शिक्षकों को मिलेगा 7 दिन से एक माह तक का प्रशिक्षण, तैयार होंगे मास्टर ट्रेनर
भोपाल। प्रदेश में योग शिक्षा को स्कूल स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए सरकार अब हर जिले में मुख्यमंत्री योग प्रशिक्षण केंद्र शुरू करने की तैयारी में है। योग आयोग ने इसके लिए कवायद तेज कर दी है। शासन की योग शिक्षा नीति-2007 के तहत कक्षा पहली से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए स्कूलों में योग कक्षाएं अनिवार्य हैं। इसके लिए कक्षावार पाठ्यक्रम भी तैयार किया जा चुका है। अब शिक्षकों को प्रशिक्षित कर स्कूलों तक योग शिक्षा पहुंचाने की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
कक्षा पहली से पांचवीं, पांचवीं से आठवीं तथा नौवीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग योग पाठ्यक्रम तैयार किए गए हैं। इसके साथ ही शिक्षकों के प्रशिक्षण की भी रूपरेखा बनाई गई है। प्रदेश के प्रत्येक जिले में संचालित जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) इस पूरी व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। डाइट में डीएड का प्रशिक्षण लेने आने वाले शिक्षकों को अब सपोर्टिंग तौर पर योग का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। यही प्रशिक्षित शिक्षक आगे चलकर जिलों में योग शिक्षा के लिए मास्टर ट्रेनर के रूप में काम करेंगे। इसके लिए डाइट में शिक्षकों को सात दिन से लेकर एक माह तक का प्रशिक्षण देने की तैयारी है। सात दिन का प्रशिक्षण सामान्य योग प्रशिक्षण होगा, जबकि एक माह के प्रशिक्षण के बाद शिक्षक को पूरी तरह मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार किया जाएगा।
हर स्कूल में होगा योग शिक्षक
योग आयोग ने भविष्य में प्रदेश के प्रत्येक स्कूल में एक योग शिक्षक की व्यवस्था करने का लक्ष्य तय किया है। यह व्यवस्था सरकारी स्कूलों के साथ निजी स्कूलों में भी लागू करने की तैयारी है। इसके तहत आगे चलकर निजी स्कूलों में भी योग शिक्षक रखना अनिवार्य किया जा सकता है। जिलों में योग गतिविधियों की निगरानी के लिए जिला योग समितियां गठित की जा चुकी हैं।
एक-दो महीने में शुरू हो सकते हैं केंद्र
सब कुछ योजना के मुताबिक रहा तो मौजूदा शैक्षणिक सत्र में ही प्रदेश के सभी जिलों में मुख्यमंत्री योग प्रशिक्षण केंद्र शुरू किए जा सकते हैं। अधिकतम एक से दो महीने में इन केंद्रों पर प्रशिक्षण गतिविधियां शुरू करने की तैयारी है। इसके लिए सभी जिलों के डाइट में प्रारंभिक स्तर पर काम शुरू किया जा चुका है। डाइट को प्रशिक्षण केंद्र के रूप में चुने जाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यहां पहले से ही आवासीय सुविधाएं उपलब्ध हैं। ऐसे में डीएड का प्रशिक्षण लेने वाले शिक्षक हॉस्टल में रहकर योग का प्रशिक्षण भी प्राप्त कर सकेंगे। इससे प्रशिक्षित शिक्षकों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार कर स्कूलों तक योग शिक्षा पहुंचाने में मदद मिलेगी।
यात्री परिवहन में आएगा बदलाव, पीपीपी मॉडल से दौड़ेंगी बस सेवाएं
शहर से गांव तक बेहतर बस कनेक्टिविटी, इंदौर में बनेगा परिवहन का रोडमैप
भोपाल। प्रदेश में यात्री परिवहन को आधुनिक, सुविधाजनक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में सरकार अब निजी क्षेत्र के साथ मिलकर नई राह तलाशेगी। इसी उद्देश्य से 11 और 12 सितंबर को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में दो दिवसीय यात्री परिवहन विजन समिट-2026 आयोजित की जाएगी।
समिट में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि और परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा को प्रदेश की नई यात्री परिवहन व्यवस्था के प्रमुख आधार के रूप में सामने रखा जाएगा। समिट में निजी बस ऑपरेटरों, बस निर्माताओं, नीति निर्माताओं, परिवहन विशेषज्ञों, टेक्नोलॉजी कंपनियों, निवेशकों और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र के प्रतिनिधियों की भागीदारी रहेगी। सरकार का जोर ऐसी परिवहन व्यवस्था विकसित करने पर है, जिसमें निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ आधुनिक तकनीक और यात्रियों की सुविधाओं को एकीकृत किया जा सके।
