विजय रजक को सौंपी जबलपुर संभाग की जिम्मेदारी
भोपाल। प्रदेश के कॉलेजों में लगभग नौ वर्षों से थमा छात्र राजनीति का पहिया एक बार फिर घूमने को तैयार है। उच्च न्यायालय के कड़े निर्देशों का पालन करते हुए राज्य सरकार ने सत्र 2026-27 के अकादमिक कैलेंडर में आगामी सितंबर माह में प्रदेश के सभी शासकीय व अशासकीय महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव कराने का आधिकारिक प्रावधान शामिल कर लिया है। हालांकि, चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से कराए जाएंगे या अप्रत्यक्ष (मनोनयन) माध्यम से, इस पर अंतिम मुहर लगना अभी बाकी है।
इस घोषणा के साथ ही प्रदेश के राजनीतिक गलियारों और कैंपस में चुनावी सुगबुगाहट तेज हो गई है। छात्र राजनीति के इस महाकुंभ में परचम लहराने के लिए मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सबसे पहले बाजी मारते हुए अपनी सांगठनिक मशीनरी को सक्रिय कर दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के स्पष्ट निर्देशों के बाद पार्टी ने पूरे राज्य को 13 रणनीतिक क्षेत्रों (जोन) में विभाजित कर दिया है। पार्टी का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय भारतीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के समर्थित उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करना और छात्र संगठनों के साथ बेहतर समन्वय बनाना है। इसके लिए अनुभवी नेताओं को क्षेत्रीय जिम्मेदारी सौंपी गई है।
किसे किस संभाग की मिली कमान
भोपाल संभाग का जिम्मा प्रकाश चौकसे, इंदौर का प्रभार अमन बजाज और ग्वालियर की कमान हेवरन कसाना को सौंपी गई है। जबलपुर संभाग में जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा, बालाघाट, मंडला और डिंडोरी की जिम्मेदारी विजय रजक को दी गई है। वहीं रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज और मैहर का प्रभार मंजुल त्रिपाठी को मिला है। सागर, दमोह, पन्ना, छतरपुर, निवाड़ी और टीकमगढ़ में अक्षय दुबे को तैनात किया गया है, जबकि शहडोल, उमरिया और अनूपपुर की कमान अजय यादव संभालेंगे। नर्मदापुरम, हरदा और बैतूल में मयूर जायसवाल, भिंड-मुरैना-श्योपुर में सचिन द्विवेदी, रायसेन-राजगढ़-सीहोर-विदिशा में अर्पित उपाध्याय और शिवपुरी, गुना, अशोकनगर व दतिया का प्रभार सौरभ यादव को सौंपा गया है। धार, झाबुआ, अलीराजपुर, खरगोन, बड़वानी, खंडवा और बुरहानपुर में दीपक डुंडीर तथा उज्जैन, देवास, आगर-मालवा, शाजापुर, रतलाम, मंदसौर व नीमच में डॉ. विजय बोडाना मोर्चा संभालेंगे।
जमीन सौदे में गड़बड़ी, मुख्यमंत्री का सख्त रुख, कटनी सीएसपी नेहा पच्चीसिया निलंबित
भोपाल। कटनी में सामने आए करोड़ों रुपये के जमीन सौदे से जुड़े गंभीर मामले पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने पद के दुरुपयोग और गड़बड़ी के आरोपों में घिरीं कटनी की सीएसपी (नगर पुलिस अधीक्षक) नेहा पच्चीसिया को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए हैं।
सीएसपी नेहा पच्चीसिया पर 1.07 करोड़ रुपये के एक जमीन सौदे में कथित गड़बड़ी और अनियमितता के गंभीर आरोप लगे हैं। मामले की जानकारी सामने आते ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इसे अत्यंत गंभीरता से लिया और मुख्य सचिव को संबंधित अधिकारी के खिलाफ तुरंत निलंबन की कार्रवाई करने के आदेश जारी किए। मामले पर सख्त संदेश देते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य में कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही, प्रशासनिक दबाव या पद के दुरुपयोग को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए हैं कि इस पूरे मामले की निष्पक्षता से जांच कराई जाए और जांच के बाद जो भी दोषी पाए जाएं, उनके विरुद्ध कठोरतम वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। प्रशासन में पारदर्शिता और शुचिता बनाए रखने के लिए सरकार किसी भी स्तर पर समझौता नहीं करेगी।
किसानों से शुल्क वसूला, सुविधाएं गायब, मंडीवार आडिट की मांग
