एक्स पर एक पोस्ट में एस जयशंकर ने कहा कि बातचीत क्षेत्र में चल रहे संघर्ष और इसके व्यापक आर्थिक नतीजों पर केंद्रित थी, जिसमें दोनों पक्षों ने ऊर्जा सुरक्षा संबंधी चिंताओं और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के जोखिमों पर भी चर्चा की।
यह कूटनीतिक सक्रियता ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, और वाशिंगटन तथा तेहरान की ओर से अलग-अलग बयान सामने आ रहे हैं।
ट्रंप ने ईरान पर हमलों को टालने का किया एलान
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि उन्होंने ईरान की ऊर्जा अवसंरचना पर नियोजित सैन्य हमलों को रोक दिया है। उन्होंने इस फैसले की वजह चल रही कूटनीतिक बातचीत को बताया। राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि पिछले दो दिनों में दोनों पक्षों के बीच बहुत अच्छी और उत्पादक बातचीत हुई है।
उन्होंने कहा, "मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि अमेरिका और ईरान के बीच पिछले दो दिनों में, पश्चिम एशिया में हमारी शत्रुता के पूर्ण और संपूर्ण समाधान के संबंध में बहुत अच्छी और उत्पादक बातचीत हुई है।" उन्होंने आगे कहा कि इस सप्ताह भर चर्चा जारी रहेगी।
ईरान ने बातचीत के अमेरिकी दावों को नकारा
हालांकि, तेहरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति के इस दावे को जोरदार तरीके से खारिज कर दिया। ईरान ने कहा कि हमारी अमेरिका से कोई भी बातचीत नहीं चल रही है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि कोई बातचीत नहीं हुई है। उन्होंने अमेरिका पर वैश्विक बाजारों को प्रभावित करने और चल रहे संघर्ष से ध्यान हटाने के लिए गलत सूचना फैलाने का आरोप लगाया।
उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है। वित्तीय और तेल बाजारों में हेरफेर करने के साथ अमेरिका और इस्राइल जिस दलदल में फंसे हैं, उससे निकलने के लिए फर्जी खबरों का इस्तेमाल कर रहे हैं।" उन्होंने आगे कहा, "ईरानी लोग हमलावरों को पूर्ण और पश्चातापपूर्ण सजा की मांग करते हैं। सभी ईरानी अधिकारी इस लक्ष्य को प्राप्त होने तक अपने सर्वोच्च नेता और लोगों के साथ मजबूती से खड़े हैं।"