ग्राम सभाओं में बढ़ानी होगी जागरूकताः राज्यपाल
भोपाल। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि जनजातीय समुदाय के सशक्तिकरण की दिशा में पेसा कानून एक क्रांतिकारी और अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। इस पहल ने जनजातीय समाज के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक जीवन को विकास के नए आयाम दिए हैं।
राज्यपाल शुक्रवार को राजभवन में पंचायत एवं ग्रामीण विकास और जनजातीय कार्य विभाग की संयुक्त समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक के दौरान राज्यपाल ने पेसा नियमों के तहत गठित शांति एवं विवाद निवारण समितियों के कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर विवादों का निपटारा होना एक बड़ी सफलता है, जिससे जनजातीय समुदाय को अनावश्यक मुकदमों और आर्थिक बोझ से मुक्ति मिल रही है। यह व्यवस्था न केवल भाईचारे को मजबूत कर रही है, बल्कि सामाजिक समरसता का नया उदाहरण पेश कर रही है।
उपलब्धियों का हो व्यापक प्रचार-प्रसार
राज्यपाल पटेल ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पेसा नियमों के सफल क्रियान्वयन और ग्राम सभाओं की विशेष उपलब्धियों को नवाचार के जरिए जन-जन तक पहुँचाया जाए। उन्होंने कहा कि संबंधित विभाग पेसा की सफलताओं पर आधारित बुकलेट तैयार कर वितरित करें। ग्राम सभाओं और समितियों के उत्कृष्ट कार्यों का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित हो। पेसा मोबिलाइजर्स के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों में जागरूकता अभियान को गति दी जाए। राज्यपाल ने निर्देश दिए कि ग्राम सभाओं को और अधिक सशक्त बनाया जाए ताकि विकास की धारा अंतिम छोर तक पहुँच सके।
लंबित प्रस्तावों, पट्टा वितरण की दी जानकारी
समीक्षा बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल भी उपस्थित रहे। उन्होंने राज्यपाल को पेसा नियमों के प्रभावी प्रचार-प्रसार, आगामी लक्ष्यों और व्यावहारिक चुनौतियों के समाधान हेतु किए जा रहे प्रयासों से अवगत कराया। बैठक में मुख्य रूप से पेसा ग्राम सभाओं के वित्तीय प्रबंधन और पारदर्शिता की समीक्षा, वन ग्रामों को राजस्व ग्रामों में बदलने की प्रक्रिया की स्थिति, तेंदूपत्ता संग्रहण कार्यों के भुगतान और पारिश्रमिक की प्रगति और पेसा मोबिलाइजर्स के मानदेय भुगतान से संबंधित नई व्यवस्था पर चर्चा हुई। बैठक में विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने ग्राम सभाओं के नजरी नक्शे, लंबित प्रस्तावों और पट्टों के वितरण की वर्तमान स्थिति पर विस्तार से जानकारी दी।