मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उदयपुर के भव्य प्राचीन नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर में की पूजन-अर्चना
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विदिशा जिले के बासौदा के प्रसिद्ध उदयपुर स्थित प्राचीन नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर पहुंचकर भगवान शिव की पूजन-अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली व सुख समृद्धि की कामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्राचीन और भव्य शिव मंदिर में भगवान शिव की प्रतिमा पर दूध, दही, पंचामृत से जल अभिषेक कर भगवान शिव का पूजन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि नीलकंठेश्वर मंदिर को भव्य बनाने के लिए सभी आवश्यक कार्य किए जाएंगे। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व सनातन संस्कृति की ध्वजा को अनंत ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन में श्री महाकाल महालोक और वाराणसी में बाबा विश्वनाथ की भव्यता से संसार आलोकित हो रहा है। जनवरी 1026 में महमूद गजनी ने सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण कर मंदिर को ध्वस्त कर दिया था। वर्ष 2026 में इस आस्था और सभ्यता के महान प्रतीक पर किए गए बाबर आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे हो रहे है। सोमनाथ की इसी एक हजार वर्षों की सहनशीलता, पुररूत्थान और निरंतरता को रेखांकित करने के लिये वर्ष 2026 को हम सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के रूप में मना रहे है। यह सनातन संस्कृति की ध्वजा को अनंत ऊँचाइयों पर स्थापित करेगा। 1000 वर्ष् के उतार-चढ़ाव के बावजूद यह मंदिर आज भी अपनी भव्यता और गौरव के साथ खड़ा है। यह सोमनाथ को उसके वैभव में पुनः स्थापित करने के निरंतर एवं सामूहिक प्रयासों का प्रतीक है। मंदिर निर्माण के 75 वर्ष भी 2026 में पूरे हो रहे है।
मुख्यमंत्री डा यादव ने बासौदा के उदयपुर स्थित नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर में पूजा के बाद कहा कि भगवान महादेव का नीलकंठेश्वर मंदिर अत्यंत सुंदर ऐतिहासिक और 1000 वर्ष पुराना है। उन्होंने कहा कि इतनी अद्भुत पुरातत्व संपदा को धार्मिक आस्था की दृष्टि से और अधिक सशक्त बनाने के लिए बेहतर कार्य किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आर्कियोलॉजी से जुड़े जिज्ञासुओं के लिए भी इस स्थल की जानकारी और ज्ञान का मंदिर बनाने का प्रयास किया जाएगा।
उदयपुर के नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर की विशेषताएं
उदयपुर में नीलकंठेश्वर मंदिर मध्यप्रदेश के विदिशा जिले के गंजबासौदा के पास उदयपुर गांव में स्थित एक प्राचीन और भव्य शिव मंदिर है। यह भारतीय स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसकी नक्काशी खजुराहो मंदिरों से मिलती-जुलती है। प्रत्येक महाशिवरात्रि पर यहां 5 दिवसीय मेले के आयोजन होता है। सूर्य की पहली किरण शिवलिंग पर पड़ती है, जो उदयपुर एक अनोखा और पूजनीय स्थल बनाता है। यह मंदिर खजुराहो शैली की याद दिलाने वाली सुन्दर नक्काशी के साथ गणितीय, खगोलीय ज्ञान का अद्भुत समायोजन है।