ईरान में जारी व्यापक विरोध प्रदर्शनों और इंटरनेट बंदी के बीच अमेरिका ने बड़ा कदम उठाते हुए ईरानी तेल की अवैध ढुलाई में शामिल 9 तेल टैंकरों और उनके मालिकों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के मुताबिक, इन जहाजों के जरिए सैकड़ों मिलियन डॉलर का प्रतिबंधित ईरानी तेल विदेशी बाजारों तक पहुंचाया जा रहा था।
अमेरिका का कहना है कि ये प्रतिबंध ईरान सरकार द्वारा नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई छिपाने के लिए इंटरनेट शटडाउन के जवाब में लगाए गए हैं। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह कार्रवाई उन वित्तीय स्रोतों को निशाना बनाती है, जिनका इस्तेमाल ईरान अपने ही नागरिकों को दबाने के लिए करता है।
ईरान में इंटरनेट बंदी
ईरान में 8 जनवरी से इंटरनेट सेवाएं बड़े पैमाने पर बंद कर दी गई थीं। यह बंदी तब लागू की गई जब देशभर में सरकार विरोधी प्रदर्शन तेज हो गए। जानकारों के अनुसार, यह इस्लामिक रिपब्लिक के इतिहास की सबसे लंबी और व्यापक इंटरनेट बंदी है, जिससे आम नागरिक और व्यापारिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।
‘शैडो फ्लीट’ पर अमेरिका की नजर
अमेरिकी ट्रेजरी के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) के अनुसार, जिन 9 जहाजों पर प्रतिबंध लगाया गया है, वे ‘शैडो फ्लीट’ का हिस्सा हैं। ये पुराने टैंकर आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचते हुए ईरान और रूस जैसे देशों का तेल ढोने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। ये जहाज पलाऊ, पनामा सहित अन्य देशों के झंडे तले पंजीकृत हैं। इन प्रतिबंधों के बाद संबंधित ईरानी व्यक्ति और कंपनियां अब अमेरिकी नागरिकों के साथ व्यापार नहीं कर सकेंगी और न ही अमेरिकी बैंकिंग सिस्टम तक उनकी पहुंच होगी।
अमेरिका-ईरान तनाव और बढ़ा
यह कार्रवाई ऐसे समय पर हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में मध्य पूर्व की ओर बढ़ रहे अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर समूह को आर्माडा बताया और कहा कि यह कदम एहतियातन उठाया गया है। हालांकि, ईरान के शीर्ष अभियोजक ने ट्रंप के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें कहा गया था कि अमेरिकी दबाव के कारण 800 से ज्यादा असंतुष्टों को फांसी नहीं दी गई।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार, ईरान में चल रही कार्रवाई में अब तक कम से कम 5,032 लोगों की मौत हो चुकी है। इस महीने अमेरिका पहले ही कई ईरानी अधिकारियों और संस्थानों पर प्रतिबंध लगा चुका है, जिन पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा भड़काने का आरोप है।