तमिलनाडु : प्लोर टेस्ट में सीएम थलापति की जीत, 144 विधायकों ने दिया विश्वास मत; दो गुट में बंटे एआईएडीएमके

चेन्नई. थलपति विजय अभी के लिए सुरक्षित हो गए हैं. तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद टीवीके प्रमुख सी. जोसेफ विजय को बुधवार 13 मई को सदन में विश्वास मत मिल गया है. सदन में मौजूद 144 विधायकों ने विजय के समर्थन में वोट डाले, वहीं 22 विधायकों ने उनके खिलाफ मत डाला है. हालांकि 5 विधायकों ने कोई पक्ष नहीं रखा है.

डीएमके पार्टी नेता उदयनिधि स्टालिन ने बुधवार सुबह ऐलान कर दिया था कि उनकी पार्टी इस फ्लोर टेस्ट में शामिल नहीं  होगी. सदन में कुछ ऐसा हुआ भी कि डीएमके के 59 विधायक सदन से बाहर चले गएं. जिससे विजय की जीत की राह आसान हो गई.

दो गुट में बंटे एआईएडीएमके विधायक

थलपति विजय के लिए भले ही विश्वास मत का मुद्दा खत्म हो गया हो, लेकिन ्रढ्ढ्रष्ठरू्य खेमे के अंदर फूट अब भी जारी है. पार्टी की ओर से अपने विधायकों को विजय के खिलाफ वोट देने का निर्देश दिया गया था, इसके बाद भी 24 विधायकों ने विजय के पक्ष में वोट डाले हैं. पार्टी के मुखिया एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने इसे आदेश की अवहेलना कहा है और उस खुलकर पार्टी के अंदर चल रहे दरार के बारे में बात किया है. इसी के साथ ्रढ्ढ्रष्ठरू्य के भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं.

एआईएडीएमके के वरिष्ठ और बागी नेता सी. वी. शनमुगम ने दावा किया था कि पलानीस्वामी डीएमके के साथ मिलकर सरकार बनाना चाहती है. जिसका पार्टी के कई नेताओं ने विरोध जताया है. उनका कहना था कि हम डीएमके से इसलिए अलग हुए थे क्योंकि हमारे विचार अलग थे. अब एक होना संभव नहीं है. ऐसे में कुछ विधायकों ने टीवीके को समर्थन देने का फैसला लिया है. हालांकि बाद में उन्होंने सब ठीक बताया और कहा कि कुछ विधायक पुडुचेरी में इसलिए थे ताकी पार्टी को तोड़ा ना जा सके.

थलपति को फ्लोर टेस्ट में मिला विजय

विजय की पार्टी को विधानसभा चुनाव में 108 सीटों पर जीत मिली थी. हालांकि खुद विजय 2 सीटों से जीते थे इसिलए उन्हें एक सीट छोडऩी पड़ी. अभी टीवीके के पास कुल 107 सीटें हैं. वहीं कांग्रेस ने 5 और दो वामपंथी पार्टियों के नेता समर्थन दिया. जिसके बाद उन्होंने गठबंधन की सरकार बनाई. अब टेस्ट फ्लोर के दौरान भी विजय को 144 विधायकों का समर्थन मिल गया है.

बता दें कि भारतीय संविधान और विधानसभा के नियम के मुताबिक वोटिंग के दौरान जितने सदस्य सदन में होते हैं, सरकार बनाने के लिए उनमें से आधे+1 सदस्य का वोट चाहिए होता है. अगर यह आंकड़ा नहीं पहुंच पाता है तो मुख्यमंत्री को तुरंत इस्तीफा देना पड़ता है.


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