डिग्री के साथ मिलेगा रोजगार और आधुनिक कौशल का प्रशिक्षण

 
  RAJENRA PARASHAR
 
 डिग्री के साथ मिलेगा रोजगार और आधुनिक कौशल का प्रशिक्षण
विद्यार्थियों को मिलेगा साइबर, फोरेंसिक और आधुनिक तकनीक का सीधा अनुभव
भोपाल। प्रदेश के महाविद्यालयों में पारंपरिक विषयों की पढ़ाई कर रहे लाखों विद्यार्थियों के लिए अब रोजगार के नए द्वार खुलने जा रहे हैं। उच्च शिक्षा को सीधे उद्योग, अनुसंधान और आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए राज्य के उच्च शिक्षा विभाग ने देश के 30 शीर्ष राष्ट्रीय संस्थानों के साथ एक ऐतिहासिक समझौता (एमओयू) किया है।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान से आगे बढ़ाकर वर्तमान औद्योगिक व तकनीकी जरूरतों के अनुसार व्यावहारिक प्रशिक्षण देना है। गौरतलब है कि यह एमओयू 4 अगस्त को राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उच्च शिक्षा मंत्री इन्दर सिंह परमार की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हो चुका है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा तैयार इस रोडमैप के तहत ऐसे पाठ्यक्रम विकसित किए जाएंगे, जिससे विद्यार्थियों की एम्प्लॉयबिलिटी (रोजगार क्षमता) में सीधी वृद्धि हो। शैक्षणिक संस्थानों और उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल से युवाओं को पढ़ाई पूरी करते ही करियर के बेहतर अवसर मिल सकेंगे। इस बहुआयामी साझेदारी से मध्य प्रदेश के विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक तकनीक और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप तैयार होने का मौका मिलेगा, जिससे वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे।
विद्यार्थियों को मिलेंगे ये लाभ
फोरेंसिक विज्ञान, साइबर सुरक्षा, और उन्नत प्रौद्योगिकी जैसे आधुनिक क्षेत्रों में व्यावहारिक प्रशिक्षण, जलवायु साक्षरता, मौसम विज्ञान, वन व जैव विविधता, और कृषि व मृदा विज्ञान अनुसंधान से जुड़ने का मौका मिलेगा।  इसके अलावा श्रम अधिकारों के प्रति जागरूकता, तकनीकी दक्षता, नवाचारी शिक्षण और पर्यावरणीय नेतृत्व की समझ विकसित होगी।
  नर्सिंग काउंसिल के रजिस्ट्रार मुकेश सिंह पद से हटाए गए
 अनिश्चितकालीन धरने पर हैं छात्र
भोपाल। नर्सिंग और पैरामेडिकल छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ और अटकी परीक्षाओं को लेकर शासन ने कड़ा रुख अपनाया है। उप मुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के निर्देश पर नर्सिंग काउंसिल के रजिस्ट्रार मुकेश सिंह को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया गया है। यह कार्रवाई परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ियों और लंबे समय से रोके गए परिणामों के कारण उत्पन्न जनआक्रोश के बाद की गई है।
काउंसिल के प्रशासनिक रवैये के खिलाफ भोपाल के जवाहर चौक स्थित नर्सिंग काउंसिल कार्यालय के बाहर छात्र पिछले पांच दिनों से मोर्चा खोले हुए हैं। नर्सिंग स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन के बैनर तले छात्र 8 अगस्त से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। छात्रों का आरोप है कि सत्रों के पिछड़ने और समय पर परिणाम न आने से उनका करियर अधर में लटक गया है। छात्र जीएनएम और बीएससी नर्सिंग के रोके गए सभी परीक्षा परिणाम तत्काल घोषित किए जाने, आगामी सत्र की परीक्षाओं की तिथियां तय कर उन्हें समयबद्ध तरीके से आयोजित करने,  नर्सिंग शिक्षा व्यवस्था में जारी फर्जीवाड़े और धांधली को रोकने के लिए पारदर्शी और सख्त फैकल्टी मैनेजमेंट सिस्टम अनिवार्य करने की मांग कर रहे हैं।
 दूषित पानी से हुई मौतों का आंकड़ा छुपाने का आरो
भोपाल। बालाघाट जिले के बैगा आदिवासी बहुल गांवों में फैली महामारी ने विकराल रूप ले लिया है। दूषित पेयजल और संक्रमण के चलते क्षेत्र में अब तक 19 मासूम बच्चों की जान जाने का मामला सामने आया है। इस त्रासदी के बीच शुक्रवार को विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने महामारी प्रभावित ग्राम कुण्डेकसा, बोनदारी और कोरका का दौरा कर जमीनी स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने अस्पताल में भर्ती बीमार बच्चों से मुलाकात कर उनका हाल जाना और डॉक्टरों से इलाज की व्यवस्था की जानकारी ली।
