भोपाल। प्रदेश के शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य में अब ई-अटेंडेंस दर्ज न होने पर शिक्षकों का वेतन नहीं काटा जाएगा। तकनीकी समस्याओं के कारण ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज न हो पाने को अब अनुपस्थिति का आधार नहीं माना जाएगा। हालांकि, स्कूलों में ई-अटेंडेंस लगाने की अनिवार्यता पूर्ववत लागू रहेगी।
प्रदेश के स्कूलों में ई-अटेंडेंस का आंकड़ा 98 से 99 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। इसके बावजूद नेटवर्क की समस्या, लॉगिन न होना, मोबाइल ऐप में तकनीकी खामियां, लोकेशन की गड़बड़ी और अन्य तकनीकी कारणों से स्कूल में मौजूद रहने पर भी कई शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं हो पा रही थी। इस वजह से कई कर्मचारियों के वेतन में कटौती हो रही थी, जिसे लेकर शिक्षक संगठन लगातार विरोध दर्ज करा रहे थे। शिक्षकों की इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए लोक शिक्षण संचालनालय आयुक्त ने उच्चस्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया। आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि ई-अटेंडेंस न लगने के आधार पर वेतन नहीं रोका जाएगा। यदि किसी शिक्षक की उपस्थिति तकनीकी कारणों से दर्ज नहीं हो पाती है, तो उस पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार संकुल प्राचार्य के पास होगा। इसके साथ ही, अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि यदि तकनीकी कारणों से पूर्व में किसी शिक्षक का वेतन रोका गया है, तो उसकी जानकारी तत्काल प्रस्तुत की जाए।
सागर शराब कांड पर सख्त संदेश, लापरवाही बर्दाश्त नहीं
मुडभेड़ में मुख्य आरोपी गिरफ्तार, छिंदवाड़ा में भी स्वास्थ्य सुविधाओं का हो रहा विस्तार
भोपाल। सागर जिले में जहरीली शराब पीने से 16 लोगों की मौत के मामले को लेकर मुख्यमंत्री डा मोहन यादव ने सरकार के सख्त रुख का दावा किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जहां कहीं भी गंभीर घटनाएं हुई हैं, सरकार ने तत्काल कार्रवाई की है। सागर की घटना और कानून-व्यवस्था को लेकर प्रशासन को सख्त निर्देश दिए गए हैं और ’’किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सागर शराब कांड से जुड़े लोगों के खिलाफ प्रशासन ने आवश्यक कार्रवाई की है। उन्होंने बताया कि मामले के मुख्य आरोपी रवि लखेरा को पुलिस ने शुक्रवार तड़के मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया। यादव ने कहा कि प्रदेश में नशाखोरी के खिलाफ अभियान भी चलाया जा रहा है। नशे के कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ऐसी चुनौतियों से पहले भी निपटती रही है और आगे भी प्रभावी ढंग से कार्रवाई करेगी। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब सागर में जहरीली शराब से हुई मौतों ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था और अवैध शराब के कारोबार को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
एलोपैथिक और आयुर्वेदिक अस्पताल किए जा रहे विकसित
छिंदवाड़ा कफ सिरप मामले पर मुख्यमंत्री ने कहा कि रीवा-सतना से लेकर बैतूल और छिंदवाड़ा तक का क्षेत्र लंबे समय से पिछड़ा रहा है और यहां बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य सुविधाओं की जरूरत है। उन्होंने कहा कि लोगों को इलाज के लिए जबलपुर और नागपुर न जाना पड़े, इसके लिए सरकार क्षेत्र में एलोपैथिक और आयुर्वेदिक सहित विभिन्न प्रकार के अस्पताल विकसित करने पर जोर दे रही है। गौरतलब है कि छिंदवाड़ा कफ सिरप मामले में 25 से अधिक बच्चों की मौत हुई थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से लोगों को स्थानीय स्तर पर इलाज मिलेगा और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
