राम भक्तों से यात्रा में शामिल होने की अपील, जारी किया गूगल फार्म
भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सनातन और भगवान राम के मुद्दे पर बड़ा राजनीतिक ऐलान करते हुए आगामी 20 अक्टूबर से उज्जैन से अयोध्या तक ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ निकालने की घोषणा की है। उन्होंने विश्व हिंदू परिषद (विहिप), राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भाजपा पर राम मंदिर निर्माण के नाम पर एकत्र किए गए चंदे के दुरुपयोग का आरोप लगाया है।
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि रामशिला पूजन अभियान के दौरान उन्होंने भी बढ़-चढ़कर सहभागिता की थी। उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर निर्माण के लिए जनता से एकत्र किए गए चंदे का समुचित हिसाब सार्वजनिक नहीं किया गया और चंदे का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हुआ है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित संगठनों की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पूर्व मुख्यमंत्री के मुताबिक, ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ का उद्देश्य चंदे के कथित दुरुपयोग का मुद्दा उठाने के साथ ही सनातन के वास्तविक स्वरूप को जनता के सामने रखना है। उन्होंने कहा कि यात्रा उज्जैन से शुरू होकर अयोध्या तक जाएगी।
ऑनलाइन पंजीयन कर जुड़ सकते हैं यात्रा से
दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा देने वाले रामभक्तों और आम नागरिकों से यात्रा में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है। यात्रा में सहभागिता के लिए उन्होंने विशेष क्यूआर कोड और गूगल आवेदन फॉर्म भी जारी किया है। इसके माध्यम से इच्छुक लोग ऑनलाइन पंजीयन कर यात्रा से जुड़ सकते हैं।
अल्पेश यशवंत ने ली चीफ जस्टिस की शपथ
भोपाल। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को नया स्थायी मुख्य न्यायाधीश मिल गया है. प्रदेश के 30 वें चीफ जस्टिस के रूप में अल्पेश यशवंत कोगजे ने राजभवन में पद और गोपनीयता की शपथ ली। राजभवन में हुए शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ दिलाई। इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित कई मंत्री और अधिकारी मौजूद रहे। शपथ ग्रहण समारोह के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्य न्यायाधीश को बधाई दी है।
नव नियुक्त चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे का जन्म 16 जुलाई 1969 में हुआ था। उन्होंने बीएससी केमिस्ट्री और 1990 में एलएलबी की थी और 1993 से गुजरात में वकालत कर रहे थे। मध्य प्रदेश के चीफ जस्टिस बनाए जाने के पहले अल्पेश यशवंत कोगज गुजरात न्यायालय में वरिष्ठ न्यायाधीश के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। प्रदेश के नए चीफ जस्टिस वकील के रूप में लंबी सेवाएं दी हैं। 1993 में बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय से एलएलबी करने के बाद उन्होंन गुजराज में वकील के रूप काम करना शुरू किया। संतुलित कार्यप्रणाली और विधिक क्षेत्र में उनकी गहरी समझ को देखते हुए 2001 में उन्हें असिस्टेंट गवर्नमेंट प्लीडर और इसके बाद 2002 में एडिशनल पब्लिक प्रोसिक्यूटर बनाया गया। 6 अप्रैल 2016 में गुजराज उच्च न्यायालय में अतिरिक्त मुख्य न्यायाधीश नियुक्ति किया गया। उन्होंने आपराधिक न्यायप्रणाली, प्रशासनिक निष्पक्षता को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय दिए हैं।
भोपाल मास्टर प्लान, 31 साल के इंतजार के खिलाफ सड़कों पर कांग्रेस
31 घंटे का उपवास आज से, राज्यपाल से मिलेगा प्रतिनिधिमंडल’
भोपाल। राजधानी भोपाल के लंबे समय से लंबित मास्टर प्लान को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। कांग्रेस ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए जन-आंदोलन का ऐलान किया है। पूर्व मंत्री व वरिष्ठ कांग्रेस नेता पीसी शर्मा भोपाल के नए मास्टर प्लान को अविलंब लागू करने की मांग को लेकर कल 11 सितंबर सुबह 10 बजे से 31 घंटे के लंबे उपवास पर बैठेंगे।
