अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज क्षेत्र एक बार फिर वैश्विक चिंता का केंद्र बन गया है। अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसने ईरानी बंदरगाह की तरफ बढ़ रहे एक और कारोबारी जहाज को रोक दिया है। अमेरिका का कहना है कि यह जहाज ईरान पर लगाए गए समुद्री प्रतिबंध को तोड़ने की कोशिश कर रहा था। इस कार्रवाई के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि युद्धविराम आगे बढ़ेगा या हालात फिर बिगड़ेंगे।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक गाम्बिया के झंडे वाला मालवाहक जहाज ‘लियान स्टार’ अमेरिकी चेतावनियों को नजरअंदाज करते हुए ईरानी बंदरगाह की ओर बढ़ रहा था। इसके बाद ओमान की खाड़ी में अमेरिकी विमानों ने जहाज को निष्क्रिय कर दिया। अधिकारी ने बताया कि जहाज अब समुद्र में रुका हुआ है, हालांकि अमेरिकी सैनिक उस पर चढ़े नहीं हैं। अमेरिका का दावा है कि अब तक छह जहाजों को इस तरह रोका जा चुका है, जबकि एक जहाज को आगे बढ़ने की अनुमति दी गई थी।
अमेरिका ने समुद्री नाकाबंदी क्यों शुरू की?
अमेरिका ने 17 अप्रैल को ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकाबंदी शुरू की थी। यह कदम उस समय उठाया गया जब ईरान ने युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद कर दिया था। अमेरिका और इस्राइल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमले किए थे, जिसके बाद क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ा। हालांकि 7 अप्रैल से एक कमजोर युद्धविराम लागू है, लेकिन हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। अमेरिका का कहना है कि नाकाबंदी का मकसद ईरान की आर्थिक गतिविधियों को कमजोर करना और उसके नकदी प्रवाह पर रोक लगाना है।होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के लिए कितना अहम है?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। इसी रास्ते से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस और उर्वरक जैसे उत्पाद दुनिया के कई देशों तक पहुंचते हैं। ईरान और ओमान के बीच स्थित इस इलाके में तनाव बढ़ने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है। तेल और गैस की आपूर्ति बाधित होने से कई देशों में महंगाई और उत्पादन लागत बढ़ने की चिंता गहरा गई है। खाद्य उत्पादन पर भी इसका असर पड़ सकता है।
युद्धविराम को लेकर क्या स्थिति बनी हुई है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को अपने सलाहकारों के साथ बैठक की, लेकिन अभी तक यह फैसला नहीं लिया गया है कि युद्धविराम को 60 दिन और बढ़ाया जाएगा या नहीं। अमेरिका और ईरान के बीच नए परमाणु समझौते को लेकर भी बातचीत की संभावना जताई जा रही है। दूसरी तरफ ईरान का कहना है कि अभी कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है। ऐसे में खाड़ी क्षेत्र में अनिश्चितता बनी हुई है और दुनिया की नजर वॉशिंगटन और तेहरान के अगले कदम पर टिकी है।
समुद्री संकट का दुनिया पर क्या असर पड़ रहा है?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है तो इसका सीधा असर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार पर पड़ेगा। तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है और कई देशों में ईंधन महंगा हो सकता है। उर्वरक और गैस आपूर्ति प्रभावित होने से कृषि और उद्योग क्षेत्र पर भी दबाव बढ़ेगा। अमेरिका की नाकाबंदी और ईरान की प्रतिक्रिया ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। आने वाले दिनों में यह संकट और बड़ा रूप ले सकता है।