

अधिकारों के साथ कर्तव्यों का समन्वय: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नागरिकों के अधिकारों और सरकार के नियमों के बीच संतुलन बनाने के लिए संविधान के भाग IV (नीति निदेशक तत्व) और भाग IVए (मौलिक कर्तव्य- विशेष रूप से अनुच्छेद 51ए) की सहायता ली जा सकती है। इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने इस कानूनी लड़ाई के जरिए देश के आम नागरिकों को उनके राष्ट्रध्वज पर गर्व करने और उसे सम्मानपूर्वक फहराने का संवैधानिक अधिकार सौंप दिया।
इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने इस कानूनी लड़ाई के जरिए देश के आम नागरिकों को उनके राष्ट्रध्वज पर गर्व करने और उसे सम्मानपूर्वक फहराने का सांविधानिक अधिकार सौंपा।
वर्ष 2022 आजादी के 75 साल पूरे होने पर केंद्र सरकार ने अमृत महोत्सव का एलान किया। इसके तहत सरकार ने हर घर तिरंगा अभियान की शुरुआत की और इसे सफल बनाने के लिए भारतीय ध्वज संहिता में दो बेहद अहम ऐतिहासिक बदलाव किए थे।
पहले का नियम: पहले के नियमों के अनुसार, तिरंगे को केवल सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच ही फहराया जा सकता था, यानी सूर्यास्त के बाद झंडा उतारना अनिवार्य था।
बदलाव: गृह मंत्रालय की ओर से 19 जुलाई 2022 को जारी आदेश के तहत ध्वज संहिता में संशोधन किया गया। इसके बाद अब यदि राष्ट्रीय ध्वज खुले में या किसी नागरिक के निजी घर पर प्रदर्शित किया जाता है, तो उसे दिन और रात दोनों समय (24 घंटे) फहराया हुआ रखा जा सकता है।