पीसी शर्मा ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि राजधानी पिछले 31 वर्षों से नए मास्टर प्लान की राह देख रही है। उन्होंने दावा किया कि कमलनाथ सरकार के समय ही वर्ष 2021 तक का ड्राफ्ट बिल्डर्स, व्यापारियों और टाउन प्लानर्स के सुझावों के साथ तैयार कर लिया गया था, लेकिन मौजूदा भाजपा सरकार पिछले छह सालों में इसे अंतिम रूप देने में नाकाम रही है। इस 31 घंटे के उपवास में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह समेत कई दिग्गज नेता शामिल होंगे। पार्टी ने इसे सिर्फ राजनीतिक मुद्दा न बनाकर जन-आंदोलन का रूप देने के लिए रहवासी निकायों, व्यापारी संघों और नगर नियोजन विशेषज्ञों से सुझाव मांगे हैं। आगामी 11 सितंबर को कांग्रेस का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मुलाकात कर इस विषय में हस्तक्षेप की मांग करेगा।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें
भोपाल के नए मास्टर प्लान को तत्काल अंतिम रूप देकर जारी किया जाए, वर्ष 2021 में तैयार ड्राफ्ट की वर्तमान स्थिति पर सरकार अपना रुख स्पष्ट करे, शहर के सुनियोजित विकास के लिए स्थानीय रहवासियों, व्यापारियों और विशेषज्ञों के सुझावों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।
भाजपा का संगठन विस्तार, प्रदेश के दो नेताओं को मिली मोर्चा की जिम्मेदारी
भोपाल। भाजपा ने संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक धार देने तथा प्रशासनिक पकड़ मजबूत करने के उद्देश्य से अपने सात प्रमुख मोर्चों के प्रभारियों की आधिकारिक घोषणा कर दी है। इस नई संगठनात्मक संरचना में मध्यप्रदेश का पलड़ा भारी नजर आ रहा है। कुल सात मोर्चों में से दो महत्वपूर्ण प्रभार मध्यप्रदेश के कद्दावर नेताओं की झोली में आए हैं।
पार्टी नेतृत्व ने मध्यप्रदेश के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री लाल सिंह आर्य को किसान मोर्चा का राष्ट्रीय प्रभारी नियुक्त किया है। वहीं, खरगोन से लगातार दूसरी बार चुनकर आए सांसद गजेंद्र सिंह पटेल पर भरोसा जताते हुए उन्हें अल्पसंख्यक मोर्चे के प्रभारी की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रदेश के दो वरिष्ठ चेहरों को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी भूमिका मिलने से मप्र भाजपा खेमे में उत्साह का माहौल है।
किसान मोर्चे की कमान संभालने वाले लाल सिंह आर्य मध्यप्रदेश की राजनीति का एक जाना-माना नाम हैं। गोहद विधानसभा सीट से बार-बार विधायक रहे आर्य शिवराज सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इससे पूर्व वे भाजपा अनुसूचित जाति (एससी) मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में भी संगठन को मजबूती दे चुके हैं। अब किसान मोर्चे के जरिए देशभर के अन्नदाताओं के बीच पार्टी की पैठ बढ़ाने का जिम्मा उनके कंधों पर होगा। वहीं अल्पसंख्यक मोर्चे के प्रभारी बनाए गए गजेंद्र सिंह पटेल खरगोन लोकसभा सीट से वर्ष 2019 और 2024 में लगातार दो बार सांसद निर्वाचित हुए हैं। जनजातीय वर्ग से आने वाले पटेल की जमीनी पकड़ को देखते हुए पार्टी ने उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। अब उनके सामने देशभर में अल्पसंख्यक मोर्चे के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने और केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को राज्यों के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की मुख्य चुनौती होगी।
आस्था और विकास के संतुलन का मुद्दा गरमाया, उमा ने लिखा मुख्यमंत्री को पत्र
भोपाल मस्जिद मॉडल से समाधान की अपील
भोपाल। उज्जैन में सिंहस्थ की तैयारियों के तहत चल रहे सड़क चौड़ीकरण के दौरान ‘खड़े हनुमान मंदिर’ का ढांचा हटाए जाने को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र भेजकर इस विषय में हस्तक्षेप करने और मंदिर के संरक्षण का आग्रह किया है।
उमा भारती ने उज्जैन को मुख्यमंत्री का गृह क्षेत्र बताते हुए लिखा कि वे धार्मिक स्थलों की गरिमा को भली-भांति समझते हैं। विकास और आस्था के संतुलन की वकालत करते हुए उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल का उदाहरण दिया। उन्होंने याद दिलाया कि भोपाल के कमला पार्क के समीप सड़क चौड़ीकरण के दौरान एक मस्जिद को यथावत रखते हुए योजना का मार्ग बदल दिया गया था। उन्होंने अपील की है कि ‘खड़े हनुमान मंदिर’ के मामले में भी भोपाल जैसा ही समाधान निकाला जाए।
