मध्यप्रदेश में निवेश बढ़ाने की कवायद एक बार फिर तेज हो गई है। भोपाल में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) को लेकर सरकार ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस बार सरकार की रणनीति केवल नए निवेश प्रस्ताव हासिल करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पुराने निवेश समझौतों को जमीन पर उतारने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। सरकार ने उद्योग, पर्यटन, ऊर्जा, खनन, शिक्षा, शहरी विकास, रियल एस्टेट और एमएसएमई जैसे प्रमुख विभागों को अपने-अपने क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं का विस्तृत खाका तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए प्रत्येक विभाग अलग-अलग रणनीति तैयार कर रहा है। जानकारी के अनुसार, जल्द विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मुख्य सचिव के समक्ष प्रस्तुतीकरण देंगे। इसमें निवेश की संभावनाओं के साथ बुनियादी ढांचे की जरूरत, नीतिगत सुधार और निवेश में आने वाली बाधाओं पर चर्चा की जाएगी। सरकार का प्लान है कि यदि पहले से स्वीकृत परियोजनाओं की बाधाओं को दूर कर उन्हें समय पर पूरा किया जाता है, तो इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और प्रदेश में नए निवेश के लिए बेहतर माहौल तैयार होगा।
पुरानी परियोजनाओं की होगी समीक्षा
सरकार पिछली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में मिले निवेश प्रस्तावों की भी समीक्षा कर रही है। विशेष रूप से बड़ी परियोजनाओं की प्रगति का आकलन किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारना सबसे बड़ी चुनौती है।
इन क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने पर रहेगा जोर
पर्यटन: होटल, रिसॉर्ट, होमस्टे, इको-टूरिज्म, वाइल्डलाइफ पर्यटन और वॉटर स्पोर्ट्स जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने की तैयारी है।
ग्रीन एनर्जी: सौर ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण और नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़े उद्योगों में निवेश बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है।
खनन: खनिज संसाधनों के बेहतर उपयोग और खनिज आधारित उद्योगों के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
शहरी विकास: भोपाल और इंदौर के अलावा नए शहरी क्षेत्रों में आवास, बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी से जुड़ी परियोजनाओं में निजी निवेश को बढ़ावा देने की तैयारी है।