पीड़ित परिवारों से मुलाकात के बाद नेता प्रतिपक्ष ने सरकार और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। सिंघार ने कहा कि क्षेत्र में पिछले कई दिनों से दूषित पानी के कारण संक्रमण फैला है, लेकिन सरकार वास्तविक मौतों के आंकड़े सामने लाने के बजाय उन्हें छुपाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री एक तरफ तिरंगा यात्रा निकालने में व्यस्त हैं, वहीं दूसरी तरफ संकट से जूझ रहे आदिवासी परिवारों की सुध लेने और मासूमों की जान बचाने का उनके पास समय नहीं है।
सिंघार ने मांग की कि प्रभावित गांवों के प्रत्येक व्यक्ति, विशेषकर बच्चों की तत्काल स्वास्थ्य जांच कराई जाए और बीमार मासूमों को समुचित व निःशुल्क इलाज कराया जाए,  बैगा बहुल क्षेत्रों में तत्काल स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति, पर्याप्त पोषण आहार और पीड़ित परिवारों को उचित आर्थिक सहायता दी जाए और  प्रशासनिक स्तर पर हुई लापरवाही की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हर बच्चे को बेहतर इलाज मिलना और किसी भी परिवार को इलाज के अभाव में अपने बच्चे को न खोना पड़े, यह सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
 मुख्यमंत्री की गैर-मौजूदगी में भी नहीं रुकेंगे जनता के काम
समस्या सुनने तय हुआ आला अधिकारियों का डेली रोस्टर
भोपाल। आमजन को अपनी समस्याओं के निराकरण के लिए अब मुख्यमंत्री की मौजूदगी का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। मुख्यमंत्री कार्यालय ने प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक चुस्त-दुरुस्त और जन-उन्मुख बनाते हुए अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय कर दी है। नई व्यवस्था के तहत मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी न केवल आम लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनेंगे, बल्कि बैठकों और शासकीय कार्यक्रमों के बेहतर समन्वय की जिम्मेदारी भी संभालेंगे।
मुख्यमंत्री कार्यालय और मुख्यमंत्री निवास (समत्व भवन) में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों, समीक्षा बैठकों और जन-सुनवाई को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक व्यापक वीकली रोस्टर जारी किया गया है। इसके तहत सोमवार से रविवार तक सचिव, अपर सचिव और उप सचिव स्तर के अधिकारियों की विशिष्ट ड्यूटियां निर्धारित की गई हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई की ओर से जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, अधिकारी मुख्यमंत्री के दैनिक कार्यक्रमों व बैठकों में समन्वय स्थापित करेंगे। साथ ही, जब भी मुख्यमंत्री भोपाल से बाहर या अन्य व्यस्तताओं में होंगे, तब उनसे मिलने आने वाले आम नागरिकों और प्रतिनिधियों से मिलकर अधिकारी सीधे आवेदन स्वीकार करेंगे और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।
मंत्रालय, समत्व भवन दोनों पर सौंपी जिम्मेदारी
नई व्यवस्था के तहत मंत्रालय और समत्व भवन दोनों स्थानों पर अधिकारियों को अलग-अलग दिनों के हिसाब से जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि नियमित कामकाज प्रभावित न हो और नागरिकों को अपनी बात रखने के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि रोस्टर में शामिल कोई अधिकारी किसी अपरिहार्य कारण से अनुपस्थित रहता है, तो संबंधित लिंक अधिकारी उसकी जिम्मेदारी संभालेगा। सीएमओ का मानना है कि इस कदम से बैठकों का समन्वय बेहतर होगा और जन-समस्याओं के समाधान की गति तेज होगी।
मंत्रालय में इन अधिकारियों की ड्यूटी
सोमवार को सचिव डॉ. सुदाम खाड़े और अपर सचिव अरविंद दुबे, मंगलवार को सचिव डॉ. सुदाम खाड़े और अपर सचिव अरुण परमार, बुधवार को सचिव  कौशलेंद्र विक्रम सिंह और उप सचिव सुधीर कोचर, गुरुवार को सचिव डॉ. इलैया राजा टी. और उप सचिव आदित्य शर्मा, शुक्रवार को सचिव कौशलेंद्र विक्रम सिंह और अपर सचिव अरुण परमार ड्यूटी पर रहेंगें।
