भोपाल में 310 साल पहले जहां से इस्लामी कानून लागू हुआ था, आज वहीं से समान नागरिक संहिता

भोपाल समाचार, 19 जुलाई 2026: मध्य प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, वह सोच रहे होते हैं इसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता। मध्य प्रदेश में जब समान नागरिक संहिता लागू करने की बारी आई तो उन्होंने वह स्थान चुना ताकि इतिहास बन जाए। आज से 310 साल पहले जहां से भोपाल में इस्लामी कानून लागू हुआ था, आज वहीं पर मंत्री परिषद की बैठक हुई और मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए मंजूरी दी गई। 310 साल पहले क्या हुआ था, आपको नहीं पता तो मैं बताता हूं:- 

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आप तो जानते ही हैं, दोस्त मोहम्मद खान जो अफगानिस्तान का शातिर अपराधी था। उसको उसके गिरोह सहित देश निकाला दे दिया गया तो भारत आ गया और मुगलों की सेवा करने लगा। मुगल कमजोर हुए तो मालवा में आ गया। जैसे भाड़े की हत्यारे, सुपारी किलर्स पैसा लेकर दूसरों की हत्या किया करते हैं। दोस्त मोहम्मद खान बिल्कुल वैसा ही भाड़े का हत्यारा था। हिंदू राज परिवारों में क्लेश तो बहुत था लेकिन कोई भी हिंदू अपने परिवार के सदस्य की हत्या नहीं करना चाहता था। इसलिए दोस्त मोहम्मद खान को यहां पर काफी कम मिला। से उसका गिरोह बड़ा होता गया और एक छोटी सेना के बराबर हो गया। फिर उसने बैरसिया सहित कई छोटे इलाकों पर कब्जा करके अपनी शक्ति बधाई और आज से 310 साल पहले 1716 में भोपाल मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र के सबसे शक्तिशाली हिंदू राजा नरसिंह देवड़ा चौहान (जगदीशपुर) को धोखे से मार कर जगदीशपुर पर कब्जा कर लिया। इसका नाम बदलकर इस्लामनगर कर दिया। 

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गद्दार और धोखेबाज दोस्त मोहम्मद खान ने आज से 310 साल पहले, मौलवी मोहम्मद सालेह को काजी (इस्लामी न्यायाधीश) नियुक्त किया। इसी दिन से बैरसिया, जगदीशपुर और बाद में भोपाल शहर में हिंदू और मुसलमान के लिए अलग-अलग कानून हो गए। इस प्रकार भोपाल क्षेत्र में जगदीशपुर को इस्लामनगर बनाकर यहीं से कानूनी असमानता की शुरुआत की गई थी। आज मध्य प्रदेश सरकार इस्लामनगर को जगदीशपुर बनाकर यही से कानूनी समानता की शुरुआत कर रही है। 

कई राजपूत महिलाओं को इस्लाम कबुलने मजबूर किया

दोस्त मोहम्मद खान गद्दार और धोखेबाज तो था ही, चरित्रहीन भी था। केवल रानी कमलापति नहीं बल्कि कई हिंदू महिलाओं और राजपूत राज परिवारों की स्त्रियों को उसने इस्लाम कबूलने पर मजबूर कर दिया था। मंगलगढ़ की राजपूत राजकुमारी कुँवर सरदार बाई (धर्मांतरण के बाद फतेह बीबी), कालीखेरी के जमींदार परिवार से जय कुँवर (धर्मांतरण के बाद ताज बीबी) के नाम प्रमुख है क्योंकि इन दोनों ने धोखेबाज खान को उसी की जैसी रणनीति में जवाब दिया। दोस्त मोहम्मद खान दोनों के सौंदर्य का इतना दीवाना हो गया कि उसने अपनी अफगानी पत्नी मेहराज बीबी (या मेहराज बीबी) के पास जाना ही छोड़ दिया। सिर्फ इतना ही नहीं दोस्त मोहम्मद खान ने अपनी पहली, अफगानी और एकमात्र इस्लामी पत्नी मेहराज बीबी की संतानों को भी कोई राजपाट नहीं दिया। रिपोर्ट: उपदेश अवस्थी।

समान नागरिक संहिता लागू होने से क्या होगा

कोई भी व्यक्ति एक से अधिक महिलाओं के साथ विवाह नहीं कर सकता। फिर चाहे वह किसी भी धर्म का हो। 
सभी विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन करना होगा (नहीं तो कानूनी मान्यता नहीं मिलेगी)।
विवाह की न्यूनतम आयु: लड़कियों के लिए 18 वर्ष, लड़कों के लिए 21 वर्ष (पहले से ही लागू है, लेकिन अब सभी धर्मों पर समान रूप से लागू)।
विवाह के तरीके (हिंदू रीति-रिवाज, निकाह आदि) वैसे ही रह सकते हैं, लेकिन कानूनी पहलू एक समान होंगे।
2. लिव इन रिलेशनशिप
लिव इन रिलेशनशिप में रहने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। नहीं तो कानूनी कार्रवाई होगी। 
रजिस्ट्रेशन न करवाने पर जुर्माना या जेल (उत्तराखंड में 6 महीने तक की सजा का प्रावधान है)।
रजिस्टर्ड लिव-इन में रहने वाले पार्टनर को मेंटेनेंस (भरण-पोषण) का अधिकार मिलेगा।
ऐसे रिश्ते से पैदा हुए बच्चे वैध (legitimate) माने जाएंगे और उन्हें संपत्ति में अधिकार मिलेगा।
3. तलाक और मेंटेनेंस (Divorce & Maintenance) 
तलाक के आधार सभी धर्मों के लिए एक समान होंगे (क्रूरता, परित्याग, व्यभिचार आदि)।
ट्रिपल तलाक, निकाह हलाला जैसी प्रथाएं प्रतिबंधित होंगी।
तलाक के बाद पत्नी और बच्चों को मेंटेनेंस का अधिकार एक समान नियमों के तहत मिलेगा।
4. संपत्ति और उत्तराधिकार (Inheritance & Succession) 
पैतृक और स्वअर्जित दोनों प्रकार की संपत्ति में बेटी को बेटे जितना हिस्सा मिलेगा (धर्म की परवाह किए बिना)।
उत्तराधिकार के नियम एक समान होंगे।
5. गोद लेना और संरक्षकता (Adoption & Guardianship) 
गोद लेने के नियम सभी के लिए एक जैसे होंगे।
6. अन्य महत्वपूर्ण बातें 
बच्चे के जन्म, विवाह, तलाक, लिव-इन आदि से जुड़े सभी रिकॉर्ड एक जगह रजिस्टर्ड होंगे।
महिलाओं को सामान्य रूप से ज्यादा सुरक्षा और समान अधिकार मिलेंगे (खासकर मुस्लिम महिलाओं के लिए संपत्ति और तलाक के मामले में बड़ा बदलाव)।
रीति-रिवाज और धार्मिक समारोह प्रभावित नहीं होंगे, सिर्फ कानूनी पहलू एक समान होंगे।

संक्षेप में फायदा क्या होगा? 

  • लिंग समानता (Gender Equality) बढ़ेगी।
  • सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून, “समान नागरिक संहिता” का मूल उद्देश्य यही है।
  • महिलाओं और बच्चों के अधिकार मजबूत होंगे।
  • विवाद कम होंगे क्योंकि नियम स्पष्ट और एक जैसे होंगे।

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