MP का गौरवः मैहर बैंड, अगरिया लोह और निमाड़ का स्वाद राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल, यूनेस्को की विश्व विरासत में शामिल होने का दावा हुआ मजबूत

मध्य प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति और पारंपरिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने की दिशा में एक और बड़ी सफलता मिली है।

By Sushil PandeyEdited By: manoj dubey Publish Date: Fri, 26 Jun 2026 10:26:00 PM (IST)Updated Date: Fri, 26 Jun 2026 10:34:06 PM 
  1. प्रस्ताव पिछले वर्ष संगीत नाटक अकादमी को भेजा था
  2. नामांकन प्रत्येक दो वर्ष में यूनेस्को को भेजा जाता है
  3. सांस्कृतिक विविधता को वैश्विक स्तर पर नया आयाम मिलेगा

नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति और पारंपरिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने की दिशा में एक और बड़ी सफलता मिली है। प्रदेश के प्रसिद्ध मैहर बैंड, अगरिया लोह और निमाड़ी जायका को केंद्र सरकार की राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (आईसीएच) की सूची में शामिल कर लिया गया है।

केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अधीन संगीत नाटक अकादमी द्वारा यह सूची जारी की गई है। इस उपलब्धि के बाद अब इन तीनों विरासतों को यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल कराने के दावे को बल मिला है।

प्रस्ताव पिछले वर्ष संगीत नाटक अकादमी को भेजा था

मध्य प्रदेश पर्यटन मंडल ने इन अनूठी विरासतों को राष्ट्रीय सूची में शामिल करने का प्रस्ताव पिछले वर्ष संगीत नाटक अकादमी को भेजा था। बता दें कि संगीत नाटक अकादमी भारत में यूनेस्को की नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करती है। यह हर वर्ष देशभर से प्राप्त प्रस्तावों का कड़े मानकों पर मूल्यांकन कर राष्ट्रीय सूची तैयार करती है।

नामांकन प्रत्येक दो वर्ष में यूनेस्को को भेजा जाता है

अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की राष्ट्रीय सूची में स्थान मिलना, यूनेस्को की प्रतिनिधि सूची में शामिल होने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। इसी राष्ट्रीय सूची में से चयनित विरासतों का नामांकन प्रत्येक दो वर्ष में यूनेस्को को भेजा जाता है। हालांकि ऐसे चयन के लिए कोई निश्चित समय-सीमा नहीं है।

इससे पहले प्रदेश की भगोरिया नृत्य परंपरा, नर्मदा परिक्रमा और पाटनगढ़ की गोंड पेंटिंग राष्ट्रीय सूची में शामिल हो चुकी हैं। इन तीन नई विरासतों के जुड़ने से अब मप्र की सांस्कृतिक विविधता को वैश्विक स्तर पर एक नया आयाम मिलेगा।

मैहर बैंड

मैहर के ऐतिहासिक शहर से जुड़ी एक विशिष्ट संगीत परंपरा, जो प्रसिद्ध मैहर घराना से संबंधित है। पारंपरिक रूप से वंशानुगत संगीतकार समुदायों द्वारा प्रस्तुत किया जाने वाला नाल तरंग बैंड, पवन, ताल वाद्य और स्वदेशी वाद्ययंत्रों को मिलाकर एक दुर्लभ समूह-आधारित शैली का प्रतिनिधित्व करता है, जिसे अक्सर धार्मिक समारोहों, शाही जुलूसों और सार्वजनिक अवसरों पर प्रस्तुत किया जाता है। यह परंपरा क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है।

अगरिया लोह

पारंपरिक लौह गलाने की तकनीक अगरिया लोह परंपरा अगरिया जनजाती की स्वदेशी ज्ञान प्रणाली का प्रतिनिधित्व करती है, जिसमें मिट्टी की भट्टियों, कोयले और हाथ से चलने वाली धौंकनी का उपयोग करके पर्यावरण के अनुकूल लौह गलाने की प्रक्रिया शामिल है, जिसमें पूरे परिवार की सक्रिय भागीदारी, मजबूत रीति-रिवाज और सांस्कृतिक संबंध शामिल हैं।

निमाड़ क्षेत्र का जायका

निमाड़ क्षेत्र के व्यंजन पश्चिमी मध्य प्रदेश की कृषि-पारिस्थितिक और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाते हैं। इसमें ज्वार की रोटी, अंबाड़ी भाजी, दाल पनिया, दाल बाटी, मेथी पराठा, बेसन घटा की सब्जी, बाफला, निमाड़ी ढोकला, भुट्टे की कीस, कबाब, बिरयानी और जलेबी जैसी पारंपरिक मिठाइयां शामिल हैं। ये तीनों परंपराएं मप्र की जीवंत विरासत की विविधता को दर्शाती हैं।

राष्ट्रीय सूची में जगह मिलना पीढ़ियों से संजोकर रखी गई हमारी ज्ञान प्रणालियों को बड़ी मान्यता है। प्रदेश लगातार वैश्विक मंच पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा है और ओरछा भी साल 2028 में यूनेस्को की स्थायी सूची में शामिल होने का एक मजबूत दावेदार है।

- डॉ.इलैयाराजा टी, सचिव पर्यटन एवं प्रबंध निदेशक मप्र पर्यटन मंडल


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