Rajendra Parasar प्रदेश के स्कूलों में हर दो में से एक छात्र ओबीसी या एसटी वर्ग से

Rajendra Parasar

यूडीआईएसई प्लस 2025-26 रिपोर्ट, स्कूलों में सुविधाएं तो बढ़ीं, लेकिन अब भी पूरी तरह उपलब्ध नहीं
भोपाल। प्रदेश की स्कूली शिक्षा की तस्वीर में सामाजिक वर्गों की भागीदारी में बड़ा अंतर सामने आया है। यूडीआईएसई प्लस 2025-26 की रिपोर्ट के मुताबिक स्कूलों में होने वाले कुल नामांकन में सबसे बड़ी हिस्सेदारी ओबीसी विद्यार्थियों की है। हर 100 विद्यार्थियों में करीब 46 ओबीसी वर्ग से हैं। वहीं एसटी विद्यार्थियों की हिस्सेदारी 21.7 फीसदी और एससी की 17 फीसदी है। यानी ओबीसी और एसटी वर्ग को मिलाकर स्कूलों में हर तीन में से करीब दो विद्यार्थी इन दो सामाजिक वर्गों से आते हैं। सामान्य वर्ग की हिस्सेदारी 15.6 फीसदी और मुस्लिम विद्यार्थियों की 6.7 फीसदी है।
रिपोर्ट के अनुसार नामांकन के साथ स्कूलों में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं के आंकड़े भी तस्वीर का दूसरा पहलू सामने रखते हैं। प्रदेश के कुल 1,19,694 स्कूलों में से 1,17,616 में लाइब्रेरी, बुक बैंक या रीडिंग कॉर्नर की सुविधा है। 1,13,236 स्कूलों में खेल का मैदान और 1,15,511 में लड़कियों के लिए शौचालय उपलब्ध है। हालांकि सुविधा उपलब्ध होने और उसके काम करने की स्थिति में अंतर अब भी बना हुआ है।
शौचालय हैं, लेकिन सभी उपयोग के लिए तैयार नहीं
रिपोर्ट के अनुसार लड़कियों के शौचालय वाले 1,15,511 स्कूलों में से 1,09,323 में शौचालय कार्यशील स्थिति में हैं। लड़कों के शौचालय 1,14,991 स्कूलों में हैं, लेकिन इनमें से 1,08,615 ही काम करने की स्थिति में हैं। यानी हजारों स्कूलों में शौचालय उपलब्ध होने के बावजूद उनके पूरी तरह कार्यशील होने की चुनौती बनी हुई है।
बिजली पहुंची, सोलर पैनल अभी दूर
प्रदेश के 1,11,976 स्कूलों में बिजली की सुविधा है। इनमें 1,08,518 स्कूलों में बिजली कार्यशील स्थिति में दर्ज की गई है। दूसरी ओर सौर ऊर्जा का इस्तेमाल अभी सीमित है। महज 6,748 स्कूलों में सोलर पैनल लगाए गए हैं। वहीं किचन गार्डन की सुविधा 23,587 स्कूलों में उपलब्ध है।
अलग लाइब्रेरी वाले स्कूल सिर्फ 2,920
पढ़ने की सुविधा के आंकड़ों में भी एक दिलचस्प अंतर सामने आया है। 1,17,616 स्कूलों में लाइब्रेरी, बुक बैंक या रीडिंग कॉर्नर में से कोई सुविधा मौजूद है, लेकिन अलग से लाइब्रेरी वाले स्कूलों की संख्या सिर्फ 2,920 है। इससे संकेत मिलता है कि बड़ी संख्या में स्कूलों में पढ़ने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर निर्भरता है।
आंकड़ों पर एक नजर
प्रदेष के कुल स्कूलों  1,19,694 में ओबीसी नामांकन 45.6 फीसदी, एसटी नामांकन 21.7 फीसदी, एससी नामांकन 17 फीसदी, सामान्य वर्ग 15.6 फीसदी, मुस्लिम नामांकन 6.7 फीसदी था। वहीं लाइब्रेरी/बुक बैंक/रीडिंग कॉर्नर 1,17,616 स्कूलों में, खेल मैदान 1,13,236 स्कूलों में, लड़कियों का शौचालय 1,15,511 स्कूलों में, कार्यशील लड़कियों के शौचालय 1,09,323 स्कूलों में, बिजली 1,11,976 स्कूलों में, कार्यशील बिजली 1,08,518 स्कूलों में, और सोलर पैनल 6,748 स्कूलों में उपलब्ध हैं।
जेन जी और जेन अल्फा के लिए भाजपा का डिजिटल सेवा संकल्प
25 लाख नागरिकों की कहानियां सोशल मीडिया पर लाएगी भाजपा
भोपाल।  भाजपा अपने सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से सोशल मीडिया के सबसे प्रभावशाली माध्यमों और युवाओं को एक साथ साधने की व्यापक रणनीति पर काम कर रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन से शुरू हो रहे इस अभियान के जरिए पार्टी का मुख्य फोकस जेन जी और जेन अल्फा की नई पीढ़ी तक अपनी पहुंच बनाना है। इसके लिए पार्टी ने मैदानी बदलाव और मोबाइल पर उसकी कहानी का नया डिजिटल फॉर्मूला तैयार किया है।
