मां वाग्देवी की प्रतिमा लाने की कवायद शुरू, लंदन के म्यूजियम में है रखी, भारत सरकार ने लिखा है पत्र

Edited by: मुनेश्वर कुमार|नवभारतटाइम्स.कॉम7 Aug 2026, 9:31 am IST

Maa Vagdevi Statue: लंदन से मां वाग्देवी की प्रतिमा को वापस लाने की कवायद शुरू हो गई है। भोपाल में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान संस्कृति सचिव ने कहा है कि हमने कोशिशें शुरू कर दी है। इसके लिए पत्र भी लिखा है।

हाइलाइट्स

  • लंदन से मां वाग्देवी की मूर्ति लाने की कवायद शुरू
  • संस्कृति मंत्रालय ने कहा कि सरकार ने लिखा है पत्र
  • लंदन के म्यूजियम में रखी है मां वाग्देवी की प्रतिमा
  • कुछ दिनों पहले तमिलनाडु के एक मंदिर की लाई गई है मूर्ति
Maa Vagdevi Statue

                                                                  मां वाग्देवी की प्रतिमा

भोपाल: धार भोजशाला में स्थापित होने वाली मां वाग्देवी की मूर्ति को वापस लाने की कोशिशें भारत ने तेज कर दी है। भारत सरकार ने यह कदम हाईकोर्ट के उसे फैसले के बाद उठाया है, जिसमें कहा था कि विवादित रहे इस परिसर का धार्मिक स्वरूप देवी से जुड़े मंदिर का है। यह मुद्दा भोपाल में चल रहे ब्रिक्स देशों की संस्कृति मंत्रियों की बैठक में उठा है।

केंद्र सरकार ने शुरू कर दी है प्रक्रिया

केंद्रीय संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल ने मीडिया को बताया था कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा मई में सरकार को मूर्ति की वापसी के लिए कोशिशों के निर्देश मिले थे। इससे एक साल पहले ही केंद्र ने इसे वापस लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। अग्रवाल ने कहा कि जब मैंने संस्कृति सचिव का पद संभाला, तो मेरे एक बैचमेंट ने लगभग एक साल पहले मुझे पत्र लिखकर वाग्देवी की मूर्ति को वापस लाने की प्रक्रिया शुरू करने का आग्रह किया था।
उन्होंने कहा कि हमने उस म्यूजियम को पत्र लिखा है, जहां मूर्ति अभी रखी हुई है। हम मूर्ति को मध्य प्रदेश वापस लाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। आठ अगस्त को समाप्त होने वाली इस बैठक में सदस्य देशों द्वारा औपनिवेशिक काल के दौरान हटाई गई सांस्कृतिक संपत्तियों की वापसी पर चर्चा किए जाने की उम्मीद है।

तमिलनाडु की मूर्ति लाने में सफल रहे

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि विदेशों से प्राचीन वस्तुओं की वापसी में भारत की हालिया सफलता का जिक्र किया है। संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल ने कहा कि इन्हीं प्रयासों की वजह से हम तमिलनाडु के लिए एक मूर्ति वापस लाने में सफल रहे। तमिलनाडु के मंदिरों से जुड़ी दो अन्य मूर्तियों को वापस लाने के प्रयास भी जारी हैं।

हाईकोर्ट ने केंद्र को दिए थे निर्देश

यह नई पहल एमपी हाईकोर्ट के उस फैसले के लिए बाद शुरू हुई है, जिसमें भोजशाला कमल मौला परिसर को सरस्वती मंदिर के रूप में मान्यता दी गई है। केंद्र सरकार को यूनाइटेड किंगडम से मूर्ति वापस लाने के प्रयास करने का निर्देश दिया गया।
11वीं सदी की और परमार काल से जुड़ी यह संगमरमर की मूर्ति ब्रिटिश शासन के दौरान धार से हटाई गई थी। अब यह ब्रिटिश म्यूजियम के संग्रह का हिस्सा है। हालांकि भारत इसे भोजशाला की वाग्देवी की मूर्ति मानता है, लेकिन ब्रिटिश म्यूजियम इसे जैन परंपरा की अंबकिा की प्रतिमा के रूप में सूचीबद्ध करता है, जिसे 1875 में धार में खोजा गया था और 1909 में औपचारिक रूप से हासिल किया गया था।

म्यूजियम में यह है विवरण

वहीं, म्यूजियम की सूची के अनुसार, चार भुजाओं वाली इस देवी ने हाथी को नियंत्रित करने वाला अंकुश और फंदे या पौधे के तने का अवशेष पकड़ रखा है। इस मूर्ति की ऊंचाई 1285 मीटर है और इसका वजन 250 किलोग्राम है। म्यूजियम का कहना है कि यह मूर्ति वररुचि से बनाई थी। कुछ विद्वानों का मानना है कि वररुचि ही राजा भोजा के दरबार के कवि धनपाल थे।                                                                                                                                 संस्कृति मंत्रालय के अनुसार 2014 के बाच से चोरी हुई या तस्करी की गई लगभग 650 कलाकृतियों को वापस लाया गया है, जबकि उससे पहले की अवधि में केवल 13 कलाकृतियां ही वापस लाई गई थीं। अधिकारियों ने बताया कि ब्रिक्स की चर्चाओं में सांस्कृतिक संपत्तियों की अवैध तस्करी के खिलाफ सहयोग मजबूत करने, औपनिवेशिक काल के दौरान हटाई गई कलाकृतियों की वापसी को आसान बनाने, पांडुलिपियों और पुरातात्विक रिकॉर्ड को संरक्षित करने और सदस्य देशों के बीच संयुक्त सांस्कृतिक पहल विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

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