काठमांडू. नेपाल-चीन सीमा के पास रासुवागढ़ी इलाके में भोटेकोशी नदी में आई अचानक आई भीषण बाढ़ (फ्लैश फ्लड) ने व्यापक तबाही मचाई है. इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 270 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती क्षेत्रों से 288 भारतीयों सहित लगभग 1,500 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं. नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) ने इस बात की आधिकारिक पुष्टि की है.
288 भारतीय पर्यटकों समेत सैकड़ों विदेशी लापता
यह हादसा तिब्बत के ल्हासा से काठमांडू को जोड़ने वाले लोकप्रिय ट्रेकिंग और तीर्थयात्रा मार्ग पर हुआ है. नेपाल पुलिस के अनुसार, लापता लोगों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की है:
भारतीय नागरिक: 288
अमेरिकी नागरिक: 63
ऑस्ट्रेलियाई नागरिक: 34
ब्रिटिश नागरिक: 33
कनाडाई नागरिक: 25
अन्य विदेशी व स्थानीय: नेपाल में 826 और तिब्बत के ग्यिरोंग क्षेत्र में 558 लोग लापता हैं.
भूकंप नहीं, ग्लेशियर ढहने से आया सैलाब
यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के अनुसार, शुरुआत में दर्ज किए गए 4.4 तीव्रता के झटके वास्तव में भूकंप के नहीं, बल्कि एक विशाल ग्लेशियर और बर्फ की चट्टान ढहने के कारण उत्पन्न हुए थे. ग्लेशियर टूटने से नदी में अचानक मिट्टी, पत्थरों और पानी का भयानक सैलाब आ गया, जिसने रास्ते में आने वाली हर चीज़ को तिनके की तरह बहा दिया.
दुर्गम इलाके में बचाव कार्य जारी
पहाड़ी इलाका और सीमावर्ती झील का बढ़ता जलस्तर रेस्क्यू टीमों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है. फंसे हुए पर्यटकों और नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए नेपाली सेना और बचाव एजेंसियां हेलीकॉप्टरों की मदद से निरंतर राहत और बचाव अभियान चला रही हैं.