पार्टी ने इस अभियान के तहत ज़मीनी स्तर पर काम कर रहे हर शक्ति केंद्र को कम से कम 10 रील्स बनाने का स्पष्ट लक्ष्य सौंपा गया है। कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्रों के लाभार्थियों से संपर्क कर उनके जीवन में आए वास्तविक बदलावों को कैमरे में दर्ज करेंगे। 60 सेकंड की इन रील्स में लाभार्थी का नाम, स्थान, संबंधित सरकारी योजना और उससे मिले लाभ की पूरी जानकारी शामिल होगी। इसके अलावा, अभियानों में एकरूपता बनाए रखने के लिए समान हैशटैग, फ्रेम और पहचान चिन्हों का उपयोग किया जाएगा।
कहानी बदलाव की बनेगी डिजिटल सीरीज
डिजिटल मुहिम को गति देने के लिए कहानी बदलाव की नाम से एक वृहद श्रृंखला शुरू की जा रही है। पार्टी का लक्ष्य इसके माध्यम से देश भर से लगभग 25 लाख नागरिकों की सफलता और बदलाव की कहानियां डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने का है। इसके तहत 25 हजार रील्स और वीडियो शॉर्टलिस्ट किए जाएंगे। करीब 250 सबसे प्रभावशाली कहानियों को पेशेवर तरीके से शूट कर राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किया जाएगा
बदला हुआ भारत देखने पहुंचेंगे टॉप इन्फ्लुएंसर्स
इस अभियान का सबसे अनोखा पहलू देश के प्रमुख डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को ज़मीनी हकीकत से रूबरू कराना है। पार्टी इन्फ्लुएंसर्स को देश के ऐसे 50 प्रमुख स्थानों का दौरा कराएगी, जहां बुनियादी ढांचे, अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और जनजीवन में बीते वर्षों में अभूतपूर्व बदलाव आया है। इसके लिए राज्यों से ऐसे वास्तविक बदलाव वाले स्थलों की सूची मांगी गई है, जिसमें सामान्य सरकारी भवनों या औपचारिक स्थलों को शामिल नहीं किया जाएगा। इन्फ्लुएंसर्स खुद मौके पर जाकर स्थानीय लोगों से संवाद करेंगे और अपने अनुभवों को डिजिटल कंटेंट के रूप में देश के सामने रखेंगे।
नरोत्तम की दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष से मुलाकात, सियासी हलकों में चर्चाएं तेज
लगातार बड़े नेताओं से संपर्क के बाद बढ़ी अटकलें
भोपाल। प्रदेश की सियासत में पूर्व गृह मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा की सक्रियता एक बार फिर चर्चा में है। गुरुवार को दिल्ली में उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से सौजन्य भेंट की। मुलाकात को भले ही फिलहाल औपचारिक बताया जा रहा हो, लेकिन पिछले कुछ समय से नरोत्तम मिश्रा की बढ़ी राजनीतिक सक्रियता को देखते हुए इसके सियासी मायने तलाशे जा रहे हैं।
नरोत्तम मिश्रा प्रदेश भाजपा के उन वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं, जिनका संगठन और सरकार में लंबा अनुभव रहा है। ऐसे में राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ उनकी लगातार मुलाकातों ने प्रदेश भाजपा के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को हवा दे दी है। नितिन नबीन से मुलाकात के बाद अब राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या मध्य प्रदेश भाजपा संगठन में आने वाले दिनों में कोई महत्वपूर्ण बदलाव हो सकता है या नरोत्तम मिश्रा को संगठन में कोई नई जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि, भाजपा की ओर से फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं दिया गया है। लिहाजा, इन चर्चाओं को अभी राजनीतिक अटकलों से अधिक कुछ नहीं माना जा रहा है।  दरअसल, पिछले कुछ समय से प्रदेश के कई बड़े नेता लगातार नरोत्तम मिश्रा से मुलाकात कर रहे थे। इसी बीच उन्हें अचानक दिल्ली से बुलावा मिला। इसके बाद नरोत्तम मिश्रा ने अपने निर्धारित कार्यक्रम रद्द किए और दिल्ली के लिए रवाना हुए, जहां पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से उन्होंने मुलाकात की।
