किसानों-आदिवासियों के मुद्दों पर उठे सवालों का जवाब दे सरकार

पटवारी ने कहा कि घोषणाओं के बजाय ठोस कार्ययोजना और जमीनी हकीकत की बात करें

भोपाल। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बड़वानी में आयोजित कृषि कैबिनेट को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने इस कैबिनेट को केवल दिखावा बताते हुए कहा कि यदि यह आयोजन वाकई किसानों और आदिवासी समाज के हित में है, तो सरकार को घोषणाओं के बजाय ठोस कार्ययोजना और जमीनी हकीकत पर बात करनी चाहिए।

पटवारी ने गेहूं खरीद की लचर व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि मंडियों में फसल आने के बावजूद सरकारी खरीद की पुख्ता तैयारी क्यों नहीं है? उन्होंने सोयाबीन, गेहूं और धान के घोषित समर्थन मूल्य के वादों को पूरा करने की मांग की। साथ ही, अमेरिकी ट्रेड डील के कारण सस्ते कृषि आयात से स्थानीय किसानों को होने वाले नुकसान पर राज्य सरकार की रणनीति स्पष्ट करने को कहा। उन्होंने ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के लंबित मुआवजे, खाद-बीज की बढ़ती लागत और इनपुट लागत कम करने के लिए विशेष राहत पैकेज की मांग दोहराई।

आदिवासी समाज की सुरक्षा और हकों पर घेरा

आदिवासी बहुल क्षेत्र में हो रही कैबिनेट पर तंज कसते हुए पटवारी ने प्रदेश में लापता आदिवासी बच्चियों के बढ़ते आंकड़ों पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने सरकार से जिलेवार श्वेतपत्र जारी करने की मांग की। इसके अलावा, सरकारी नौकरियों में आदिवासियों के लिए आरक्षित बैकलॉग पदों के खाली रहने, लंबित छात्रवृत्ति और समाज के सम्मान से जुड़े मुद्दों पर सरकार को कटघरे में खड़ा किया। पटवारी ने स्पष्ट कहा कि यदि इस कृषक कल्याण वर्ष की कैबिनेट से जनता को ठोस परिणाम नहीं मिलते, तो यह साबित हो जाएगा कि सरकार की प्राथमिकताएं जनहित से ज्यादा सत्ता के इर्द-गिर्द केंद्रित हैं।

 

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