पीपीपी मॉडल से ग्रामीण क्षेत्रों तक कनेक्टिविटी
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत शहरों के साथ ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में बेहतर बस कनेक्टिविटी विकसित करने की योजना है। बस संचालन और इससे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा होगी। मंथन का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जो आर्थिक रूप से टिकाऊ होने के साथ यात्रियों को बेहतर सेवाएं भी उपलब्ध कराए। समिट में इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन मोबिलिटी, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम, डिजिटल टिकटिंग, फ्लीट मैनेजमेंट, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, एआई एवं एनालिटिक्स, स्मार्ट बस स्टॉप और पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम जैसे विषय प्रमुख रहेंगे। एआई आधारित रूट प्लानिंग से बसों के रूट और संचालन को अधिक प्रभावी बनाने पर भी विचार होगा।
निवेश और पायलट प्रोजेक्ट के लिए मंच
टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां अपने समाधान सरकार के समक्ष प्रस्तुत कर सकेंगी। समिट में पायलट प्रोजेक्ट, निवेश और संभावित साझेदारियों पर चर्चा के साथ कंपनियों को राज्य सरकार के नामित अधिकारियों के साथ वन-टू-वन बैठक का अवसर भी मिलेगा। इससे प्रदेश में आधुनिक यात्री परिवहन से जुड़े नए प्रोजेक्ट और निवेश की संभावनाओं को गति मिलने की उम्मीद है।
सीबीआई जांच की मांग को लेकर गांधी प्रतिमा के सामने किया प्रदर्शन
विंध्य नागरिक अधिकार मंच ने दिया एक दिवसीय सांकेतिक धरना
भोपाल। रीवा में कल्पना मिश्रा मौत मामले में न्याय की आंच अब राजधानी भोपाल तक पहुंच गई है। घटना की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से निष्पक्ष जांच कराने की मांग को लेकर रविवार को विंध्य नागरिक अधिकार मंच के बैनर तले गांधी प्रतिमा के सामने एक दिवसीय सांकेतिक धरना दिया गया। मंच के अध्यक्ष दिलीप तिवारी के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन में विंध्य क्षेत्र के नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार की कार्यप्रणाली के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए अपना आक्रोश जताया।
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि कल्पना मिश्रा ने अंतिम समय तक इलाज और मदद की गुहार लगाई थी, लेकिन उसकी पुकार को अनसुना कर दिया गया। अब यह केवल एक दुर्घटना या मौत का मामला नहीं, बल्कि पूरे विंध्य क्षेत्र के आत्मसम्मान और न्याय से जुड़ा मुद्दा बन चुका है। मंच अध्यक्ष दिलीप तिवारी ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अविलंब मामले की सीबीआई जांच के आदेश नहीं दिए, तो पूरा विंध्य क्षेत्र भोपाल में एकजुट होकर मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेगा और मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग करेगा।
मजिस्ट्रियल जांच की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
धरना प्रदर्शन के दौरान मंच ने शासन द्वारा कराई जा रही मजिस्ट्रियल जांच की विश्वसनीयता पर सीधा हमला बोला। दिलीप तिवारी ने कहा कि जिन प्रशासनिक व्यवस्थाओं की लापरवाही पर सवाल खड़े हो रहे हैं, उन्हीं के निचले तंत्र द्वारा की जाने वाली जांच कभी निष्पक्ष नहीं हो सकती। मंच का कहना है कि स्थानीय स्तर पर साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका बनी रहेगी, इसलिए मामले की जांच राज्य एजेंसी के बजाय सीबीआई को सौंपी जानी चाहिए।
मंच की प्रमुख मांगें
विंध्य नागरिक अधिकार मंच ने शासन के समक्ष पूरे कल्पना मिश्रा प्रकरण की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच तत्काल सीबीआई को सौंपी जाने, सरकारी पदों पर रहते हुए अवैध रूप से निजी नर्सिंग होम संचालित करने वाले डॉक्टरों और संबंधित अधीक्षक की भूमिका की जांच कर उन्हें सेवा से बर्खास्त किया जाने की मांग की। साथ ही सवाल उठाया कि क्या राज्य में गरीब परिवारों से जुड़े संवेदनशील मामलों में सीबीआई जांच का प्रावधान नहीं है?