सेवा संकल्प अभियान के तहत होंगे कार्यक्रम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में मध्यप्रदेश में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाया जाएगा। मुख्यमंत्री यादव ने अभियान के तहत आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए प्रधानमंत्री मोदी के 25 वर्ष के सार्वजनिक जीवन को उपलब्धियों से भरा बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत का वैश्विक प्रभाव बढ़ा है और देश राष्ट्रीय हितों को सर्वाेपरि रखते हुए दुनिया के बड़े देशों के साथ आत्मविश्वास से संवाद कर रहा है।
उच्च शिक्षा पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, 17 विवि में 793 पद खाली
परिणाम में देरी और मूल्यांकन की गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया, मुख्यमंत्री से मांगा सुधार का रोडमैप
भोपाल। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। इंदौर में 19 सितंबर को प्रस्तावित राहुल गांधी के ’छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के संदर्भ में लिखे पत्र में उन्होंने विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की कमी, परीक्षा और परिणाम में देरी तथा मूल्यांकन संबंधी गड़बड़ियों का मुद्दा उठाते हुए सरकार से व्यवस्था सुधारने के लिए समयबद्ध कदम उठाने की मांग की है।
पटवारी ने कहा कि ’‘छात्रों की गूंज’’ छात्र हित से जुड़ा गैर-राजनीतिक आयोजन है। इसका उद्देश्य शिक्षा से जुड़ी समस्याओं और विद्यार्थियों की जरूरतों को सामने लाना है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था की स्थिति केवल राजनीतिक आरोप नहीं, बल्कि कैग की रिपोर्ट, विधानसभा में सरकार के जवाब और विश्वविद्यालयों से सामने आए तथ्यों से भी स्पष्ट होती है। पत्र में ग्वालियर के जीवाजी विश्वविद्यालय का हवाला देते हुए पटवारी ने कहा कि कैग की रिपोर्ट में 2021-22 से 2023-24 के दौरान परीक्षा और परिणाम में लगातार देरी दर्ज की गई। स्नातकोत्तर प्रथम और तृतीय सेमेस्टर के परिणाम 244 से 380 दिन तक देरी से जारी हुए। इससे विद्यार्थियों के अगले कक्षा में प्रवेश, प्रतियोगी परीक्षाओं और नौकरी के आवेदन प्रभावित होने का दावा किया गया। विश्वविद्यालय के करीब 72 प्रतिशत स्वीकृत शैक्षणिक पद रिक्त होने की बात भी कही गई।
17 सरकारी विश्वविद्यालयों में 793 पद रिक्त
पटवारी ने विधानसभा के सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 17 सरकारी विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक के 1,069 स्वीकृत पदों में से 793 खाली हैं। खरगोन के क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक के 80, सह प्राध्यापक के 40 और प्राध्यापक के 20 समेत सभी 140 स्वीकृत पद रिक्त बताए गए हैं।
रिजल्ट की गड़बड़ियों पर भी सवाल
बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में अंक और विषय संबंधी त्रुटियों तथा पास विद्यार्थियों को फेल दर्शाने की शिकायतों का जिक्र करते हुए पटवारी ने परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। उज्जैन के दिग्विजय विश्वविद्यालय की एक अंकसूची में 1600 में 1604 अंक दर्ज होने की घटना का भी उल्लेख किया। इसके अलावा रानी दुर्गावती, देवी अहिल्या और अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालयों से जुड़े परीक्षा व परिणाम संबंधी मामलों को भी उन्होंने गंभीर बताया। पटवारी ने सभी सरकारी विश्वविद्यालयों में स्वीकृत-रिक्त पदों की विश्वविद्यालयवार स्थिति सार्वजनिक करने, भर्ती का समयबद्ध कैलेंडर जारी करने और परीक्षा-परिणाम के लिए बाध्यकारी अकादमिक कैलेंडर लागू करने की मांग की है।
