भोपाल। प्रदेश के सरकारी कार्यालयों में आउटसोर्स पर कार्यरत हजारों कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर है। अब निर्धारित समय से अतिरिक्त काम करने पर आउटसोर्स डाटा एंट्री ऑपरेटरों सहित अन्य कर्मचारियों को ओवरटाइम का अलग से भुगतान किया जाएगा। इस कर्मचारी-हितैषी निर्णय की शुरुआत राज्य गृह विभाग के अंतर्गत आने वाले लोक अभियोजन संचालनालय ने कर दी है।
संचालनालय द्वारा अपने सभी जिला कार्यालयों को जारी आधिकारिक निर्देशों के अनुसार, सेडमैप के माध्यम से ई-प्रोजीक्यूशन पोर्टल पर कार्यरत डाटा एंट्री ऑपरेटरों के उपस्थिति पत्रक (अटेंडेंस शीट) में ओवरटाइम के घंटे अनिवार्य रूप से दर्ज किए जाएंगे। यह अटेंडेंस शीट हर महीने की 1 से 5 तारीख के बीच सेडमैप को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर पारिश्रमिक और ओवरटाइम की राशि का भुगतान किया जाएगा। श्रम नियमों के अनुसार आउटसोर्सिंग एजेंसियों के लिए अपने कर्मचारियों को न्यूनतम मजदूरी, पीएफ, ईएसआई और ओवरटाइम जैसे सभी वैधानिक लाभ देना कानूनी रूप से बाध्यकारी है। लोक अभियोजन संचालनालय के इस कदम से राज्य के अन्य शासकीय विभागों पर भी आउटसोर्स कर्मचारियों को ओवरटाइम और अवकाश की सुविधाएं देने का नैतिक और कानूनी दबाव बढ़ेगा।
वेतन कटौती के बिना 12 दिन का आकस्मिक अवकाश
संचालनालय ने कर्मचारियों के हित में एक और महत्वपूर्ण प्रावधान करते हुए यह स्पष्ट किया है कि इन आउटसोर्स कर्मियों को वर्ष में 12 दिनों का आकस्मिक अवकाश भी प्रदान किया जाएगा। इस अवकाश की अवधि का कोई वेतन नहीं काटा जाएगा।
नारियल पानी पिलाकर खत्म कराया शिक्षकों का आंदोलन
भोपाल। शिक्षक भर्ती वर्ग-2 और वर्ग-3 में पद वृद्धि की मांग को लेकर लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) कार्यालय के बाहर चल रहे युवाओं का 18 दिवसीय आंदोलन गुरुवार को समाप्त हो गया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने डीपीआई परिसर पहुंचकर आंदोलनकारी अभ्यर्थियों से चर्चा की और उन्हें नारियल पानी पिलाकर भूख हड़ताल समाप्त कराई।
प्रदर्शन स्थल पर अभ्यर्थियों को संबोधित करते हुए जीतू पटवारी ने कहा कि 18 दिनों से युवा मांगों को लेकर बैठे थे, लेकिन राज्य सरकार ने उनकी सुध नहीं ली। उन्होंने कहा कि युवाओं के स्वास्थ्य और भविष्य को देखते हुए उनका अनशन समाप्त कराना नैतिक जिम्मेदारी थी। कांग्रेस के विधायक इस मुद्दे को विधानसभा के आगामी सत्र में पूरी प्रमुखता से उठाएंगे।
सरकार कर्ज ले सकती है तो शिक्षकों के लिए बजट भी बढ़ाए
ू पटवारी ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि शिक्षक भर्ती में पद वृद्धि को लेकर सरकार उदारता और बड़े मन से न्यायसंगत फैसला ले। उन्होंने कहा कि जब विभिन्न व्यवस्थाओं को चलाने के लिए सरकार कर्ज ले रही है, तो युवाओं के भविष्य और बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए बजट बढ़ाना कोई गलत कदम नहीं होगा। उन्होंने जानकारी दी कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी प्रदेश के शिक्षकों की पीड़ा को समझते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पदों की संख्या बढ़ाने का अनुरोध किया है।
शिक्षा को आंदोलन का केंद्र बनने से रोकना जरूरी
पटवारी ने चेतावनी देते हुए कहा कि योग्य शिक्षकों को पढ़ाने के बजाय सड़कों पर आंदोलन करने के लिए मजबूर करना राज्य और देश के भविष्य के लिए चिंताजनक है। शिक्षा के क्षेत्र को आंदोलन का केंद्र बनने से रोकने के लिए सरकार को तत्काल युवाओं की समस्याओं का ठोस समाधान निकालना चाहिए।
हार पर ठीकरा फोड़ने के बजाय आत्ममंथन करे कांग्रेस ’
कांग्रेस के दोहरे मापदंड पर मुख्यमंत्री ने बोला हमला’