भोपाल। प्रदेश की मंडियों में करोड़ों का राजस्व देने वाले किसानों को पीने के पानी तक के लिए तरसना पड़ रहा है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक पत्र भेजकर मंडियों की बदहाली और प्रशासनिक अनदेखी पर कड़ा प्रहार किया है। पटवारी ने कहा कि 3 करोड़ रुपये से अधिक की वार्षिक आय दर्ज करने वाली प्रदेश की 110 समृद्ध मंडियों में भी किसान सम्मानजनक और आवश्यक सुविधाओं से पूरी तरह महरूम हैं।
मंडी बोर्ड के मानकों के अनुसार अधिक आय वाली मंडियों को आर्थिक रूप से सशक्त माना जाता है, लेकिन धरातल पर स्थिति बेहद निराशाजनक है। जीतू पटवारी ने विभिन्न जिलों का उदाहरण देते हुए बताया राघौगढ़ मंडी में स्वच्छ पेयजल और कैंटीन तक का अभाव है। सीधी मंडी में सड़क, शौचालय और गोदाम जैसी आधारभूत संरचनाएं अधूरी पड़ी हैं। सबलगढ़ मंडी में किसानों के लिए छाया, पानी और शौचालय का कोई उचित प्रबंध नहीं है। कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार की नीतियों पर तंज कसते हुए कहा कि मंडी शुल्क वसूलते समय किसान सरकार को केवल राजस्वदाता दिखता है, लेकिन सुविधाएं देने के समय वह प्राथमिकताओं से गायब हो जाता है। शुल्क लेकर बदहाल मंडियां देना किसान कल्याण नहीं, बल्कि किसान की गाढ़ी कमाई पर उपेक्षा का टैक्स है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि किसानों और व्यापारियों से मिलने वाले मंडी शुल्क का पैसा आखिर कहाँ उपयोग हो रहा है? मामले के समाधान हेतु पटवारी ने मंाग की है किप्रदेश की सभी मंडियों की आय, व्यय और उपलब्ध सुविधाओं का मंडीवार ऑडिट कर ब्योरा सार्वजनिक किया जाए, 3 करोड़ से अधिक आय वाली 110 मंडियों के लिए समयबद्ध तरीके से मूलभूत सुविधा सुधार योजना घोषित की जाए।
आयुक्त कक्ष में अभ्यर्थियों के हंगामे के विरोध में कर्मचारियों ने किया दो घंटे पेन-डाउन हड़ताल
भोपाल। प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 के चयनित अभ्यर्थियों द्वारा लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) आयुक्त के कक्ष में जबरन प्रवेश और नारेबाजी की घटना से शिक्षा विभाग के कर्मचारियों में गहरा आक्रोश है। इस घटना के विरोध में शुक्रवार को डीपीआई और राज्य शिक्षा केंद्र के अधिकारियों व कर्मचारियों ने दो घंटे की पेन-डाउन हड़ताल की। इस दौरान कार्यालयों में कामकाज पूरी तरह ठप रहा, हालांकि दो घंटे बाद कर्मचारी अपने काम पर लौट आए।
नियुक्ति की मांग कर रहे अभ्यर्थियों का एक समूह गुरूवार की षाम को आयुक्त अभिषेक सिंह के कक्ष में जबरन घुस गया था। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला और अभ्यर्थियों को बाहर निकाला। इस सुरक्षा चूक और हंगामे के विरोध में संविदा कर्मचारी अधिकारी संयुक्त मोर्चा के तत्वावधान में राज्य शिक्षा केंद्र के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया गया। संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष रमेश राठौर ने घटना की निंदा करते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात अहिंसात्मक तरीके से रखने का हक सभी को है, लेकिन सरकारी कामकाज में बाधा डालना और हिंसक रुख अपनाना अनुचित है।
चयनित शिक्षकों का प्रदर्शन जारी
दूसरी ओर, नीलम पार्क में वर्ग 2 और वर्ग 3 के चयनित शिक्षकों का अनिश्चितकालीन प्रदर्शन जारी है। अभ्यर्थियों का तर्क है कि राज्य के स्कूलों में लाखों पद रिक्त होने के बावजूद विभाग पदों में वृद्धि नहीं कर रहा है। नियुक्ति से वंचित अभ्यर्थी जल्द से जल्द पद वृद्धि कर जॉइनिंग देने की मांग कर रहे हैं। ईवीएम शेयरिंग नीति से मिला 11.22 करोड़ का राजस्व
2027 के निकाय चुनावों में पंच से जिला पंचायत तक एक साथ वोटिंग कराने की तैयारी
भोपाल। चुनाव प्रबंधन में वित्तीय अनुशासन और संसाधनों के उपयोग की दिशा में राज्य निर्वाचन आयोग ने एक ऐतिहासिक पहल की है। आयोग द्वारा लागू की गई ईवीएम शेयरिंग पॉलिसी न केवल चुनावी खर्च को कम करने में कारगर साबित हुई है, बल्कि इसके जरिए शासन के खजाने में 11.22 करोड़ रुपये का राजस्व भी प्राप्त हुआ है। आयोग के अनुसार, देश में किसी भी राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा चुनावी संसाधनों को साझा कर राजस्व अर्जित करने का यह अपनी तरह का पहला और अनूठा मामला है।