समसामयिक मुद्दों पर चर्चा
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, मुलाकात का आधिकारिक एजेंडा संगठन से जुड़े विषयों और समसामयिक मुद्दों पर चर्चा बताया गया है। हालांकि, एक के बाद एक बड़े नेताओं से नरोत्तम मिश्रा की मुलाकातों ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा जरूर छेड़ दी है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि दिल्ली में वरिष्ठ नेतृत्व के साथ उनकी सक्रियता आने वाले दिनों में क्या नया राजनीतिक संकेत देती है।सीलिंग की कार्रवाई पर व्यापारियों को राहत का आश्वासन
भोपाल। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने आश्वासन दिया है कि इस समस्या का जल्द ही कोई न कोई विधिक रास्ता निकाल लिया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने भोपाल मास्टर प्लान पर जल्द निर्णय लेने की बात कही और कांग्रेस नेता राहुल गांधी व सपा प्रमुख अखिलेश यादव के हालिया बयानों पर भी तीखा जुबानी हमला बोला।
पत्रकारों से चर्चा के दौरान मंत्री विजयवर्गीय ने राज्य के ज्वलंत मुद्दों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर अपनी बात रखी। उन्होंने माना कि सीलिंग की कार्रवाई से भोपाल के व्यापारी काफी परेशान हैं। उन्होंने बताया, नगरीय विकास एवं आवास विभाग के सभी वरिष्ठ अधिकारी दिल्ली में मौजूद हैं, जहाँ शीर्ष वकीलों के साथ इस मुद्दे का कानूनी समाधान तलाशने पर मंथन चल रहा है। इसके अतिरिक्त, लंबे समय से लंबित भोपाल मास्टर प्लान को लेकर भी बातचीत जारी है और इस पर जल्द अंतिम फैसला लिया जाएगा। भाजपा के आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि पूरे प्रदेश में सेवा संकल्प अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर प्रदेश के हर बूथ स्तर पर कम से कम 100 दीपक जलाने का लक्ष्य रखा गया है।
राहुल, अखिलेश पर साधा निषाना
राहुल गांधी के प्रदेश दौरे में हुए बदलाव पर कटाक्ष करते हुए मंत्री ने कहा कि वह जिस स्टेडियम में रैली की अनुमति मांग रहे हैं, वहां व्यावसायिक व राजनीतिक रैलियों पर उच्च न्यायालय का स्पष्ट प्रतिबंध है। यदि उन्हें कोर्ट का आदेश देखना है, तो वे स्वयं जाकर देख सकते हैं। वहीं अयोध्या के राम मंदिर में विशेष कर्तव्य अधिकारी के तबादले पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बयान को खारिज करते हुए विजयवर्गीय ने कहा कि अखिलेश यादव को राम मंदिर के विषय में टिप्पणी करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है, क्योंकि वे और उनकी पार्टी हमेशा से राम मंदिर निर्माण के विरोधी रहे हैं।
 157 सहायक उपनिरीक्षक बने उपनिरीक्षक, जारी किए आदेश
भोपाल। पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) भोपाल ने विभागीय पदोन्नति प्रक्रिया के तहत राज्य के सहायक उपनिरीक्षकों को त्योहारों से ठीक पहले बड़ा तोहफा दिया है। मुख्यालय ने आदेश जारी करते हुए वरिष्ठता सूची के आधार पर 157 सहायक उपनिरीक्षकों, कार्यवाहक उपनिरीक्षकों को उपनिरीक्षक के पद पर पदोन्नत कर दिया है। आदेश के अनुसार, सभी पदोन्नत अधिकारियों को उसी स्थान पर वेतनमान 9300-34800 प्लस 3600 (मैट्रिक लेवल 9) का लाभ दिया जाएगा।
पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आधिकारिक आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इससे पूर्व 20 जुलाई को जिला पुलिस बल के 2025 सहायक उपनिरीक्षकों, कार्यवाहक उपनिरीक्षकों को उपनिरीक्षक पद पर पदोन्नति दी गई थी। इसके पश्चात, विभागीय पदोन्नति समिति द्वारा समीक्षा (रिव्यू डीपीसी) बैठक का आयोजन किया गया। इस समीक्षा के आधार पर रिक्त रह गए पदों को भरते हुए वरिष्ठता क्रम के अनुसार 157 अन्य पुलिस अधिकारियों की पदोन्नति सूची जारी की गई है।
