ रुपये के प्रावधान से स्वास्थ्य अधोसंरचना को भी मजबूती मिलेगी। 22 उप स्वास्थ्य केंद्रों में मरम्मत व उपकरण, दो नए मोबाइल मेडिकल यूनिट और 10 नवीन उप स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना का प्रावधान है। विठती और सानमुद्दा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को 30-बिस्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उन्नयन तथा घुम्मूर और पाथरी में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की कार्यवाही जारी है।
 मतदाता सूची के बदलावों पर कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग से मांगा जवाब
हटाए गए नामों का विधानसभा, जिला और कारण सहित ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग
भोपाल। मध्यप्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाते हुए आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अंतिम मतदाता सूची से हटाए गए 34 लाख 25 हजार 78 नामों का विधानसभा, जिला और कारणवार विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसी मांग को लेकर कांग्रेस सोमवार को भोपाल स्थित निर्वाचन सदन का घेराव करेगी।
पटवारी ने कहा कि निर्वाचन सदन के घेराव के बाद प्रदेश के सभी जिलों में जिला निर्वाचन अधिकारियों के कार्यालयों का भी घेराव किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से जुड़े सवाल केवल राजनीतिक दल का विषय नहीं हैं, बल्कि यह मतदाताओं के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा मामला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। उनके मुताबिक इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, नाम हटाने और बहाली, फॉर्म-6 तथा चुनावी सूचना प्रौद्योगिकी व्यवस्था से जुड़े मुद्दे शामिल थे। पटवारी ने मांग की कि इन आपत्तियों की विषयवस्तु और उन पर हुई कार्रवाई का ब्योरा सार्वजनिक किया जाए।
फॉर्म-6 में एसआईआर के सवाल पर भी उठाए सवाल
पटवारी ने नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में एसआईआर से संबंधित जानकारी जोड़े जाने पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि यदि इस बदलाव को लेकर आयोग के भीतर आपत्ति दर्ज की गई थी, तो इसे किस प्रक्रिया और कानूनी प्रावधान के तहत लागू किया गया।
मतदाता सूची के डिजिटल रिकॉर्ड का ऑडिट ट्रेल सार्वजनिक करें
कांग्रेस ने ड्राफ्ट सूची से हटाए गए 42.74 लाख नामों में से दावे-आपत्तियों के बाद वापस जोड़े गए नामों की संख्या तथा बहाली के आवेदनों की स्वीकृति-अस्वीकृति का कारणवार विवरण भी मांगा है। पार्टी ने मतदाता सूची के डिजिटल रिकॉर्ड का ऑडिट ट्रेल सार्वजनिक करने की मांग की। पटवारी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और कार्रवाई की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कही।
निर्वाचन आयोग कार्यालय का घेराव 28 को
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बताया कि 28 सितंबर को भोपाल में मुख्य निर्वाचन आयोग के दफ्तर का घेराव किया जाएगा, साथ ही सभी जिलों में भी विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। जीतू पटवारी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए मांग की कि उन पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज होना चाहिए। पटवारी ने प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि जो अधिकारी या कर्मचारी सरकार की चापलूसी करेगा, उसे वैसा ही जवाब मिलेगा। उन्होंने कहा कि पंचायत के चुनाव हमेशा बैलट पेपर से होते आए हैं और आगे भी बैलट पेपर से ही कराए जाने चाहिए।
राजनीति करने के बजाय प्रमाण सामने रखें
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर कांग्रेस के आंदोलन की घोशणा के बाद भाजपा ने पलटवार किया है। भाजपा ने कांग्रेस से कहा है कि अगर उसे मतदाता सूची में किसी तरह की गड़बड़ी नजर आ रही है तो वह उसे ठोस प्रमाण के साथ सामने रखे। भाजपा ने एसआईआर को चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी नियमित कवायद बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और उसमें जरूरी सुधार करना है। भाजपा ने कहा कि कांग्रेस के शासन के दौरान भी इस तरह की प्रक्रिया कराई जा चुकी है। पार्टी का तर्क है कि जिस प्रक्रिया को लेकर अब कांग्रेस सवाल उठा रही है, उसका इस्तेमाल पहले भी चुनावी व्यवस्था में किया जाता रहा है। भाजपा ने कांग्रेस से इस मुद्दे पर राजनीतिक आरोपों के बजाय तथ्य और प्रमाण सामने रखने को कहा है।
 आठ महीने बाद भाजपा को मिला पूर्णकालिक प्रदेश संगठन महामंत्री
                                                             चंद्रशेखर संभालेंगे मध्यप्रदेश संगठन की कमान
भोपाल। मध्यप्रदेश भाजपा को करीब आठ महीने बाद पूर्णकालिक प्रदेश महामंत्री (संगठन) मिल गया है। केंद्रीय संगठन की ओर से जारी नियुक्तियों की सूची में चंद्रशेखर को मध्यप्रदेश का नया प्रदेश महामंत्री (संगठन) नियुक्त किया गया है। उनका केंद्र भोपाल रहेगा। वे प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के साथ मिलकर प्रदेश संगठन की जिम्मेदारी संभालेंगे।
चंद्रशेखर की नियुक्ति के साथ जनवरी से रिक्त चल रहे प्रदेश महामंत्री (संगठन) के पद पर अब पूर्णकालिक नियुक्ति हो गई है। इस दौरान क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में संगठन का काम देख रहे थे।  प्रदेश भाजपा में संगठन महामंत्री का पद 31 जनवरी 2026 को हितानंद शर्मा की संघ में वापसी के बाद खाली हुआ था। हितानंद शर्मा को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के मध्य क्षेत्र का सह-बौद्धिक प्रमुख बनाया गया था और उनका केंद्र जबलपुर तय किया गया।
हितानंद सितंबर 2020 में भाजपा में सह-संगठन महामंत्री के तौर पर आए थे। मार्च 2022 में सुहास भगत की संघ में वापसी के बाद उन्हें प्रदेश संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। करीब चार वर्ष भाजपा संगठन में रहने के बाद दायित्व बदलने से यह पद रिक्त हुआ था। पार्टी ने तत्काल इस पद पर नई नियुक्ति नहीं की और करीब आठ महीने तक अजय जामवाल प्रदेश संगठन के कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे।
जिला और मंडल स्तर पर संगठन को मजबूत करने की चुनौती
चंद्रशेखर के सामने मध्यप्रदेश में संगठन को मजबूत करने के साथ जिला और मंडल स्तर के संगठन में कसावट लाने की जिम्मेदारी होगी। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के साथ संगठन और सरकार के बीच समन्वय बनाए रखना भी उनके दायित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। इसके अलावा बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय बनाए रखने और आगामी चुनावों के लिए पार्टी की तैयारियों को गति देने पर भी उनका फोकस रहेगा। पूर्णकालिक संगठन महामंत्री की नियुक्ति के बाद प्रदेश भाजपा में संगठनात्मक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।


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