वांगचुक मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई: अंतरिम आदेश देने से किया इनकार, केंद्र को नोटिस; मिलने की अनुमति बरकरार

गौरव बाजपेई, नई दिल्ली Published by: Rahul Kumar Tiwari Updated Sun, 19 Jul 2026 03:11 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट में सोनम वांगचुक मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो और अन्य साथियों के लिए अलग रेस्ट रूम उपलब्ध कराने तथा उन्हें वांगचुक से मिलने की अनुमति देने के निर्देश दिए।

Key observations Delhi High Court regarding petition filed by Gitanjali wife of Sonam Wangchuk
वांगचुक मामले में हाईकोर्ट का फैसला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सोनम वांगचुक से जुड़े मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और विवेक तंखा कोर्ट रूम में मौजूद रहे। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) चेतन शर्मा भी अदालत में पक्ष रखे। अदालत ने कोई अंतरिम आदेश पारित करने से मना कर दिया। अदालत ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। इसके साथ ही सोनम वांगचुक के साथ मौजूद उनकी पत्नी व अन्य लोगों को अलग रेस्ट रूम देने के लिए निर्देश दिए। साथ ही स्पष्ट किया कि उन्हें सोनम से मिलने का एक्सेस दिया जाएगा। यह सुनवाई उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो की ओर से दायर याचिका पर हुई। 
सोनम वांगचुक की तरफ से कपिल सिब्बल ने बहस की शुरुआत की, सिब्बल ने कहा कि हम रिहाई चाहते हैं। हमने मेदांता हॉस्पिटल से बात की है।  हमें अपने वकील और अपने डॉक्टर से मिलने से मना कर दिया गया है। 
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि हम इस मैटर को डील कर रहे हैं, कृपया 16 जुलाई के आदेश को देखा जाए, जिसमें कहा गया है कि सरकारी डॉक्टरों द्वारा नियमित जांच की जाए और जरूरत पड़ने पर मेडिकल हस्तक्षेप किया जाए।
चेतन शर्मा ने सोनम की हेल्थ स्टेट्स रिपोर्ट को अदालत के समक्ष रखते हुए कहा कि वांगचुक डायबिटिक नहीं है। लेकिन 18 दिन की फास्टिंग की वजह से किडनी के फंक्शन को समस्या आ रही थी। 
उन्हें बिना शुगर के इलेक्ट्रोलाइट्स दिए जा रहे हैं। उन्हें किसी अन्य नागरिक की तरह सरकारी  डॉक्टरों पर विश्वास रखना चाहिए।
'सोनम को एम्स शिफ्ट कर सकते हैं'
चेतन शर्मा ने सोनम की हेल्थ स्टेट्स रिपोर्ट को अदालत के समक्ष रखते हुए कहा कि वांगचुक डायबिटिक नहीं है। लेकिन 18 दिन की फास्टिंग की वजह से किडनी के फंक्शन को समस्या आ रही थी। 
उन्हें बिना शुगर के इलेक्ट्रोलाइट्स दिए जा रहे हैं। उन्हें किसी अन्य नागरिक की तरह सरकारी  डॉक्टरों पर विश्वास रखना चाहिए। हम डबल बेंच के आदेश का पालन कर रहे हैं। हम उन्हें एम्स में शिफ्ट कर सकते हैं।  पीठ ने कहा कि 'क्या उनके साथ मौजूद तीमारदार को अलग जगह दी गई है। जहां वह रुक सके। इसपर चेतन शर्मा ने कहा कि बिल्कुल जगह दी गई है। 
'शुगर और पोटेशियम का लेवल भी निम्नतम स्तर'
डॉ. अक्षय ने कहा कि 'मैं एम्स का एडिशनल प्रोफेसर हूं। हम उनका इलाज कर रहे हैं उन्हें ओरली बिना शुगर के इलेक्ट्रोलाइट्स और पोटेशियम दिया जा रहा है। उन्हें आइवी के जरिए विटामिन दिए जाने की जरूरत है। हालांकि उन्होंने इसके लिए मना कर दिया है।  उनके शरीर के कई पैरामीटर बॉर्डर लाइन पर है।  शुगर और पोटेशियम का लेवल भी निम्नतम स्तर पर है। उन्हें कार्बोहाइड्रेट और पोटेशियम की जरूरत है।
'अपनी पसंद के अस्पताल में जाने का अधिकार'
सिब्बल ने कहा कि वांगचुक हिरासत में नहीं हैं, भारत के स्वतंत्र नागरिक होने के नाते उन्हें अपनी पसंद के अस्पताल में जाने का अधिकार है। 16 जुलाई का आदेश जब दिया गया तो वह पार्टी नहीं थे, हम अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज चाहते हैं। इस पर सरकार कैसे इनकार कर सकती है।
'सरकारी चिकित्सकों पर अविश्वास क्यों?'
दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि सोनम वांगचुक 18 दिनों से उपवास पर हैं, ऐसे में क्या उनकी उचित देखरेख सुनिश्चित करना अदालत का दायित्व नहीं है। इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि वांगचुक अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज कराना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि मेदांता विश्व स्तरीय अस्पताल है और यदि एम्स के चिकित्सक भी उपचार प्रक्रिया में शामिल होना चाहें तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।
इसके बाद पीठ ने पूछा कि सरकारी चिकित्सकों पर अविश्वास क्यों जताया जा रहा है। इस पर सिब्बल ने स्पष्ट किया कि उनका सरकारी डॉक्टरों पर कोई अविश्वास नहीं है। उन्होंने कहा कि वे हर व्यवस्था के लिए तैयार हैं, लेकिन केवल अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज चाहते हैं।
सरकार की ओर से पेश हुए चेतन शर्मा ने कहा कि सरकार अपने दायित्व से बंधी हुई है और वह पूरी जिम्मेदारी के साथ कह रहे हैं कि सरकार इस मामले में अत्यधिक सतर्कता बरत रही है। इसी दौरान एक चिकित्सक ने कहा कि वांगचुक यह कह रहे हैं कि उन्हें डॉक्टरों पर भरोसा नहीं है और यह विश्वास का सवाल है।
इसके जवाब में सिब्बल ने कहा कि वांगचुक का रक्तचाप बढ़ रहा है और अस्पताल के कक्ष में एक पुलिसकर्मी मौजूद है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस तरह किसी मरीज का उपचार किया जा सकता है। इस पर चेतन शर्मा ने सिब्बल के इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि यह गलत है और अस्पताल के कक्ष में कोई पुलिसकर्मी मौजूद नहीं है।
क्या है पूरा मामला
गीतांजलि ने आरोप लगाया है कि बार-बार अनुरोध के बावजूद अस्पताल प्रशासन उन्हें डिस्चार्ज करने या किसी निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की अनुमति नहीं दे रहा है। उनका कहना है कि वार्ड के बाहर करीब 30 पुलिसकर्मी और पूरे अस्पताल परिसर में 100 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात हैं, जिससे उनकी आवाजाही प्रभावित हो रही है।
वांगचुक की पत्नी ने इसे चिकित्सकीय देखभाल के बजाय 'अवैध हिरासत' करार दिया है। मामले पर अब सभी की नजरें दिल्ली हाईकोर्ट की दोपहर में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां याचिका पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

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