रिटायर्ड हुए तो पेंशन से होगी वसूली, 648 करोड़ के घोटाले में जांच तेज
भोपाल। राज्य के सरकारी भुगतान तंत्र में पारदर्शिता के दावों के बीच एक बड़े वित्तीय फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। राज्य वित्तीय आसूचना प्रकोष्ठ (एसएफआईसी) द्वारा कोषालयीन सॉफ्टवेयर के डेटा एनालिसिस के दौरान प्रदेश भर में करीब 648 करोड़ रुपये की भारी वित्तीय अनियमितताएं चिन्हित की गई हैं। इस मामले में 24 विभागों के 187 आहरण एवं संवितरण अधिकारी (डीडीओ) सीधे तौर पर जांच के दायरे में आ गए हैं। गड़बड़ी सामने आने के बाद सरकार ने आक्रामक रुख अपनाते हुए अब तक गबन की गई 56 करोड़ रुपये की राशि वसूल भी कर ली है। मामले की गंभीरता को देखते हुए यह मुद्दा कैबिनेट की बैठक में भी गूंजा। वित्त मंत्री ने मुख्यमंत्री को एसएफआईसी द्वारा की जा रही कार्रवाई से अवगत कराया, जिस पर मुख्यमंत्री ने जांच में तेजी लाने और दोषियों से तत्काल वसूली के सख्त निर्देश दिए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि दोषी अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, तो उनकी पेंशन रोककर वसूली की जाएगी। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह के अनुसार, कई अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करते हुए कारण बताओ नोटिस जारी कर दिए गए हैं।
शिक्षा और राजस्व विभाग में सबसे ज्यादा गड़बड़ी
एसएफआईसी की जांच में सामने आई 648 करोड़ रुपये की गड़बड़ी में करीब 349 करोड़ रुपये के अनियमित ट्रांसफर और 299 करोड़ रुपये के संदिग्ध, कपटपूर्ण, दोहरे व अत्यधिक भुगतान शामिल हैं। एसएफआईसी की सतर्कता से 164 करोड़ रुपये के अनियमित ट्रांसफर को वापस करा लिया गया है। विभागवार आंकड़ों के अनुसार, सबसे ज्यादा 45 डीडीओ स्कूल शिक्षा विभाग से जुड़े हैं। इसके अलावा राजस्व विभाग के 43, जनजातीय कार्य विभाग के 26 और पुलिस विभाग के 12 डीडीओ जांच की जद में हैं।
विपक्ष का हमला, निष्पक्ष जांच की मांग
इतने बड़े पैमाने पर हुए घोटाले को लेकर विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि राज्य में भ्रष्टाचार और वित्तीय घोटाले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। विपक्ष ने समूचे मामले की निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच कराने और जिम्मेदार बड़े अधिकारियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।