मध्यप्रदेश की इस दूरदर्शी नीति का सीधा लाभ महाराष्ट्र, राजस्थान, सिक्किम, त्रिपुरा और छत्तीसगढ़ को मिला है। इन राज्यों में हाल ही में संपन्न हुए स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान नई ईवीएम खरीदने के बजाय मध्यप्रदेश से उपलब्ध मशीनों का उपयोग किया गया। इस व्यवस्था से इन पांचों राज्यों को मिलाकर लगभग 200 करोड़ रुपये की संभावित खरीद लागत बचाने में मदद मिली, जिससे सरकारी धन की भारी बचत हुई है। इस नीति का सबसे बड़ा व्यावहारिक फायदा यह रहा कि जिन राज्यों को स्थानीय निकाय चुनावों के लिए बड़ी संख्या में मशीनों की तत्काल आवश्यकता थी, उन्हें नया वित्तीय बोझ नहीं उठाना पड़ा। चुनाव समाप्त होने के बाद बेकार पड़ी रहने वाली मशीनों का अंतरराज्यीय उपयोग करके न केवल चुनावी खर्च घटाया गया, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर मौजूद संसाधनों का अधिकतम उपयोग भी सुनिश्चित किया गया।
एक ही चरण में होंगे पंच से जिला पंचायत चुनाव
इस मॉडल की सफलता को देखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग अब 2027 के आगामी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए वृहद कार्ययोजना तैयार कर रहा है। 2027 के आम चुनावों के दौरान आवश्यकता पड़ने पर मध्यप्रदेश खुद अन्य राज्यों से ईवीएम लेकर अपने यहां स्थानीय निकाय चुनाव संपन्न कराएगा। त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के तहत जिला पंचायत सदस्य, जनपद सदस्य, सरपंच और पंच पद के चुनाव एक साथ और एक ही चरण में ईवीएम से कराने की तैयारी है। यदि यह प्रस्तावित व्यवस्था लागू होती है, तो चुनाव प्रक्रिया में लगने वाले समय, मानव संसाधन, सुरक्षा व्यवस्था और बजटीय खर्च में अभूतपूर्व कमी आएगी।
कैदियों के मानसिक तनाव को दूर करने शुरू होगी साइको-सोशल काउंसलिंग
भोपाल सेंट्रल जेल में बनेगा प्रदेश का पहला समर्पित केंद्र
भोपाल। प्रदेश की जेलों में बंद कैदियों को अब केवल चार दीवारों की सजा तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य को संवारने और भावनात्मक संतुलन बहाल करने के लिए एक दूरगामी सुधारात्मक कदम उठाया गया है। जेल विभाग और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, गांधीनगर (गुजरात) के बीच साइको-सोशल काउंसलिंग के क्षेत्र में सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
जेल महानिदेशक डॉ. वरुण कपूर की विशेष पहल पर हुई इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य जेलों में निरुद्ध बंदियों के मानसिक तनाव को पहचानकर उन्हें मनो-सामाजिक संबल प्रदान करना और उनमें सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन लाना है। गौरतलब है कि इस एमओयू से पूर्व क्षेत्रीय जेल प्रबंधन एवं शोध संस्थान, भोपाल में 6 से 12 जुलाई तक सात दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया था। इसमें प्रदेश की विभिन्न जेलों के 28 अधिकारियों व कर्मचारियों (जिनमें मेल नर्स, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन और प्रहरी शामिल थे) को बंदियों की मानसिक स्थिति भांपने और काउंसलिंग का प्रशिक्षण दिया गया। जब इन प्रशिक्षित कर्मियों ने जेलों में तनावग्रस्त कैदियों की काउंसलिंग की, तो इसके बेहद सकारात्मक परिणाम और सुधारात्मक फीडबैक सामने आए। इसी सफलता को देखते हुए इस व्यवस्था को अब स्थायी व संस्थागत स्वरूप दिया जा रहा है।
मास्टर ट्रेनर का विशेष कोर्स
एमओयू के तहत चयनित जेल अधिकारियों-कर्मचारियों को राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, गांधीनगर भेजकर मास्टर ट्रेनर का विशेष कोर्स कराया जाएगा। ये मास्टर ट्रेनर्स वापस लौटकर अन्य जेल स्टाफ को प्रशिक्षित करेंगे, जिससे कैदियों के मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल के लिए एक कुशल और समर्पित मानव संसाधन तैयार होगा।
राज्य की अन्य जेलों में भी किया जाएगा लागू
कार्ययोजना के प्रथम चरण में केंद्रीय जेल भोपाल में प्रदेश का पहला साइको-सोशल काउंसलिंग सेंटर स्थापित किया जाएगा। इसके अनुभवों और परिणामों के आधार पर योजना को राज्य की अन्य जेलों में भी चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। यह पहल राज्य की जेल प्रणाली को केवल दंडात्मक न बनाकर एक प्रभावी सुधारात्मक मंच प्रदान करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।