महाराष्ट्र से भटके हाथी ने दी प्रदेश में दस्तक, अलर्ट जारी
सतपुड़ा टाइगर रिज़र्व की टीम दे रही वनकर्मियों को प्रशिक्षण
भोपाल। महाराष्ट्र के जंगलों से भटककर छिंदवाड़ा के पश्चिमी वन क्षेत्र में पहुँचे एक युवा और आक्रामक जंगली हाथी ने वन विभाग की नींद उड़ा दी है। संभवतः छिंदवाड़ा के इतिहास में पहली बार किसी जंगली हाथी की मौजूदगी दर्ज की गई है, जिससे स्थानीय वन अमले में हड़कंप मच गया है।
मार्च महीने में पहली बार बालाघाट सीमा में देखा गया यह हाथी 2-3 सितंबर के दौरान छिंदवाड़ा के पश्चिमी इलाक़े में दाखिल हुआ। चूँकि स्थानीय कर्मचारियों को हाथियों के प्रबंधन का पूर्व अनुभव नहीं है, इसलिए सतपुड़ा टाइगर रिज़र्व की विशेषज्ञ टीम ने उन्हें हाथी की हर हलचल पर नज़र रखने और आपात स्थिति से निपटने की बुनियादी प्रशिक्षण दिया गया। हाथी के आक्रामक और जंगली स्वभाव को देखते हुए वन विभाग ने उसकी लोकेशन के 5 किलोमीटर के दायरे में आने वाले सभी गांवों में हाई अलर्ट जारी किया है। ग्रामीणों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे हाथी का पीछा न करें, उसे घेरने की कोशिश न करें और न ही उसे कुछ खिलाएँ। पल-पल की जानकारी के आदान-प्रदान के लिए प्रभावित गाँवों के निवासियों को जोड़कर व्हाट्सएप ग्रुप भी बनाए गए हैं।
रेस्क्यू करने की योजना नहीं
सतपुड़ा टाइगर रिज़र्व की फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने बताया कि हाथी की गतिविधियों पर मार्च से ही लगातार नज़र रखी जा रही है। फिलहाल उसे रेस्क्यू करने या पकड़ने की कोई योजना नहीं है। हमारी मैदानी टीम सतर्क है और उसकी हर लोकेशन को ट्रेस किया जा रहा है। विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती हाथी को बिना छेड़े सुरक्षित रास्ता देना और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
नकली शराब से मौतों पर सरकार सख्त, तीन आबकारी अधिकारी निलंबित
एक को किया आफिस अटैच, प्रभावित परिजनों से मिले अधिकारी,
भोपाल। सागर जिले की बंडा तहसील के तीन गांवों में कथित नकली और जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश पर तीन आबकारी अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है, जबकि एक वरिष्ठ अधिकारी को जिले से हटाकर मुख्यालय अटैच किया गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि घटना के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
यह घटना सागर जिले के बंडा तहसील के ग्राम गोगरा खुर्द, नौरोज और पाटन में सामने आई है। मामले में सागर की सहायक आबकारी आयुक्त कीर्ति दुबे, सहायक जिला आबकारी अधिकारी दिलीप खंडाते और बंडा वृत्त के आबकारी उपनिरीक्षक प्रोशनी उरेती को निलंबित किया गया है। वहीं, उपायुक्त एवं संभागीय फ्लाइंग स्क्वाड प्रभारी ’’नीरजा श्रीवास्तव’’ को सागर जिले से हटाकर ग्वालियर मुख्यालय अटैच कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने दिए थे सख्त कार्रवाई के निर्देश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज 6 सितंबर की सुबह घटना को गंभीरता से लेते हुए प्रभारी मंत्री और अधिकारियों को तत्काल जांच के निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा था कि घटना के लिए जिम्मेदार किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा कर प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल जांच के साथ राहत और उपचार की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद सागर संभाग के कमिश्नर, आईजी, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सहित वरिष्ठ अधिकारी प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे। अधिकारियों ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और अस्पताल में भर्ती मरीजों के उपचार तथा चिकित्सा व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
कांग्रेस ने सरकार पर उठाए सवाल