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने चुनावी हार को लेकर कांग्रेस द्वारा निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर लगातार उठाए जा रहे सवालों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस अपनी लगातार होती पराजय के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर ठीकरा फोड़ने के बजाय स्वयं के भीतर आत्ममंथन करे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कांग्रेस की मंशा और उसके दोहरे मापदंडों पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जिस चुनाव आयोग की संवैधानिक प्रक्रिया के जरिए कांग्रेस को हिमाचल प्रदेश में सरकार बनाने का अवसर मिला और केरल में जीत हासिल हुई, उसी आयोग पर हार मिलते ही अविश्वास क्यों जताया जाता है? उन्होंने कहा कि जीत के समय प्रक्रिया को स्वीकारना और हारते ही उस पर सवाल उठाना कांग्रेस की अवसरवादी राजनीति को दर्शाता है।
संगठन, नेतृत्व और रणनीति की समीक्षा करे कांग्रेस
डॉ. मोहन यादव ने कहा कि कांग्रेस को अपने घटते जनाधार के वास्तविक कारणों की तलाश करनी चाहिए। उन्होंने ध्यान दिलाया कि तमिलनाडु में पार्टी दशकों से कमजोर है, पश्चिम बंगाल में लंबे समय से सत्ता से बाहर है तथा उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे प्रमुख राज्यों में उसका आधार लगातार खत्म होता जा रहा है। इसका जवाब चुनाव आयोग को कोसने से नहीं, बल्कि कांग्रेस के ढीले संगठन, नेतृत्व, चुनावी रणनीति और जमीनी कार्यकर्ताओं से टूटे संपर्क की समीक्षा करने से मिलेगा।
संविधान और लोकतंत्र का सम्मान जरूरी
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहाँ स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया संविधान के तहत संपन्न होती है। पराजय के बाद अराजकता का माहौल बनाना या संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाना लोकतंत्र के हित में नहीं है। हार और जीत दोनों को सहर्ष स्वीकार करना ही लोकतांत्रिक मूल्यों की सच्ची भावना है।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व पर अटूट जनविश्वास
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व की सराहना करते हुए डॉ. यादव ने कहा कि एक साधारण पृष्ठभूमि से आकर देश का मान-सम्मान वैश्विक पटल पर बढ़ाने वाले प्रधानमंत्री की लोकप्रियता को बेबुनियाद आरोपों से कम नहीं किया जा सकता। उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व को सलाह दी कि वे संवैधानिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा करने के बजाय सकारात्मक राजनीति अपनाएं, जनविश्वास पुनः हासिल करें और लोकतंत्र में सर्वाेच्च श्जनता के फैसलेश् को सिर माथे पर रखें।
पार्टनर सर्विस देने वाली संस्था पर विवाद, पुलिस कमिश्नर को सौंपा ज्ञापन
भोपाल। राजधानी में गरबा आयोजनों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। गरबा कार्यक्रमों के लिए पार्टनर उपलब्ध कराने का दावा करने वाली एक संस्था के खिलाफ श्री हिंदू उत्सव समिति और संस्कृति बचाओ मंच ने मोर्चा खोल दिया है। दोनों हिंदू संगठनों ने इस संबंध में पुलिस कमिश्नर को ज्ञापन सौंपकर संस्था के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की है।
संस्कृति बचाओ मंच के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि गरबा मां दुर्गा की आराधना और विशुद्ध धार्मिक आस्था का पर्व है। उन्होंने स्पष्ट किया कि धार्मिक आयोजन की आड़ में ऐसी किसी भी असामाजिक या अनैतिक गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, जिससे आयोजन की पवित्रता और गरिमा प्रभावित हो। संगठनों ने मांग की है कि गरबा आयोजनों में सनातन परंपराओं, नियमों और धार्मिक भावनाओं का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित कराया जाए। ज्ञापन मिलने के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आ गया है। पुलिस अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच शुरू करने का आश्वासन दिया है। पुलिस का कहना है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्षता से जांच की जा रही है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित संस्था और उसके जिम्मेदारों के खिलाफ कानूनन सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का आश्वासन, आयुष्मान योजना के तहत मरीजों की भर्ती स्थगित करने का फैसला टला
