ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 हुआ प्रभावी
भोपाल। मध्यप्रदेश में पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को लेकर सरकार ने कड़ा रुख अपना लिया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने प्रदेश के सभी नगरीय निकायों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए हैं। नए नियमों के तहत अब कचरे का केवल निस्तारण ही काफी नहीं होगा, बल्कि इसे वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधित कर श्वेस्ट टू वेल्थ (कचरे से कंचन) के संकल्प को साकार करना अनिवार्य होगा।
नए नियमों के अनुसार, अब स्वच्छता की जिम्मेदारी सीधे नागरिकों के द्वार तक पहुँच गई है। प्रत्येक घर के लिए कचरे को तीन अलग-अलग श्रेणियों में बांटना अनिवार्य कर दिया गया है। गीला कचरा जिससे जैविक खाद का निर्माण किया जाएगा। सूखा कचरा जिससे वैज्ञानिक पद्धति से पुनर्चक्रण होगा और घरेलू हानिकारक कचरा इसे अलग डस्टबिन में देना होगा ताकि सुरक्षित निपटान सुनिश्चित हो सके।
नियम तोड़ने वालों पर गिरेगी गाज
विभाग ने स्पष्ट किया है कि अब स्वच्छता महज एक विकल्प नहीं, बल्कि कानूनी जिम्मेदारी है। नियमों के उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके तहतखुले में कचरा फेंकने या सार्वजनिक स्थानों को गंदा करने पर भारी जुर्माना वसूला जाएगा, प्लास्टिक जलाने जैसी गतिविधियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी, बड़े संस्थानों और बल्क वेस्ट जनरेटरों को अपने परिसर के भीतर ही ऑन-साइट प्रोसेसिंग करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
पहली बार शामिल हो रहे 28 नगरीय निकाय
आगामी स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए प्रदेश के 406 नगरीय निकाय पूरी तरह तैयार हैं। खास बात यह है कि इस बार 28 नए निकाय पहली बार इस राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में शामिल हो रहे हैं। राज्य स्तर पर तैयारियों को पुख्ता करने के लिए अब तक 51 क्षमता वर्धन कार्यशालाएं आयोजित की जा चुकी हैं। सभी निकायों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों और स्वच्छता नोडल अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया है। 874 महिला सफाई मित्रों को स्वास्थ्य, सुरक्षा और आधुनिक स्वच्छता तकनीकों का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।