घटना के बाद कांग्रेस ने सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने अलग-अलग बयानों में घटना को गंभीर बताते हुए प्रदेश में अवैध शराब के कारोबार पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सागर में जहरीली और अवैध शराब ने कई परिवारों को उजाड़ दिया है। उन्होंने शुरुआती जानकारी के आधार पर 12 लोगों की मौत और 25 से अधिक लोगों के अस्पताल में भर्ती होने की बात कही। साथ ही मौतों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका जताते हुए सरकार से तत्काल उच्चस्तरीय जांच टीम सागर भेजने की मांग की।
मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता की मांग
पटवारी और सिंघार ने सवाल उठाया कि सरकार की निगरानी के बावजूद अवैध शराब का कारोबार कैसे चल रहा था। उन्होंने मुख्यमंत्री से मृतकों के परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता देने, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और घटना के दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
दतिया उपचुनाव जीते घनश्याम सिंह ने ली सदस्यता की शपथ
भोपाल। दतिया विधानसभा सीट पर हाल ही में संपन्न हुए उपचुनाव में जीत हासिल करने वाले नवनिर्वाचित विधायक घनश्याम सिंह ने रविवार को विधानसभा सदस्यता संबंधी शपथ ली। उन्हें विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने अपने कक्ष में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।
विधानसभा अध्यक्ष तोमर ने घनश्याम सिंह को शपथ लेने के बाद बधाई दी और सम्मानित किया। इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह, विधायक फूल सिंह बरैया एवं कांग्रेस नेता अवधेश नायक उपस्थित थे। गौरतलब है कि इसी साल जुलाई -अगस्त में हुए दतिया उपचुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भाजपा के प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को 6029 वोटों से हराया था। इससे पहले भी यह सीट कांग्रेस के पास ही थी। घनश्याम सिंह दतिया के राजघराने से आते हैं।
अजाक्स भवन के मालिकाना हक को लेकर घमासान, परिसर के बाहर कड़ा पहरा
पुलिस ने भवन के बाहर की बैरिकेडिंग
भोपाल। अनुसूचित जाति जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (अजाक्स) में भवन के मालिकाना हक को लेकर लंबे समय से भीतर ही भीतर सुलग रही वर्चस्व की आग अब सड़कों पर आ गई है।
अदालती आदेशों के बावजूद परिसर पर काबिज गुट द्वारा खाली न किए जाने से उत्पन्न तनाव के बीच यह प्रशासनिक विवाद अब पुलिस थाने की दहलीज तक जा पहुंचा है। दोनों गुटों के बीच संभावित टकराव और सुरक्षागत खतरों की आशंका को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए अजाक्स भवन के आसपास बैरिकेडिंग कर पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया है। मामले ने उस वक्त तूल पकड़ लिया जब अजाक्स के प्रतिनिधियों ने पुलिस थाने पहुंचकर प्रशासनिक अधिकारियों को एक ज्ञापन सौंपा। संघ के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि मुकेश मौर्य द्वारा अजाक्स भवन पर अवैध कब्जा जमाया गया है, जिससे संगठन की दैनंदिन प्रशासनिक गतिविधियों और सामाजिक कार्यों में गंभीर रुकावट आ रही है। पदाधिकारियों का दावा है कि भोपाल कोर्ट ने भी इस मामले में कड़ा संज्ञान लिया है और कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के तहत मुकेश मौर्य के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करने के आदेश जारी किए गए हैं।
भवन के मुख्य मार्गों को किया सील
संघ के भीतर जारी इस गुटबाजी और खिंचाव के चलते अजाक्स भवन परिसर के बाहर स्थिति लगातार संवेदनशील बनी हुई है। किसी भी अप्रिय घटना या आमने-सामने के टकराव को टालने के लिए पुलिस बल पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। भवन की ओर जाने वाले मुख्य मार्गों को पूरी तरह सील कर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी पहली प्राथमिकता है और वे अदालत द्वारा जारी निर्देशों के आधार पर वैधानिक कार्रवाई आगे बढ़ा रहे हैं।
दुबई में सजेगा इन्वेस्ट एमपी का मंच, हजारों करोड़ के निवेश की उम्मीद
