नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में कार्यरत हजारों अतिथि विद्वानों के लिए राहत भरी खबर है। उच्च शिक्षा विभाग अब प्रदेश में 'हरियाणा मॉडल' लागू करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। इस नई व्यवस्था के लागू होने से लगभग 4500 अतिथि विद्वानों को न केवल आर्थिक लाभ मिलेगा, बल्कि उनकी सेवा की असुरक्षा भी समाप्त हो जाएगी। शासन ने आगामी शैक्षणिक सत्र से इसे प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं।
सात सदस्यीय समिति की रिपोर्ट का इंतजार
हरियाणा मॉडल के अध्ययन और मध्य प्रदेश में इसके क्रियान्वयन की रूपरेखा तैयार करने के लिए शासन ने सात सदस्यीय समिति का गठन किया था। समिति को एक सप्ताह के भीतर अपना प्रतिवेदन सौंपने के निर्देश दिए गए थे ताकि समय पर नीतिगत निर्णय लिया जा सके। हालांकि, निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी समिति ने अब तक अपनी रिपोर्ट शासन को नहीं सौंपी है। मध्य प्रदेश अतिथि विद्वान महासंघ के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि सरकार हरियाणा से भी बेहतर नीति बनाती है, तो 'फालेन आउट' (सेवा से बाहर होना) की गंभीर समस्या का स्थायी समाधान हो सकेगा।
क्या है हरियाणा मॉडल और इसके लाभ?
हरियाणा मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता अतिथि विद्वानों को सेवानिवृत्ति की आयु तक सेवा स्थायित्व प्रदान करना है। इस नीति के तहत:
- पांच वर्ष का अनुभव रखने वाले यूजीसी पात्र अतिथि विद्वानों को लाभ मिलता है।
- पात्र विद्वानों को 57,700 रुपये मासिक वेतन दिया जाता है।
- हर साल जनवरी और जुलाई में सरकारी कर्मचारियों की तरह महंगाई भत्ते (DA) में वृद्धि का प्रावधान है।
- 25 से 30 वर्षों तक कार्य करने वाले शिक्षकों को नौकरी जाने का भय नहीं रहता।
मध्य प्रदेश में अतिथि विद्वानों की वर्तमान स्थिति
वर्तमान में मध्य प्रदेश के अतिथि विद्वानों की स्थिति काफी अनिश्चित है। अभी उन्हें प्रतिदिन 2,000 रुपये मानदेय के आधार पर महीने में लगभग 40 से 44 हजार रुपये प्राप्त होते हैं। हालांकि, इसमें कई विसंगतियां हैं:
- अवकाश के दिनों का कोई मानदेय नहीं दिया जाता है।
- कॉलेजों में नियमित शिक्षकों की नियुक्ति या नई भर्ती होते ही कार्यरत अतिथि विद्वानों को कार्यमुक्त कर दिया जाता है।
- वर्तमान में उन्हें केवल 13 आकस्मिक और 3 ऐच्छिक अवकाश ही सवेतन मिलते हैं।
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मध्य प्रदेश अतिथि विद्वान महासंघ के अध्यक्ष डॉ. देवराज सिंह और डॉ. आशीष पांडेय ने जल्द से जल्द समिति की रिपोर्ट सौंपने और नई नीति लागू करने की मांग की है ताकि शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रदेश के उच्च शिक्षा क्षेत्र में स्थिरता आ सके।
समिति ने अभी रिपोर्ट नहीं सौंपी है। रिपोर्ट के आधार पर हरियाणा माडल को लागू करने का प्रयास किया जाएगा।- अनुपम राजन, अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा विभाग