समत्व भवन ये अधिकारी रहंेगे उपस्थित
सोमवार को सचिव कौशलेंद्र विक्रम सिंह और उप सचिव सुधीर कोचर, मंगलवार को सचिव डॉ. इलैया राजा टी.और आदित्य शर्मा, बुधवार को  सचिव डॉ. सुदाम खाड़े और अपर सचिव अरविंद दुबे, गुरुवार को  सचिव डॉ. सुदाम खाड़े और अपर सचिव अरविंद दुबे, शुक्रवार को  कुमार पुरुषोत्तम और  अपर सचिव अरुण परमार, शनिवार को सचिव डॉ. इलैया राजा टी. और  उप सचिव आदित्य शर्मा और रविवार  सचिव कौशलेंद्र विक्रम सिंह और उप सचिव सुधीर कोचर उपस्थित रहेंगे।
  जनगणना में इस बार डिजिटल साक्षरता और कोविड टीके पर भी नजर
द्वितीय चरण में घर-घर पहुंचेगी टीम, 40 सवालों से तय होगी देश के विकास की दिशा
भोपाल। भारत की आगामी जनगणना-2027 के द्वितीय चरण (जनसंख्या की गणना) को लेकर प्रशासनिक प्रक्रिया तेज हो गई है। भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय द्वारा 14 अगस्त को जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, इस राष्ट्रीय महाअभियान के दौरान देश के प्रत्येक नागरिक और परिवार से कुल 40 निर्धारित विषयों पर क्षेत्रवार जानकारियां एकत्र की जाएंगी।
यह गणना जनगणना पदाधिकारियों द्वारा घर-घर जाकर परिवार अनुसूची के माध्यम से की जाएगी। अधिसूचना के अनुसार, स्थानीय सीमाओं में तैनात जनगणना कर्मी प्रत्येक निवासी से उनका नाम, परिवार के मुखिया से संबंध, लिंग, जन्म तिथि, आयु, वर्तमान वैवाहिक स्थिति, विवाह के समय आयु, पति/पत्नी का नाम तथा घोषित राष्ट्रीयता जैसे मूल विवरण दर्ज करेंगे। इसके अतिरिक्त, सामाजिक और जनसांख्यिकीय संरचना को समझने के लिए धर्म, अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), जातिगत विवरण, माता-पिता की जानकारी और निःशक्तता (दिव्यांगता) से संबंधित आंकड़े भी एकत्र किए जाएंगे।
साक्षरता, डिजिटल दक्षता और आर्थिक गतिविधियों पर जोर
बदलती वैश्विक और तकनीकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इस बार साक्षरता और डिजिटल दक्षता पर विशेष ध्यान दिया गया है। उत्तरदाताओं से उनकी मातृभाषा, अन्य भाषाओं के ज्ञान, शैक्षणिक स्तर और डिजिटल साक्षरता से जुड़े प्रश्न पूछे जाएंगे। आर्थिक स्थिति के सटीक आकलन के लिए पिछले वर्ष के कार्य की स्थिति, व्यवसाय, उद्योग/सेवा का स्वरूप, कर्मी की श्रेणी और गैर-आर्थिक कार्यकलापों का विवरण दर्ज किया जाएगा। जो लोग रोजगार की तलाश में हैं या काम के लिए उपलब्ध हैं, उनसे संबंधित आंकड़े भी अनुसूची में शामिल रहेंगे।
प्रवास, प्रजनन दर और पहचान संबंधी विवरण
देश में पलायन की प्रवृत्तियों को समझने के लिए जन्म स्थान, पूर्व निवास, स्थानांतरण का कारण और वर्तमान स्थान पर निवास की अवधि से जुड़े प्रश्न पूछे जाएंगे। वहीं, महिलाओं से जुड़े प्रश्नों में जीवित बच्चों की संख्या और पिछले एक वर्ष में जन्मे बच्चों का विवरण दर्ज होगा। वहीं पहचान सत्यापन से जुड़े प्रश्नों के अंतर्गत कोविड-19 टीकाकरण का स्थान, कुल बैंक खातों की संख्या मोबाइल नंबर, आधार नंबर, वोटर आईडी, पासपोर्ट (यदि भारतीय पासपोर्ट धारक हैं) और ड्राइविंग लाइसेंस की उपलब्धता से जुड़ी जानकारियां भी (उपलब्धता के आधार पर) एकत्रित की जाएंगी।
नीति निर्माण और विकास में निर्णायक भूमिका
जनगणना-2027 देश की सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय स्थिति का सटीक मानचित्र प्रस्तुत करने वाली एक वृहद प्रक्रिया है। इससे प्राप्त प्रामाणिक आंकड़े केंद्र व राज्य सरकारों की जनकल्याणकारी योजनाओं, बजट आवंटन, अवसंरचनात्मक विकास तथा दीर्घकालिक नीतियों के निर्माण में आधारभूत भूमिका निभाएंगे। राष्ट्रीय महत्व के इस ऐतिहासिक महाअभियान की सफलता के लिए देश के प्रत्येक नागरिक से पूर्ण सहयोग की अपेक्षा की गई है।
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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