एसआईआर का विरोध कर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही कांग्रेस

खंडेलवाल बोले राहुल गांधी के नेतृत्व में देश को अस्थिर करने का प्रयास
भोपाल। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर मध्यप्रदेश में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर इस प्रक्रिया को लेकर भ्रम फैलाने तथा चुनावी हार का ठीकरा एसआईआर पर फोड़ने का आरोप लगाया है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने अज मीडिया से चर्चा करते हुए कांग्रेस के विरोध पर सवाल उठाए। खंडेलवाल ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में देश को अस्थिर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि देश में अब तक 12 बार एसआईआर हो चुका है, जिनमें से 10 बार कांग्रेस के शासनकाल में भी यह प्रक्रिया अपनाई गई। इसके बावजूद कांग्रेस अब इसका विरोध कर रही है। खंडेलवाल के मुताबिक, मतदाता सूची से मृत और डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम हटाना जरूरी है। उन्होंने पश्चिम बंगाल में आबादी की औसत वृद्धि से तीन से चार गुना वृद्धि के मामले का उल्लेख करते हुए जांच की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस एसआईआर के विरोध में तीन यात्राएं निकाल चुकी है। चुनाव हारने के बाद विपक्ष कभी ईवीएम तो कभी मतदाता सूची के पुनरीक्षण को जिम्मेदार ठहराता है।
मृत और डुप्लीकेट मतदाताओं के हटाए नाम
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने भी कांग्रेस के विरोध पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि यदि एसआईआर असंवैधानिक है तो क्या जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और मनमोहन सिंह के कार्यकाल में कराई गई यही प्रक्रिया भी असंवैधानिक थी? उन्होंने दावा किया कि वर्तमान अभियान में केवल मृत और डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। शुक्ला ने राहुल गांधी की रामलीला मैदान में हुई रैली पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि दिवाली के दौरान आयोजित रैली से व्यावसायिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। उनके दावे के मुताबिक, 25 हजार कांग्रेस कार्यकर्ताओं की रैली के कारण तीन लाख व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे।
आंकड़ों के जरिए नेतृत्व पर सवाल
शुक्ला ने कांग्रेस और भाजपा के विधायकों की संख्या के आंकड़े पेश कर राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठाए। उनके अनुसार, 2004 में कांग्रेस के 1,182 और भाजपा के 899 विधायक थे। 2014 में कांग्रेस के 843 और भाजपा के 1,035 विधायक रह गए। राहुल गांधी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के समय कांग्रेस के 807, जबकि भाजपा के 1,365 विधायक थे। वर्ष 2024 में कांग्रेस के 654 और भाजपा के 1,588 विधायक थे। शुक्ला ने वर्तमान आंकड़े कांग्रेस के 663 और भाजपा के 1,819 बताए। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर शुरू होने से पहले ही कांग्रेस तीन लोकसभा और 60 विधानसभा चुनाव हार चुकी थी। ऐसे में चुनावी हार के लिए मतदाता सूची पुनरीक्षण को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
 


Leave Comments

Top