राजनीतिक नियुक्तियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की तैयारी

निगम-मंडल की सूची में अब नए सिरे से जुड़ सकते हैं नाम
भोपाल। प्रदेश में लंबे समय से प्रतीक्षित निगम-मंडलों और राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर अब एक नई हलचल शुरू हो गई है। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर अब इन नियुक्तियों के समीकरण पूरी तरह बदलने जा रहे हैं। पार्टी ने तय किया है कि आगामी राजनीतिक नियुक्तियों में महिलाओं की भागीदारी न केवल बढ़ाई जाएगी, बल्कि उन्हें सत्ता और संगठन के मुख्यधारा के निर्णयों में भी अहम स्थान दिया जाएगा।
भाजपा की इस कवायद के पीछे महिला मतदाताओं को एक बड़ा और स्पष्ट संदेश देने की रणनीति है। पार्टी का मानना है कि जमीनी स्तर से लेकर सत्ता के शीर्ष तक महिला नेतृत्व को प्रोत्साहित करना समय की मांग है। अब तक होने वाली नियुक्तियों में महिलाओं की उपस्थिति अक्सर सांकेतिक रहती थी, लेकिन अब रणनीति यह है कि उन्हें ’निर्णय लेने वाली’ भूमिकाओं में तैनात किया जाए। इसी क्रम में, भाजपा अपनी आगामी प्रदेश कार्यसमिति में भी महिलाओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि करने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय नेतृत्व ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा शासित राज्यों में शासन-प्रशासन के हर स्तर पर महिलाओं की सक्रिय भागीदारी दिखनी चाहिए ताकि पार्टी की उनके प्रति प्रतिबद्धता उजागर हो सके। इसी निर्देश के बाद मध्य प्रदेश में रुकी हुई नियुक्तियों की पुरानी सूचियों को अब नए सिरे से खंगाला जा रहा है और उनमें महिला कार्यकर्ताओं के नाम जोड़े जा रहे हैं।
पंचायत से नगर सरकार तक दबदबा
प्रदेश पहले से ही महिला सशक्तिकरण के मामले में अग्रणी रहा है। राज्य में पंचायत राज संस्थाओं और नगर निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण प्राप्त है। आंकड़ों पर नज़र डालें तो प्रदेश की ग्रामीण सरकार की तस्वीर काफी अच्छी नजर आती है। प्रदेश की पंचायत राज संस्थाओं में लगभग 52.84 प्रतिशत महिलाएं कमान संभाल रही हैं। पंच, सरपंच से लेकर जनपद और जिला पंचायत अध्यक्षों तक महिलाओं की सक्रिय भागीदारी है।

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