बालाघाट के बैगा बहुल गांवों में आठ बच्चों की मौत का कारण खसरा और मलेरिया पाया गया है, जिसकी पुष्टि चिकित्सकों के दल और आईसीएमआर ने की है। टीकाकरण न हो ...और पढ़ें

बालाघाट जिले के कुंडेकसा में बने अस्थायी अस्पताल में भर्ती बच्चे की मां से बातचीत करते संभाग आयुक्त। (सौजन्य- जनसंपर्क विभाग)
बालाघाट में आठ बच्चों की मौत का कारण खसरा-मलेरिया।
मृत बच्चों को खसरा का टीका नहीं लगा था।
प्रभावित गांवों में खसरा-रूबेला टीकाकरण अभियान चलेगा। डिजि डेस्क, बालाघाट। म्ध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैगा जनजातीय बहुल गांवों में आठ बच्चों की मौत जिस अज्ञात बीमारी से बताई जा रही थी, उसकी पहचान चिकित्सकों ने कर ली है। स्वास्थ्य आयुक्त धनराज एस. की अध्यक्षता में गठित चिकित्सकों के पांच सदस्यीय दल ने परीक्षण और निष्कर्ष के आधार पर बच्चों की मौत का कारण खसरा (मीजल्स) और मलेरिया को बताया है bachcho ko teeka nahi laga दरअसल, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट आफ वायरोलॉजी (एनआईवी) की जांच में बच्चों में मीजल्स की पुष्टि हुई है। इन बच्चों को खसरा का टीका नहीं लगा था। हालांकि मृत बच्चों में कितनों की मीजल्स और कितनों की मलेरिया से मौत हुई, यह विभाग ने फिलहाल स्पष्ट नहीं किया है। 148 बच्चे स्वस्थ होकर घर लौटे वहीं, अस्पताल में भर्ती 23 बच्चों के लिए उपचार से सही होने के पश्चात मंगलवार को डिस्चार्ज कर दिया गया, जबकि 39 बच्चे जिला अस्पताल में और छह लांजी के अस्पताल में अभी भी भर्ती हैं। सभी को बुखार, उल्टी-दस्त और शरीर में दाने हैं। अब तक ल 148 मरीज स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं। गांवों में फैला संक्रमण बता दें कि बिरसा विकासखंड के बोंदारी, कोरका, कुंडेकसा समेत आठ गांवों में संक्रमण फैलने से बच्चों की मौत हुई। संभाग आयुक्त धनंजय सिंह ने सोमवार को कलेक्टर कुमार सत्यम के साथ प्रभावित गांवों का भ्रमण किया है। उन्होंने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, नई दिल्ली से आई नेशनल ज्वाइंट आउटब्रेक रिस्पांस टीम के विशेषज्ञों से जानकारी भी ली। वहीं सीएमएचओ डॉ. परेश उपलप ने सोमवार रात लांजी के सिविल अस्पताल में भर्ती छह बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी ली।
उनके अनुसार, प्रभावित गांवों में गुरुवार से मीजल्स-रुबेला अभियान शुरू होगा। नौ माह से 10 वर्ष तक के बच्चों को मीजल्स-रुबेला वैक्सीन की अतिरिक्त खुराक दी जाएगी। बच्चों का दोबारा परीक्षण होगा और अतिकुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कर उपचार किया जाएगा।