बाजार भाव से तय हो जमीन की कीमत
भोपाल। भारतीय किसान संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य राजेंद्र पालीवाल ने प्रदेश सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण कानून में मांगे गए सुझावों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए किसानों के हितों की रक्षा की पुरजोर वकालत की है। उन्होंने कहा कि सरकार विकास के नाम पर किसानों की पुश्तैनी जमीन छीनकर उन्हें और उनकी आने वाली पीढ़ियों को भूमिहीन मजदूर बनने पर मजबूर न करे।
पालीवाल ने कहा कि सरकार गाइडलाइन के नाम पर औने-पौने दामों पर जमीनें अधिग्रहित की जा रही है। हकीकत में बाजार दरें गाइडलाइन से कई गुना ज्यादा हैं। उन्होंने मांग की कि मध्य प्रदेश में भी अन्य राज्यों की तर्ज पर अधिग्रहण का मुआवजा चार गुना किया जाए। उन्होंने तंज कसा कि रोड किनारे की जमीन की रजिस्ट्री पर सरकार डबल स्टांप ड्यूटी वसूलती है, लेकिन जब वही जमीन अधिग्रहित करनी हो, तो मुआवजा सामान्य कृषि भूमि के आधार पर दिया जाता है। यह दोहरा मापदंड बंद होना चाहिए। पालीवाल ने आग्रह किया है कि सरकार मानवीय आधार पर कानून में संशोधन करे। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री किसानों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए वर्षों पुराने कानूनों में बदलाव करेंगे ताकि कोई भी किसान परिवार अपनी ही जमीन से बेदखल होकर दर-दर न भटके।
डायवर्टेड प्लॉट और बुनियादी समस्याएं
पालीवाल ने उन मध्यमवर्गीय परिवारों का मुद्दा भी उठाया जिन्होंने पाई-पाई जोड़कर मकान के लिए डायवर्टेड प्लॉट खरीदे हैं। अधिग्रहण के समय सरकार इन्हें भी कृषि भूमि मानकर मुआवजा देती है, जिससे आम आदमी के घर का सपना चकनाचूर हो जाता है। उन्होंने मांग की कि डायवर्टेड प्लॉट का मुआवजा प्लॉट की दरों पर ही मिले। नगरीय विकास प्राधिकरणों द्वारा किसानों की जमीन पर प्लॉट बेचकर मुनाफा कमाने की प्रथा बंद हो और किसानों को वाजिब हिस्सेदारी मिले।
स्थायी भरण-पोषण सुनिश्चित हो
उन्होंने कहा कि हम विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास किसी परिवार की बर्बादी की कीमत पर नहीं होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कृषि भूमि केवल संपत्ति नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के पेट भरने का साधन है। एक बार मुआवजा खत्म हो जाने के बाद किसान के पास आजीविका का कोई जरिया नहीं बचता। सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जिससे प्रभावित परिवारों का भरण-पोषण निरंतर सुनिश्चित हो सके।