भोपाल मास्टर प्लान को लेकर कांग्रेस नेता बैठे 31 घंटे के उपवास पर
भोपाल। राजधानी भोपाल का मास्टर प्लान लागू करने में हो रही देरी को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पीसी शर्मा ने मास्टर प्लान को तुरंत लागू करने की मांग करते हुए 31 घंटे की भूख हड़ताल और धरने का ऐलान किया था। वे रोशनपुरा चौराहे स्थित कांग्रेस दफ्तर के सामने अनशन पर बैठ गए हैं।
पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि भाजपा पिछले तीन दशकों से सत्ता में है, लेकिन अब तक भोपाल का मास्टर प्लान लागू नहीं कर सकी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की 15 महीने की सरकार के दौरान मास्टर प्लान पूरी तरह तैयार कर लिया गया था, लेकिन भाजपा नेताओं की निजी जमीनों के हित फंसे होने के कारण इसे अटका कर रखा गया है। शर्मा ने कहा कि प्लान लागू न होने से आम व्यापारी और रहवासी लगातार परेशान हो रहे हैं, लेकिन सरकार मूकदर्शक बनी हुई है।
प्रधानमंत्री के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन पर भाजपा चलाएगी सेवा संकल्प अभियान
एक माह तक चलेगा अभियान, 71 हजार से अधिक बूथों पर जलेंगे आशीर्वाद के दीये
भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में मध्यप्रदेश भाजपा 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक प्रदेशव्यापी सेवा संकल्प अभियान चलाएगी। इस एक महीने लंबे अभियान के दौरान पार्टी कार्यकर्ता प्रदेश के 71 हजार से अधिक बूथों तक पहुंचकर केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के लाभार्थी परिवारों से सीधा संपर्क साधेंगे। अभियान के तहत सेवा, स्वच्छता, जनसंपर्क और जागरूकता से जुड़े 12 प्रमुख कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल ने भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान इस अभियान की विस्तृत रूपरेखा साझा की। अभियान का शुभारंभ 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर होगा। इस दिन शाम 7 बजे प्रदेश के 71 हजार से अधिक बूथों पर स्थित लाभार्थी परिवारों के घरों में ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाया जाएगा। इसके साथ ही कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों द्वारा विकसित भारत-2047 का सामूहिक संकल्प भी लिया जाएगा।
पात्रों को योजनाओं से जोड़ने सेवा सेतु शिविर
पार्टी का मुख्य फोकस उन नागरिकों पर रहेगा जो किसी न किसी सरकारी योजना के लाभार्थी रहे हैं। कार्यकर्ता उनसे संवाद कर योजनाओं से मिले लाभ का फीडबैक लेंगे और उनकी समस्याएं समझेंगे। वहीं, जो पात्र लोग अब तक योजनाओं से वंचित हैं, उन्हें ‘सेवा सेतु शिविर’ के माध्यम से तत्काल जोड़ा जाएगा।
अभियान के तहत ये होंगे मुख्य कार्यक्रम
आंगनवाड़ी केंद्रों में महिलाओं व बच्चों के स्वास्थ्य व पोषण से जुड़ी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। उत्कृष्ट कार्य करने वाली आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं का सम्मान होगा। गांधी जयंती के अवसर पर संपूर्ण प्रदेश में व्यापक स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। स्कूलों में विकसित भारत विषय पर चित्रकला और भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन होगा। प्रधानमंत्री के प्रशासनिक प्रमुख के रूप में 25 वर्ष पूरे होने पर जिला व गांव स्तर पर पदयात्रा, साइकिल व बाइक रैलियां निकाली जाएंगी। प्रदेश के 11,404 शक्ति केंद्रों से लाभार्थियों की सफलता की कम से कम 10 वास्तविक कहानियां रील्स के रूप में सोशल मीडिया पर साझा की जाएंगी। कार्यकर्ता व आम नागरिक 25 अलग-अलग सेवा गतिविधियों में कम से कम 25 मिनट का श्रमदान करेंगे। इसके अलावा नुक्कड़ नाटक और रंगोली प्रतियोगिताओं के जरिए जन-जागरूकता फैलाई जाएगी।
