कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के सह-संस्थापक और प्रवक्ता सौरव दास ने रविवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल में हुए संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में युवाओं के विरोध प्रदर्शन से जुड़े कुछ सवाल संसद में पूछने की अनुमति नहीं दी गई।
उनके मुताबिक, लोकसभा सांसद मैथेश्वरन वीएस ने जवाब के लिए केंद्र को तीन बार सवाल भेजे थे। ये सवाल गृह मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय से जुड़े थे। इन सवालों के नोटिस नंबर 101799 और 101801 थे।
क्या सवाल पूछे गए थे
- सौरव दास ने कहा कि इन सवालों में पूछा गया था कि नीट-यूजी 2026 का आवेदन शुल्क वापस करने का क्या फैसला है?
- उन्होंने कहा, यह भी पूछा गया था कि लोगों का सरकार पर भरोसा क्यों कम हो रहा है?
- दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे युवाओं को पीने का पानी और शौचालय जैसी जरूरी सुविधाएं क्यों नहीं दी गईं?
- प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं से सरकार ने क्या बातचीत की?
- छात्रों की समस्याओं, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार क्या कर रही है?
- दास ने कहा कि यह भी पूछा गया था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के अपने सांविधानिक अधिकार का इस्तेमाल करने वाले लोगों के साथ कैसा व्यवहार किया गया?
सौरव दास ने दावा किया कि इन सभी सवालों को संसद में पूछने की अनुमति नहीं दी गई। इसके लिए लोकसभा के नियम 41(2) का हवाला दिया गया। इस नियम की (I), (IV), (V), (XVIII) और (XXII) धाराओं का इस्तेमाल किया गया।
उन्होंने इन कारणों को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि पूरी तरह जायज सवालों को रोकने के लिए दिए गए ये कारण 'बहुत अजीब' हैं। उन्होंने सवाल किया कि अगर ये सवाल संसद में नहीं पूछे जा सकते, तो सरकार से जवाबदेही आखिर कहां तय होगी? क्या विरोध प्रदर्शन के जरिये सरकार से जवाब मांगा जाएगा?
उन्होंने यह भी पूछा कि उन अहम हफ्तों के दौरान गृह मंत्री अमित शाह संसद में क्यों नहीं आए। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई से जुड़े सवालों के जवाब संसद में क्यों नहीं दिए?
सौरव दास ने कहा कि किसी सांसद का सरकार से सवाल पूछने का अधिकार सिर्फ संसद की एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है। यह संसदीय लोकतंत्र का सबसे अहम हिस्सा है। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल इसलिए होता है, क्योंकि जिन मंत्रियों के पास जनता से जुड़ी बड़ी ताकत होती है, उन्हें जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं होगा, तो लोगों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
सीजेपी के प्रवक्ता ने आगे कहा, आप संसद की आवाज को दबाकर उसे अपनी अधूरी नीतियों पर सिर्फ मुहर लगाने वाली जगह नहीं बना सकते। आप युवाओं को नजरअंदाज नहीं कर सकते। यह हमारा भारत नहीं है।