राज्य ब्यूरो, भोपाल। बुंदेलखंड के इतिहास से जुड़ा करीब 280 वर्ष पुराना एक दुर्लभ पत्र सामने आया है। मराठा साम्राज्य के पेशवा बालाजी बाजीराव (नानासाहेब) ने यह पत्र अपने सेनापति नारोशंकर को लिखा था। पत्र में मुगलों की पराजय के बाद बुंदेलखंमें मराठाशासन की प्रशासनिक व्यवस्था और राजस्व प्रणाली से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज ह                 नानासाहेब की राजकीय मुहर और हस्ताक्षर वाला यह पत्र मोड़ी लिपि में लिखा गया है। इसमें करैरा और आसपास के अखबराबाद व दमरौन परगनों की प्रशासनिक व्यवस्था का उल्लेख है। दस्तावेज में जागीरदारों और जमींदारों की नियुक्ति के साथसाथ नजराना और अन्य देयकों से संबंधित विवरण भी दर्ज हैं।

निजी संग्रह में मिली ऐतिहासिक दस्तावेज

ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत सर्वेक्षण कार्य के दौरान राज्य पुरातत्व संग्रहालय एवं अभिलेखागार के पुराविद् डा. वसीम खान को यह पत्र इतरत जैदी के निजी संग्रह में मिला, जो करैरा के मानसबदार रहे सैयद असगर अली खान के वंशज हैं। दस्तावेज के सामने आने से बुंदेलखंड में मराठा शासन के शुरुआती दौर की प्रशासनिक व्यवस्था को समझने के लिए इतिहासकारों और शोधकर्ताओं को महत्वपूर्ण सामग्री मिली है।

दतिया में है नारोशंकर की हवेली

सर्वेक्षण कार्य के दौरान नारोशंकर की हवेली भी दतिया में मिली है। इसमें उस समय के बहुत से दस्तावेज रखे हुए हैं। दतिया के कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े ने बताया कि हवेली के संरक्षण का कार्य किया जाएगा। इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं।

729 में बुंदेलखंड पहुंचे थे नारोशंकर

इतिहास के अनुसार नारोशंकर वर्ष 1729 में बाजीराव प्रथम के साथ बुंदेलखंड पहुंचे थे। उस समय पेशवा ने मुगल सेनापति मुहम्मद खान बंगश के खिलाफ राजा छत्रसाल की सहायता के आह्वान पर बुंदेलखंड का रुख किया था। इसके बाद नारोशंकर बुंदेलखंड में मराठा सत्ता के प्रमुख प्रतिनिधियों में शामिल हो गए। नए दस्तावेज से उस दौर में क्षेत्र की शासन व्यवस्था और राजस्व प्रबंधन को लेकर अतिरिक्त जानकारी सामने आई है।

दुर्लभ दस्तावेजों के संरक्षण पर जोर

पुरातत्व एवं अभिलेखागार आयुक्त मदन कुमार नागरगोजे ने बताया कि ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत दतिया और बुंदेलखंड क्षेत्र से कई दुर्लभ ऐतिहासिक सामग्री मिली हैं। इन दस्तावेजों और धरोहरों का संरक्षण किया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस महत्वपूर्ण ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखा जा सके।