पांच दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग, बैंककर्मी रहे हड़ताल पर
भोपाल। पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करने की मांग को लेकर मध्य प्रदेश के करीब 40 हजार बैंक कर्मचारी शुक्रवार को एक दिवसीय हड़ताल पर रहे। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर की गई इस हड़ताल के कारण प्रदेशभर की बैंक शाखाओं में कामकाज पूरी तरह ठप रहा। भोपाल के एमपी नगर समेत विभिन्न जिलों में कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन कर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
शुक्रवार की हड़ताल का असर केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहेगा। शनिवार और रविवार को बैंकों का साप्ताहिक अवकाश होने के कारण अब लगातार तीन दिनों तक बैंकिंग सेवाएं बाधित रहेंगी। इस दौरान चेक क्लियरेंस, नगद जमा व निकासी, ड्राफ्ट और अन्य प्रशासनिक कार्य अटकने से आम जनता व व्यापारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
वार्ता विफल होने के बाद लिया फैसला
हड़ताल से पूर्व बैंक यूनियनों और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच वार्ता आयोजित की गई थी, जो बेनतीजा रही। सर्वसम्मति न बनने पर यूनियनों ने कार्य बहिष्कार का निर्णय लिया। यूनियन के राज्य को-ऑर्डिनेटर वीके शर्मा ने बताया कि हर शनिवार को अवकाश घोषित कर पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने की मांग लंबे समय से लंबित है, लेकिन सरकार इस पर टालमटोल का रवैया अपना रही है।
सितंबर अंत में फिर जा सकते हैं हड़ताल पर
चालू माह में बैंकिंग सेवाएं एक बार फिर बड़े पैमाने पर प्रभावित हो सकती हैं। 26 और 27 सितंबर को शनिवार व रविवार की छुट्टी के बाद कर्मचारियों ने 28 से 30 सितंबर तक पुनः हड़ताल का प्रस्ताव रखा है। यदि सरकार ने समय रहते मांगें स्वीकार नहीं कीं, तो सितंबर के अंत में लगातार पांच दिनों तक बैंकों में ताले लटके रह सकते हैं।
25 सितंबर से सड़कों पर उतरेंगी सुगम परिवहन बसें
55 जिलों के रूट सर्वे के बाद 150 सिटी, 450 इंटरसिटी और 436 इंटरस्टेट रूट की तैयारी
भोपाल। प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन का चेहरा बदलने की तैयारी है। राज्य सरकार 25 सितंबर से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस सेवा शुरू करने जा रही है। शहरों के साथ ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों को बेहतर बस कनेक्टिविटी से जोड़ने वाली इस व्यवस्था में ईवी और सीएनजी बसों को प्राथमिकता दी जाएगी। यात्रियों की सुरक्षा के लिए बसों में सीसीटीवी, जीपीएस, पैनिक बटन और रियल टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था होगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित यात्री परिवहन विजन समिट-2026 में सेवा शुरू करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रदेशवासियों को सरल, सुरक्षित, आधुनिक और भरोसेमंद सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री ने इसी मौके पर एमपी मोबिलिटी इनोवेशन चौलेंज-2026 की शुरुआत भी की। इसके जरिए मोबिलिटी क्षेत्र में नए प्रयोग और तकनीकी समाधान विकसित करने के लिए नागरिकों, शोधकर्ताओं, शिक्षण संस्थानों और नवप्रवर्तकों को जोड़ा जाएगा।
5 लाख किमी सड़क, 15 हजार बसों की क्षमता
