नए पुलिस मुखिया के लिए गृह विभाग ने शुरू की कवायद

Rajendra Parasar

1 नए पुलिस मुखिया के लिए गृह विभाग ने शुरू की कवायद
यूपीएससी को भेजी जाएगी वरिष्ठ आईपीएस अफसरों की सूची
भोपाल। प्रदेश में पुलिस महकमे के सर्वाेच्च पद यानी पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति को लेकर राज्य सरकार ने समय से पहले ही अपनी प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी हैं। मौजूदा डीजीपी कैलाश मकवाना आगामी 30 नवंबर को सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। आमतौर पर नए पुलिस मुखिया के चयन की प्रक्रिया वर्तमान डीजीपी के रिटायरमेंट से महज तीन महीने पहले शुरू होती है, लेकिन इस बार पहले से ही इस पर काम करना षुरू कर दिया है।  
गृह विभाग ने पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) से तय मापदंडों को पूरा करने वाले योग्य अधिकारियों का पूरा सेवा रिकॉर्ड और व्यक्तिगत विवरण मांगा था। पुलिस मुख्यालय ने तत्परता दिखाते हुए सभी आवश्यक जानकारियों के साथ वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की एक सूची गृह विभाग को सौंप दी है, जिसे जल्द ही नई दिल्ली स्थित यूपीएससी को भेजा जाएगा। इसके बाद, नए डीजीपी के नाम पर मुहर लगाने के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक होगी। इस चयन समिति में यूपीएससी के चेयरमैन, राज्य के मुख्य सचिव और एक अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शामिल होंगे। यह समिति प्राप्त नामों की गहन समीक्षा कर अंतिम तीन अधिकारियों का एक पैनल तैयार करेगी, जिसमें से राज्य सरकार किसी एक नाम को डीजीपी पद के लिए चुनेगी।
इन अफसरों के नामों पर चल रहा है मंथन
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा यूपीएससी को भेजी जाने वाली संभावित सूची में प्रदेश के जिन आईपीएस अधिकारियों के नाम शामिल हैं उनमें वरुण कपूर, उपेंद्र कुमार जैन, प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव, पंकज श्रीवास्तव, आदर्श कटियार, जी. अखेतो सेमा, अनिल कुमार, रवि गुप्ता और अनंत कुमार के नाम प्रमुख हैं। हालांकि, यूपीएससी अधिकारियों की सिनियोरिटी (वरिष्ठता), मेरिट और एसीआर (वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट) के आधार पर ही अंतिम तीन नामों का पैनल तय करता है। यदि मौजूदा वरिष्ठता क्रम और नियमों को देखा जाए, तो अंतिम पैनल में वरुण कपूर, उपेंद्र कुमार जैन और प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव के नाम शामिल होने की सबसे प्रबल संभावना जताई जा रही है।
2 निवेशकों का बढ़ा भरोसा, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी में सुधार की दरकार
नीति आयोग की रिपोर्ट, तुरंत रिस्पॉन्स ने बढ़ाया निवेशकों का भरोसा
भोपाल। नीति आयोग द्वारा हाल ही में जारी किए गए निवेश अनुकूलता सूचकांक में मध्य प्रदेश ने देश के औद्योगिक नक्शे पर एक मजबूत और उभरते हुए केंद्र के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। वहीं आयोग ने कुछ खामियां भी मानी है। आयोक की रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि प्रदेष में निवेशकों का भरोसा तो बढ़ा है, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी में सुधार की अब भी जरूरत हैं।
राज्यों में निवेश आकर्षित करने, सुधारों का मूल्यांकन करने और औद्योगिक गति को मापने के लिए तैयार किए गए इस सूचकांक में प्रदेश को 48.9 का कुल स्कोर मिला है। इस प्रदर्शन के साथ राज्य ने देश के बड़े राज्यों की श्रेणी में पांचवां स्थान हासिल किया है, जबकि अखिल भारतीय स्तर पर समग्र रैंकिंग में यह सातवें स्थान पर काबिज हुआ है। देश के केंद्र में स्थित होने के कारण यह उत्तर और दक्षिण भारत के बीच एक रणनीतिक कड़ी का काम कर रहा है, जिसका सीधा फायदा इसके औद्योगिक और बुनियादी ढांचे के विकास को मिल रहा है। नीति आयोग की रिपोर्ट स्पष्ट किया है कि यदि राज्य सरकार प्रशासनिक तालमेल को बेहतर करते हुए सड़कों और हवाई कनेक्टिविटी की कमियों को दूर कर लेती है, तो आने वाले समय में प्रदेश शीर्ष तीन राज्यों में शुमार हो सकता है।
पूछताछ पर सटीक जानकारी
नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार जमीनी स्तर पर राज्य के अनुकूल व्यावसायिक माहौल के कई मजबूत पक्ष सामने आए हैं। राज्य की निवेश प्रोत्साहन एजेंसियां बेहद सक्रिय हैं। वे निवेशकों की पूछताछ पर न केवल तुरंत जवाब देती हैं, बल्कि पहले से ही सटीक जानकारी उपलब्ध कराती हैं, जिससे व्यापार का कुल अनुभव काफी बेहतर होता है।
सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम को सराहा
प्रदेश का सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम अपनी तेजी, प्रभावशीलता और पारदर्शिता के लिए सराहा गया है। नए उद्यमियों को व्यापार शुरू करने में इससे बड़ी राहत मिल रही है। सरकार ने वास्तविक उपयोग करने वालों को ही औद्योगिक भूमि देने की सख्त नीति अपनाई है। इस नीति के तहत आवंटित जमीन का उपयोग या तो उद्योग लगाने के लिए होगा, अन्यथा उसे वापस करना होगा। औद्योगिक भूमि के गैर-कानूनी ट्रांसफर पर पूरी तरह रोक है, जिससे भू-माफियाओं पर लगाम कसी है।
सड़कों की दोबारा खुदाई से नुकसान
एक तरफ जहां प्रदेश ने नीतिगत स्तर पर बाजी मारी है, वहीं रिपोर्ट में व्यावसायिक माहौल और भौतिक बुनियादी ढांचे में सुधार की सख्त जरूरत भी रेखांकित की गई है। रिपोर्ट में एक बड़ी प्रशासनिक खामी का जिक्र किया गया है। जिसमें कहा है कि सड़क मरम्मत के तुरंत बाद बिजली, प्लंबिंग या फाइबर ऑप्टिक लाइन बिछाने के लिए बिना किसी आपसी तालमेल के दोबारा खुदाई कर दी जाती है। इस लापरवाही से इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचता है।
एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना जरूरी
राज्य में हर 100 से 150 किलोमीटर के दायरे में हवाई पट्टी या एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की मांग की गई है ताकि दूरदराज के प्रोजेक्ट साइट्स तक निवेशकों की पहुंच तेज हो सके। फिलहाल, कनेक्टिंग फ्लाइट्स और एयर कनेक्टिविटी के मामले में राज्य को बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
3  एमपी-छत्तीसगढ़ के पेंशनर्स को अब बिना किसी देरी के मिलेगी बढ़ी हुई महंगाई राहत
भोपाल। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के लाखों पेंशनर्स के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। दोनों राज्यों के बीच करीब 26 साल से चली आ रही एक जटिल प्रशासनिक व्यवस्था का अंत हो गया है। अब पेंशनर्स की महंगाई राहत  में बढ़ोतरी के लिए मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकार को एक-दूसरे की हरी झंडी का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
नए संयुक्त आदेश के मुताबिक, अब दोनों राज्य अपनी-अपनी वित्तीय स्थिति को देखते हुए महंगाई राहत वृद्धि का निर्णय लेने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र होंगे। इसके लिए वे अपने स्तर पर सीधे कार्यकारी आदेश जारी कर सकेंगे। महंगाई राहत (डीआर) में वृद्धि से पड़ने वाले वित्तीय बोझ की जानकारी दोनों राज्य एक-दूसरे से साझा जरूर करेंगे। आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि कोई भी राज्य, केंद्र सरकार द्वारा घोषित महंगाई राहत की तय दर से अधिक राहत अपने पेंशनर्स को नहीं देगा। अब दोनों सरकारों ने आपसी सहमति से इस पुराने नियम को बदलते हुए एक संयुक्त आदेश जारी किया है, जिससे अब बिना किसी अनावश्यक देरी के पेंशनर्स को सीधे बढ़ी हुई महंगाई राहत मिल सकेगी।
क्यों बनी थी यह व्यवस्था
दरअसल, साल 2000 में मध्य प्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ एक नया राज्य बना था। उस समय राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत यह तय हुआ था कि साल 2000 से पहले के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के पेंशन और महंगाई राहत का 76 प्रतिशत वित्तीय भार मध्य प्रदेश और 24 प्रतिशत वित्तीय भार छत्तीसगढ़ उठाएगा।  इस वित्तीय बंटवारे के कारण यह नियम बनाया गया था कि जब भी केंद्र सरकार महंगाई राहत बढ़ाएगी, तो दोनों राज्य एक-दूसरे से लिखित सहमति लेंगे। इस सहमति की प्रक्रिया में लंबा वक्त लग जाता था, जिससे पेंशनर्स को महीनों तक बढ़े हुए पैसे के लिए इंतजार करना पड़ता था। अब इस नए फैसले से पेंशनर्स को समय पर उनका हक मिल सकेगा।
