विशेष न्यायालयों, पीड़ित सहायता, जागरूकता और शिकायत निवारण व्यवस्था के माध्यम से नागरिक अधिकार संरक्षण

और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियमों के बेहतर क्रियान्वयन को मजबूत कर रही सरकार

नागरिक अधिकार संरक्षण और अत्याचार निवारण अधिनियमों के क्रियान्वयन के लिए तीन वित्तीय वर्षों में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ₹1,423.30 करोड़ की केंद्रीय सहायता जारी

                          प्रविष्टि तिथि: 01 OCT 2026 2:18PM by PIB Bhopal

केंद्र सरकार, नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 और अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के प्रभावी रूप से लागू करने में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लगातार सहयोग दे रही है। इसके लिए कानून लागू करने की व्यवस्था को मजबूत करने, मामलों की जल्द सुनवाई सुनिश्चित करने, पीड़ितों को राहत और पुनर्वास प्रदान करने, कानूनी सुरक्षा उपायों के बारे में जागरूकता फ़ैलाने और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए कई उपाय किए जा रहे हैं।

दोनों अधिनियमों को लागू करना  मुख्य रूप से राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन की जिम्मेदारी है। भारत सरकार, नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 और अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के कार्यान्वयन के लिए केंद्र प्रायोजित योजना के माध्यम से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इन अधिनियमों और नियमों के तहत संस्थागत और कार्यान्वयन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।

शीघ्र सुनवाई के लिए विशेष न्यायालयों को मजबूत करना

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत मामलों की सुनवाई के लिए 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 217 विशेष न्यायालय स्थापित किए गए हैं। इस अधिनियम में उन जिलों में सत्र न्यायालयों को विशेष न्यायालय के रूप में नामित करने का भी प्रावधान है, जहां मामलों की संख्या अपेक्षाकृत कम है। इसके लिए संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सहमति आवश्यक है।

विशेष न्यायालयों की स्थापना और उन्हें मजबूत करने का उद्देश्य अधिनियम के तहत मामलों की जल्द सुनवाई और प्रभावी निपटारा सुनिश्चित करना तथा पीड़ितों को विशेष न्यायिक व्यवस्था तक पहुंच उपलब्ध कराना है।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को केंद्रीय सहायता

केंद्र प्रायोजित योजना के तहत केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 2022–23 में ₹392.71 करोड़, 2023–24 में ₹535.30 करोड़ और 2024–25 में ₹495.29 करोड़ जारी किए। इस प्रकार, इन तीन वित्तीय वर्षों में कुल ₹1,423.30 करोड़ की राशि जारी की गई।

इस योजना के तहत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति सुरक्षा प्रकोष्ठों तथा विशेष पुलिस थानों को मजबूत करने, न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने, पीड़ितों को राहत और पुनर्वास देने, अंतरजातीय विवाह के लिए प्रोत्साहन देने, जागरूकता फैलाने और अधिनियमों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए अन्य उपायों हेतु सहायता प्रदान की जाती है।

इन्हीं तीन वर्षों में क्रमशः 88,172, 79,667 और 99,216 पीड़ितों को योजना के तहत राहत मिलने की जानकारी दी गई।

कानूनी सुरक्षा उपायों के बारे में जागरूकता बढ़ाना

सरकार ने नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955, अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 और इनके तहत बनाए गए नियमों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों को उपलब्ध कानूनी सुरक्षा उपायों और अधिकारों के बारे में व्यापक जागरूकता फ़ैलाने को प्राथमिकता दी है।

केंद्र प्रायोजित योजना के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जागरूकता अभियान, कार्यशालाएं, प्रशिक्षण कार्यक्रम, जागरूकता शिविर और अन्य जनसंपर्क गतिविधियां आयोजित करने में सहायता दी जाती है, ताकि अधिनियमों और नियमों के प्रावधानों के बारे में जानकारी लोगों तक पहुंचाई जा सके।

SAMBAL – शिकायतों के समाधान तक पहुंच को मजबूत करना

शिकायतों के समाधान की व्यवस्था तक आसान पहुंच उपलब्ध कराने के लिए सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने दिसंबर 2021 में अत्याचार विरोधी राष्ट्रीय हेल्पलाइन (NHAA) शुरू की थी, जिसका बाद में नाम बदलकर SAMBAL कर दिया गया। यह पहल अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों को अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम से संबंधित शिकायतें दर्ज करने और उनकी स्थिति जानने के लिए एक आसान व्यवस्था उपलब्ध कराती है। यह हेल्पलाइन टोल-फ्री नंबर 1800-202-1989 और शॉर्ट कोड 14566 के माध्यम से उपलब्ध है।

अंतरजातीय विवाह के माध्यम से सामाजिक एकीकरण को बढ़ावा देना

सामाजिक एकीकरण, समानता और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने के सरकार के प्रयासों के तहत, केंद्र प्रायोजित योजना के अंतर्गत उन अंतरजातीय विवाहों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जिनमें पति या पत्नी में से एक अनुसूचित जाति से संबंधित हो।

अंतरजातीय विवाह के लिए प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने वाले दंपतियों की संख्या 2022-23 में 14,225 से बढ़कर 2024–25 में 26,050 हो गई।

प्राप्त दस्तावेजों में दिए गए नवीनतम अपराध संबंधी भारत के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में अधिनियम के तहत 65,646 मामले दर्ज किए गए, जबकि 2023 में 70,725 और 2022 में 67,633 मामले दर्ज किए गए थे। 2024 के अंत तक 3,92,006 मामले सुनवाई के लिए लंबित थे। ये आंकड़े समय पर जांच, प्रभावी अभियोजन और पीड़ितों को तुरंत सहायता प्रदान करने की लगातार आवश्यकता को दर्शाते हैं।

सरकार अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों को न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने और अधिनियम के कार्यान्वयन को मजबूत करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।***

MG/PD/AV

(रिलीज़ आईडी: 2317561) आगंतुक पटल : 17


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