प्रदेश के पास करीब पांच लाख किलोमीटर का सड़क नेटवर्क है। सरकार का मानना है कि इस नेटवर्क पर 15 हजार से अधिक बसों के संचालन की संभावनाएं हैं। प्रदेश में बड़ी संख्या में आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु भी सार्वजनिक बस परिवहन पर निर्भर हैं। ऐसे में नई बस सेवा को सरकार परिवहन व्यवस्था के साथ-साथ रोजगार और कारोबार के नए अवसरों से भी जोड़कर देख रही है। मुख्यमंत्री ने निजी बस ऑपरेटरों, बस निर्माता कंपनियों और इंडस्ट्री पार्टनर्स से सरकार के साथ जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में सार्वजनिक परिवहन का ऐसा मॉडल तैयार किया जाना चाहिए, जो यात्रियों की जरूरतों को पूरा करने के साथ देश के लिए भी उदाहरण बने।
मेट्रो के बाद बस परिवहन पर फोकस
भोपाल और इंदौर में मेट्रो के संचालन का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में परिवहन का नेटवर्क लगातार आधुनिक हो रहा है। एयरपोर्ट और सड़क अधोसंरचना में सुधार के साथ अब लोक परिवहन को भी नए दौर के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोक परिवहन का सीधा संबंध आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी से है। मुख्यमंत्री ने अहिल्याबाई होलकर के समय यात्रियों की सुविधा के लिए विकसित व्यवस्थाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इंदौर की धरती से लोक परिवहन को लेकर एक नई पहल शुरू की जा रही है।
1,036 रूट का खाका तैयार
परिवहन विभाग ने नई व्यवस्था के लिए प्रदेश के सभी 55 जिलों में रूट सर्वे पूरा कर लिया है। विभाग के मुताबिक डेटा के आधार पर करीब 150 सिटी, 450 इंटरसिटी और 436 इंटरस्टेट रूट विकसित किए जाएंगे। यानी प्रदेश में कुल 1,000 से अधिक मार्गों को नई व्यवस्था के दायरे में लाने की तैयारी है। बसों के संचालन, आईटीएमएस और परिवहन अधोसंरचना को एकीकृत करने के लिए मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड का गठन किया गया है। व्यवस्था को पीपीपी मॉडल पर विकसित किया जाएगा।
ई-बसों के साथ ग्रामीण कनेक्टिविटी पर जोर
परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल शहरों में बसों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों को भी बेहतर सार्वजनिक परिवहन से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि परिवहन व्यवस्था पेट्रोल-डीजल से आगे बढ़कर ई-बसों के दौर में पहुंच चुकी है और सरकार प्रदूषण-मुक्त परिवहन को बढ़ावा दे रही है।
यात्रियों की सुरक्षा के इंतजाम
परिवहन सचिव मनीष सिंह के अनुसार नई व्यवस्था में सुरक्षित, सुविधाजनक और किफायती यात्री परिवहन पर जोर रहेगा। बसों में तकनीकी निगरानी के साथ यात्रियों की सुरक्षा के इंतजाम किए जाएंगे। ईवी और सीएनजी बसों को प्राथमिकता देकर सार्वजनिक परिवहन को पर्यावरण-अनुकूल बनाने की भी कोशिश होगी।
टू-व्हीलर से बस तक पहुंच आसान करने की तैयारी
समिट में यात्रियों की फर्स्ट और लास्ट माइल कनेक्टिविटी पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि एक एमओयू के माध्यम से टू-व्हीलर से सुगम परिवहन बस सेवा तक यात्रियों की पहुंच आसान बनाने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे निजी वाहन से सार्वजनिक परिवहन तक पहुंचने की समस्या को कम करने की कोशिश होगी। सरकार की योजना अब केवल बस चलाने तक सीमित नहीं है। रूट प्लानिंग, डिजिटल निगरानी, सुरक्षा उपकरण, वैकल्पिक ईंधन और निजी क्षेत्र की भागीदारी को एक साथ जोड़कर प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन का नया मॉडल खड़ा करने की तैयारी है। 25 सितंबर से इसकी पहली तस्वीर सड़कों पर दिखाई देगी।