भोपाल। प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के लंबित बकाए और प्रशासनिक मुद्दों को लेकर निजी अस्पताल संचालकों द्वारा घोषित आंदोलन ने गुरुवार को राहत भरा मोड़ ले लिया। पूर्व में 8 अक्टूबर से योजना के तहत नए मरीजों की भर्ती बंद करने और 1,000 एंबुलेंसों के साथ दिल्ली कूच करने का ऐलान करने वाले अस्पताल संघ ने सरकार के साथ हुई सकारात्मक वार्ता के बाद अपने दोनों कड़े फैसले फिलहाल टाल दिए हैं।
अस्पताल संचालकों के अनुसार, प्रदेश सरकार ने लंबित बकाए और एनएबीएच से जुड़ी मांगों पर संवेदनशीलता दिखाई है। सरकार ने ट्रान्जेक्शन मैनेजमेंट सिस्टम पोर्टल पर अटके बकाए को तुरंत जारी करने पर सहमति जताई है। विशेषकर टीएमएस-2 पोर्टल पर पेंडिंग पड़े 1 लाख से अधिक क्लेम के त्वरित ऑडिट व निपटारे के लिए 50 एमबीबीएस डॉक्टरों की विशेष तैनाती की गई है। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि इन सभी क्लेम का भुगतान आगामी दो माह के भीतर पूर्ण कर दिया जाएगा।
एनएबीएच मान्यता से प्रभावित 20 अस्पतालों को राहत
बैठक में एनएबीएच प्रमाणपत्र के अभाव में योजना से निलंबित किए गए अस्पतालों के संबंध में भी अहम सहमति बनी। जिन अस्पतालों का प्री-एंट्री लेवल एनएबीएच निरीक्षण पूरा हो चुका है किंतु प्रमाणपत्र लंबित है, वे अब ऑनलाइन निरीक्षण का प्रमाण आयुष्मान विभाग में प्रस्तुत कर सकेंगे। ऐसे संस्थानों को योजना से पूरी तरह हटाने (डी-एम्पैनल) के बजाय केवल अस्थायी रूप से निलंबित श्रेणी में रखा जाएगा। प्रमाणपत्र प्राप्त होते ही उनका सस्पेंशन और होल्ड भुगतान बहाल कर दिया जाएगा। इस निर्णय से प्रदेश के लगभग 20 निजी अस्पतालों को प्रत्यक्ष राहत मिलने की उम्मीद है।
ईवीएम हटाकर चुनाव कराएं सरकार: सिंघार
भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने गुरुवार को भोपाल स्थित अपने निवास पर प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाए। सिंघार ने आरोप लगाया कि राज्य में भाजपा सरकार और चुनाव आयोग मिलकर वोट चोरी का काम कर रहे हैं, जिसे जनता कतई बर्दाश्त नहीं करेगी।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि केंद्र और राज्य की सरकारें आम जनता के मौलिक मताधिकार को छीनने में लगी हैं और चुनाव आयोग निष्पक्ष काम करने के बजाय सत्तारूढ़ दल के एजेंट की भूमिका में नज़र आ रहा है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर भाजपा ने वोट चोरी नहीं की है, तो वह ईवीएम हटाकर बैलेट पेपर से चुनाव करवाकर दिखाए, स्थिति अपने आप स्पष्ट हो जाएगी। सिंघार ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने और काटने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मांग की कि चुनाव आयोग वोटर लिस्ट से जुड़ा हर डेटा सार्वजनिक करे। उन्होंने कहा कि जानकारी छिपाने से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि प्रदेश में फिर से चुनावी हेर-फेर की साजिश रची जा रही है।
राहुल गांधी पर दर्ज एफआईआर को बताया जनता का अपमान
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि राहुल गांधी देश की आधी से अधिक आबादी और आमजन की आवाज बनकर लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। राहुल गांधी पर एफआईआर दर्ज करना देश की 140 करोड़ जनता का अपमान है। मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए सिंघार ने कहा कि जो खुद पर्ची निकलने से मुख्यमंत्री बने हों, उन्हें जनादेश पर बात करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।