जेसीबी और क्रेन असफल, आईआईटी इंदौर की टीम बुलाई
कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक सड़क को 15 मीटर चौड़ा करने की योजना के तहत मंदिर का बाहरी ढांचा तो हटा दिया गया, लेकिन प्रतिमा को विस्थापित करने में प्रशासन असफल रहा। क्रेन और जेसीबी से करीब छह दिनों की मशक्कत के बाद भी प्रतिमा अपने स्थान से नहीं हिलाने पर अब नगर निगम ने आईआईटी इंदौर के विशेषज्ञों से परामर्श लेने का निर्णय लिया है।
आस्था पर ठेस नहीं होगी बर्दाश्त
मामले पर विश्व हिंदू परिषद के मालवा प्रांत मंत्री विनोद शर्मा एवं संगठन मंत्री खगेंद्र भार्गव ने स्पष्ट किया कि संगठन विकास के कार्यों में बाधक नहीं बनेगा, किंतु आस्था पर ठेस बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि स्थानीय संत समाज और प्रशासन से चर्चा कर उचित समाधान निकाला जाएगा ताकि इसे एक भव्य स्वरूप दिया जा सके।
‘छात्रों की गूंज’ से लेकर सेवा संकल्प तक, भाजपा की नजरें प्रदेश पर
दिल्ली से लौटे प्रदेश अध्यक्ष, 17 सितंबर से शुरू होने वाले अभियान की तैयारियों पर मंथन
भोपाल। भाजपा में संगठनात्मक गतिविधियों के बीच केंद्रीय नेतृत्व की नजर अब दो बड़े घटनाक्रमों पर है। एक ओर इंदौर में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर सियासी हलचल तेज है, वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सेवाकाल के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 17 सितंबर से शुरू होने जा रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ की तैयारियों को लेकर भाजपा संगठन सक्रिय हो गया है।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल दो दिन दिल्ली में रहने के बाद भोपाल लौट आए। दिल्ली प्रवास के दौरान उन्होंने संगठन के कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। इनमें राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष के साथ हुई करीब सवा घंटे की मुलाकात को सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में प्रदेश संगठन से जुड़े विभिन्न विषयों के साथ लंबित नियुक्तियों और आगामी कार्यक्रमों की तैयारियों पर चर्चा हुई।
लंबित नियुक्तियों पर भी हुई चर्चा
सूत्रों के अनुसार, प्रदेश भाजपा कार्यसमिति के विशेष आमंत्रित सदस्यों की नियुक्तियों के साथ करीब आधा दर्जन प्रकोष्ठों में लंबित नियुक्तियों का मुद्दा भी बैठक में उठा। इन नियुक्तियों में हो रही देरी को लेकर संगठन स्तर पर विचार-विमर्श किया गया। हाल ही में ओरछा में आयोजित प्रदेश भाजपा कार्यसमिति की बैठक में लिए गए निर्णयों और संगठन की गतिविधियों की जानकारी भी खंडेलवाल ने केंद्रीय नेतृत्व को दी।बैठक में 17 सितंबर से शुरू होने वाले ‘सेवा संकल्प अभियान’ की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। यह अभियान करीब एक महीने तक चलाया जाना प्रस्तावित है। भाजपा इस अभियान के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन और सेवाकाल के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करेगी।
राहुल गांधी के इंदौर कार्यक्रम पर नजर
भाजपा का केंद्रीय संगठन राहुल गांधी के इंदौर में प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम पर भी नजर बनाए हुए है। प्रदेश संगठन की ओर से कार्यक्रम से जुड़ी अब तक की स्थिति का फीडबैक केंद्रीय पदाधिकारियों को दिया गया है। इधर, इंदौर में कांग्रेस को अभी तक कार्यक्रम के आयोजन स्थल की अनुमति नहीं मिली है। कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि अनुमति मिले या नहीं, कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। वहीं प्रशासन का कहना है कि आयोजन की अनुमति पर वैधानिक प्रक्रिया के तहत निर्णय लिया जाएगा।
7 प17 से मनेगा सेवा संकल्प अभियान, जिलों की कमान संभालेंगे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी
घर-घर दीप प्रज्ज्वलन से लेकर जन सेवक महाकुंभ की तैयारी
