मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 21 जनवरी को वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान दावोस में पर्यटन क्षेत्र में निवेश पर केंद्रित सत्र को संबोधित करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “विकास भी, विरासत भी” के विजन से प्रेरित होकर राज्य सरकार ने पर्यटन को समावेशी और सतत विकास का मजबूत माध्यम बनाया है। इसके परिणामस्वरूप हाल के वर्षों में प्रदेश में 13.30 करोड़ से अधिक पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया है। आध्यात्मिक पर्यटन मध्यप्रदेश की प्रमुख पहचान बन चुका है। उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में अब तक 6.5 करोड़ से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। खजुराहो, सांची, ओरछा, महेश्वर, अमरकंटक और चित्रकूट जैसे ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। राज्य सरकार की पर्यटन नीति-2025 और फिल्म पर्यटन नीति-2025 के माध्यम से निवेश, रोजगार सृजन और सतत पर्यटन विकास को नई दिशा मिली है। फिल्म पर्यटन नीति के तहत मध्यप्रदेश राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्म निर्माण के लिए पसंदीदा गंतव्य के रूप में उभर रहा है।
ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के 81 गांवों में 370 से अधिक होम-स्टे विकसित किए गए हैं, जिन्हें 1000 तक बढ़ाने का लक्ष्य है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती के साथ स्थानीय लोगों को रोजगार और आय के अवसर मिल रहे हैं। पर्यटन अवसंरचना के सुदृढ़ीकरण के लिए पीएम श्री पर्यटन वायु सेवा के अंतर्गत भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन, ग्वालियर, रीवा, सिंगरौली और खजुराहो को हवाई संपर्क से जोड़ा गया है। वहीं पीएम श्री पर्यटन हेली सेवा के जरिए तेज और सुरक्षित यात्रा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।“बेस्ट टूरिज्म स्टेट ऑफ द ईयर” सहित 18 राष्ट्रीय पुरस्कार, यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में प्रदेश के चार धरोहर स्थलों का शामिल होना और देश की 69 यूनेस्को धरोहरों में से 15 का मध्यप्रदेश में स्थित होना राज्य की पर्यटन क्षमता और वैश्विक प्रतिष्ठा को दर्शाता है। मध्यप्रदेश अब पर्यटन, परंपरा और प्रगति के संगम के साथ वैश्विक निवेशकों और पर्यटकों के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है।