4 कम बारिश से  प्रदेश   में कृषि संकट, राहत पैकेज की मांग
भोपाल। प्रदेश में मानसून के लंबे ब्रेक के कारण उत्पन्न हुए कृषि संकट पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक पत्र लिखकर राज्य के प्रभावित किसानों के लिए तत्काल राहत उपायों और विशेष पैकेज की मांग की है।
पटवारी ने पत्र में बताया कि प्रदेश में अब तक सामान्य से लगभग 15 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। राज्य के 55 में से 28 जिलों में स्थिति बेहद चिंताजनक है, जहां सामान्य से 16 से 78 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है। अलीराजपुर, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मंडला, शहडोल, सागर, रायसेन, शिवपुरी और जबलपुर जैसे जिलों में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। कम बारिश के चलते कई स्थानों पर बोवनी ठप है, तो कहीं बोई गई फसलें सूखने की कगार पर हैं। पटवारी ने कहा कि रीवा संभाग में धान की केवल 41 प्रतिशत और नर्मदापुरम में 62 प्रतिशत ही बोवनी हो सकी है। रायसेन में लक्ष्य के मुकाबले महज 65 हजार हेक्टेयर में रोपाई हुई है, जबकि मुरैना में जुलाई के दूसरे सप्ताह के बाद से बारिश न होने से खरीफ फसलों को 30 से 40 प्रतिशत नुकसान की आशंका है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से ये मांग
प्रभावित जिलों में विशेष गिरदावरी सर्वे कराकर फसल क्षति का वास्तविक आकलन हो,  पुनर्बाेवनी के लिए किसानों को विशेष आर्थिक सहायता और निःशुल्क बीज दिए जाएं,  वैकल्पिक सिंचाई के लिए डीजल, बिजली और सिंचाई हेतु विशेष राहत पैकेज घोषित किया जाए,  प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत त्वरित सर्वे कराकर मुआवजा दिलाया जाए। प्रभावित क्षेत्रों में आपातकालीन जल प्रबंधन योजना लागू हो और जिला स्तरीय संयुक्त निगरानी समितियां बनाकर रोजाना समीक्षा की जाए।
5  गडकरी के एथेनॉल बयान का किसान संघ ने किया समर्थन
पेट्रोल-डीजल को जीएसटी में लाने की मांग
भोपाल। भारतीय किसान संघ ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के एथेनॉल संबंधी बयानों का पुरजोर समर्थन किया है। भोपाल में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष के. साईं रेड्डी ने स्पष्ट किया कि एथेनॉल को लेकर समाज में फैलाई जा रही भ्रामक जानकारियां पूरी तरह निराधार हैं।
उन्होंने एथेनॉल उत्पादन में पानी की बर्बादी के तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि फैक्ट्रियों में रि-साइकिलिंग तकनीक के जरिए जल प्रबंधन किया जाता है। एथेनॉल से किसानों को उपज का बेहतर मूल्य मिल रहा है और देश की विदेशी तेल पर निर्भरता कम हो रही है, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत के साथ प्रदूषण में भी कमी आ रही है। उन्होंने भविष्य में 100 प्रतिशत एथेनॉल आधारित वाहनों को प्रोत्साहित करने की वकालत की। वाहनों में खराबी के आरोपों पर उन्होंने कहा कि यदि कोई समस्या है, तो यह वाहन निर्माताओं की जिम्मेदारी है कि वे तकनीक में सुधार करें।
ईंधन कीमतों और कृषि मुद्दों पर बेबाक राय
भारतीय किसान संघ ने देश भर में ईंधन की कीमतों में समानता और महंगाई से राहत के लिए पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की मांग दोहराई। साथ ही, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सरकारी खरीद सुनिश्चित करने पर जोर देते हुए कहा कि मूंग की खरीद बढ़ाने के लिए संघ केंद्र सरकार और नाफेड को ज्ञापन सौंपेगा। फसल बीमा योजना के तहत उन्होंने राज्य सरकार से अपना हिस्सा जारी कर किसानों के बैंक खातों में बीमा राशि जल्द हस्तांतरित करने की अपील की।
कैलारस शुगर मिल किसानों को सौंपे
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर मुरैना की कैलारस शुगर मिल को सहकारी समिति के जरिए किसानों को सौंपने की मांग रखी। साथ ही, किसानों से लागत कम करने और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए रासायनिक खेती छोड़ प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया।

Jul 18, 2026, 6:31 PM (2 days ago)
 
 
 
 
 
 
 

Leave Comments

Top