भोपाल। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन सेवा के सफर के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में मध्य प्रदेश सरकार राज्यभर में सेवा संकल्प अभियान 25 की शुरुआत करने जा रही है। 17 सितंबर से शुरू होकर 17 अक्टूबर तक चलने वाले इस महीनेभर के अभियान को भव्य और व्यवस्थित बनाने के लिए शासन स्तर पर व्यापक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। अभियान के सुचारू संचालन के लिए प्रदेश के सभी 55 जिलों में वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारियों को नोडल ऑफिसर की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में सभी विभागाध्यक्षों और जिला कलेक्टरों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि पूरे एक माह की कार्ययोजना गुरुवार और शुक्रवार के भीतर अनिवार्य रूप से तैयार कर ली जाए। 17 सितंबर को अभियान के पहले दिन सभी नामांकित नोडल अधिकारी पूरे दिन अपने प्रभार वाले जिले में मौजूद रहेंगे। अधिकारी इस दिन आयोजित होने वाले आशीर्वाद का दीया और घर-घर दीप प्रज्ज्वलन जैसे प्रमुख कार्यक्रमों में व्यक्तिगत रूप से शामिल होंगे।
मनीष सिंह को सौंपी ंिछंदवाड़ा जिले की जिम्मेदारी
प्रशासन ने वरिष्ठ अधिकारियों के अनुभव का लाभ उठाने के लिए जिलावार प्रभार तय किए हैं। जबलपुर में मनु श्रीवास्तव, छिंदवाड़ा में मनीष सिंह, बालाघाट में सुखवीर सिंह, मंडला में गुलशन बामरा, सिवनी में निशांत बरबड़े, कटनी में संजीव सिंह, पांढुर्णा में मदन विभीषण नागरगोजे और बैतूल में हरजिंदर सिंह को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है।
मार्गदर्शन व मॉनिटरिंग करेंगे आईएएस
प्रतिदिन की गतिविधियों और कार्यक्रमों की माइक्रोप्लैनिंग में जिला कलेक्टर को तकनीकी और प्रशासनिक सहयोग देना। अभियानों के नियमित आकलन और प्रभावशीलता के लिए एक पारदर्शी मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित करना। जिले के प्रभारी मंत्री और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ बेहतर संवाद कायम कर रणनीति तैयार करना।
नियुक्ति से लेकर सेवानिवृत्ति तक के सारे काम होंगे ऑनलाइन
प्रदेश में 30 से सरकारी सेवा होगी पूरी तरह डिजिटल
भोपाल। प्रदेश सरकार ने राज्य के लाखों शासकीय सेवकों को बड़ी राहत देते हुए उनके सेवा-संबंधी प्रबंधन को पूरी तरह से पारदर्शी और डिजिटल बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य शासन ने मानव संसाधन प्रबंधन के लिए ‘ई-एचआरएमएस’ और विभागीय जांच प्रकरणों के त्वरित निपटारे के लिए डीई पोर्टल के एंड-टू-एंड ऑनलाइन वर्कफ्लो को लागू करने का निर्णय लिया है।
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, यह व्यवस्था प्रदेश के सभी विभागों और उनके अधीनस्थ क्षेत्रीय कार्यालयों में अनिवार्य रूप से लागू की जाएगी। यह नया डिजिटल सिस्टम आईएफएमआईएस स्पैरो और अन्य कर्मचारी-संबंधी पोर्टलों के साथ एकीकृत (इंटीग्रेटेड) रहेगा। इससे नियुक्ति से लेकर सेवानिवृत्ति तक कर्मचारियों के पूरे सेवा-जीवन चक्र का सुव्यवस्थित प्रबंधन हो सकेगा। लीव, टूर, एनओसी और अन्य सेवा-संबंधी अनुमतियों के निपटारे में लगने वाले समय और कागजी कार्रवाई में भारी कमी आएगी। पदोन्नति, प्रोबेशन पीरियड की पुष्टि और स्थापना से जुड़े मामलों का निपटारा तय समय-सीमा में हो सकेगा। अधिकारियों और कर्मचारियों के ट्रांसफर, पोस्टिंग और कैडर प्रबंधन के कार्य अधिक सुव्यवस्थित और पारदर्शी होंगे। डीई पोर्टल के माध्यम से विभागीय जांच के पंजीयन से लेकर अंतिम फैसले तक की पूरी प्रक्रिया की ऑनलाइन मॉनिटरिंग और ट्रैकिंग की जा सकेगी।
कर्मचारियों को मिलेगा समेकित डिजिटल प्रोफाइल
इस नई व्यवस्था से प्रत्येक शासकीय सेवक को अपना एकीकृत डिजिटल प्रोफाइल उपलब्ध होगा। इसके जरिए कर्मचारी अपनी सर्विस बुक, जीपीएफ बैलेंस, पे-स्लिप, लीव रिकॉर्ड और वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन का विवरण एक ही जगह देख सकेंगे। सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों को 30 सितंबर तक इन पोर्टलों को पूर्ण रूप से अपनाने और इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभागवार प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। शासन स्तर पर इस पूरी प्रक्रिया की नियमित समीक्षा भी की जाएगी।