मुख्यमंत्री की यूएई यात्रा पर, रोजगार और कृषि-निर्यात का नया अध्याय
भोपाल। प्रदेश को देश का अग्रणी और समृद्ध राज्य बनाने की दिशा में एक बड़ा वैश्विक कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 7 से 9 सितंबर तक संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के प्रवास पर रहेंगे। दुबई वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में आयोजित होने वाले दुनिया के सबसे बड़े निवेश मंचों में से एक एआईएम कांग्रेस-2026 में मुख्यमंत्री राज्य का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश में भारी-भरकम वैश्विक निवेश आकर्षित करना, पर्यटन व रोजगार के अवसरों को गति देना और आगामी ‘ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 के लिए अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को आमंत्रित करना है।
दुबई के शासक शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम के संरक्षण में आयोजित इस तीन दिवसीय महाकुंभ में 180 से अधिक देशों के लगभग 20,000 प्रतिनिधियों, कई राष्ट्राध्यक्षों, मंत्रियों और वैश्विक सोवरिन वेल्थ फंड्स के हिस्सा लेने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव यह यात्रा एआईएम कांग्रेस के अध्यक्ष एवं यूएई के विदेश व्यापार राज्य मंत्री डॉ. थानी बिन अहमद अल ज़ेयूदी के विशेष आमंत्रण पर कर रहे हैं। प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री आमंत्रण-आधारित एक्सक्लूसिव ‘टाइकून्स’ कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे, जिसमें दुनिया के करीब 500 प्रमुख फैमिली ऑफिस और बड़े कारोबारी शामिल होंगे। इसके अलावा वे डीपी वर्ल्ड, वीएफएस ग्लोबल, एम्मार, चोयथराम और शराफ ग्रुप जैसी शीर्ष अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के प्रमुखों के साथ एक-से-एक बैठकें करेंगे।
किसानों के लिए सुनहरा अवसर
इस यात्रा का एक बेहद महत्वपूर्ण पहलू कृषि व खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश और निर्यात की संभावनाएं तलाशना है। उल्लेखनीय है कि यूएई अपनी खाद्य आवश्यकताओं का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है। वर्ष 2024 में यूएई का खाद्य आयात 16.2 अरब डॉलर तक पहुँच गया। वहाँ की 89 प्रतिशत प्रवासी आबादी में बड़ी संख्या में भारतीय हैं, जिससे भारतीय खाद्यान्न, दालों और प्रोसेस्ड फूड की माँग में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
कृषि-निर्यात को दुबई के बाज़ार से जोड़ने का अवसर
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, मध्य प्रदेश दालों के उत्पादन में देश में प्रथम, अनाज में दूसरे (13.04 फीसदी), मक्का में प्रथम और गेहूं उत्पादन में देश में दूसरे (20.78 फीसदी) स्थान पर है। देश का लगभग 60 फीसदी सोयाबीन अकेले मध्य प्रदेश में पैदा होता है। यात्रा के दौरान लूलू ग्रुप के चेयरमैन यूसुफ अली एम.ए. के साथ प्रस्तावित बैठक राज्य के कृषि-निर्यात को सीधे दुबई के बाज़ार से जोड़ने की दिशा में निर्णायक साबित होगी। इससे मध्य प्रदेश के लाखों किसानों को उनकी उपज के बेहतर दाम मिलेंगे और राज्य में कोल्ड चेन, ग्रेडिंग तथा फूड प्रोसेसिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर में बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश आएगा।
स्मार्ट शहरों के विकास और एफडीआई के नए रास्ते
शहरी विकास और रियल एस्टेट के क्षेत्र में दुबई दुनिया का एक प्रमुख केंद्र है। मुख्यमंत्री के दौरे में बुर्ज खलीफा के अवलोकन के साथ-साथ प्रसिद्ध रियल एस्टेट कंपनी एम्मार के शीर्ष नेतृत्व के साथ विशेष बैठक शामिल है। इंदौर, भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर जैसे मध्य प्रदेश के तेज़ी से बढ़ते मेट्रो शहरों को आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर, स्मार्ट टाउनशिप और वाणिज्यिक निवेश की सख्त आवश्यकता है। इस यात्रा से इन शहरों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के नए रास्ते खुलेंगे।