मुख्यालय ने जारी किए कड़े निर्देश
पदस्थापन और संवर्ग के संबंध में पुलिस मुख्यालय ने जारी आदेश में निर्देष दिए हैं कि यदि इस पदोन्नति सूची में कोई अधिकारी जिला बल संवर्ग के अलावा किसी अन्य संवर्ग (जैसे विशेष सशस्त्र बल-एसएएफ, जिला विशेष शाखा या अपराध अनुसंधान विभाग-सीआईडी) से संबंधित है, तो उन्हें उपनिरीक्षक (जिला संवर्ग) के रूप में आमद न कराई जाए। ऐसी स्थिति में तत्काल पुलिस मुख्यालय, भोपाल को सूचित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा निर्देष दिए हैं कि यदि सूची में दर्ज किसी अधिकारी की वर्तमान पदस्थापना उसके नाम के सामने दर्शाए गए जिले या इकाई में नहीं पाई जाती है, तो उसकी वास्तविक पदस्थापना इकाई को अवगत कराते हुए मुख्यालय को तत्काल इसकी जानकारी भेजी जाए।
 शिक्षकों की नई भर्ती में शामिल होंगे बैकलॉग और होल्ड पद
वर्तमान परीक्षा में नहीं बढ़ेंगे पद, जुलाई 2027 तक की रिक्तियों पर आएगी नई वैकेंसी
भोपाल। स्कूल शिक्षा विभाग ने राज्य में शिक्षक भर्ती को लेकर स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट कर दी है। विभाग ने साफ किया है कि वर्तमान में चल रही उच्च माध्यमिक (वर्ग-1), माध्यमिक (वर्ग-2) और प्राथमिक शिक्षक (वर्ग-3) भर्ती प्रक्रिया में पदों की संख्या नहीं बढ़ाई जाएगी। अभ्यर्थियों के लगातार जारी विरोध के बीच सरकार ने नीतिगत फैसला सुनाते हुए कहा है कि जुलाई 2027 तक की संभावित रिक्तियों की गणना के बाद नई शिक्षक भर्ती का विज्ञापन अलग से जारी किया जाएगा।
दूसरी ओर, वर्तमान भर्ती परीक्षा में पद वृद्धि की मांग को लेकर राजधानी भोपाल में अभ्यर्थियों का प्रदर्शन 15वें दिन भी जारी रहा। अभ्यर्थियों की दलील है कि रिक्त पदों की संख्या ज्यादा होने के कारण वर्तमान भर्ती में ही अतिरिक्त पद जोड़े जाएं। हालांकि, विभाग का कहना है कि नियमानुसार परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद विज्ञापित पदों की संख्या में फेरबदल नहीं किया जा सकता।
वर्तमान भर्ती में पदों का गणित
स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार कुल 18,088 रिक्तियों की स्थिति की जानकारी दी है। इसके तहत उच्च माध्यमिक शिक्षक (वर्ग-1) के कुल 4,769 पद (3,219 बैकलॉग, 1,530 नए, जबकि 1,316 पद होल्ड), इसी तरह माध्यमिक शिक्षक (वर्ग-2) के कुल 5,504 पद (2,504 बैकलॉग, 3,000 नए, जबकि 929 पद होल्ड) और प्राथमिक शिक्षक (वर्ग-3) के कुल 7,815 पद (2,315 बैकलॉग, 5,500 नए, जबकि 1,745 पद होल्ड) पद हैं। वर्तमान में कुल 18,088 पदों में से 8,038 पद बैकलॉग के हैं, 10,050 पद नए हैं और 3,990 पद (ओबीसी के 13 फीसदी होल्ड सहित) अटके हुए हैं।
पदोन्नति पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पेच
विभाग ने बताया कि शिक्षकों की पदोन्नति के संबंध में सर्वाेच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत स्टैंडिंग कौंसिल से कानूनी अभिमत लिया गया है। कौंसिल ने केवल टीईटी पास शिक्षकों को ही पदोन्नति देने की सलाह दी है, जिससे पदोन्नति प्रक्रिया फिलहाल लंबित है। कुल 72,901 रिक्त पदों में 59,073 पद पदोन्नति के हैं। पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जो पद खाली बचेंगे, उन्हें नई भर्ती प्रक्रिया में जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही, वर्तमान में खाली पड़े बैकलॉग पदों को भी आगामी नई भर्ती में फिर से विज्ञापित किया जाएगा।
45 साल पुराने डकैत विरोधी कानून की संवैधानिक वैधता पर सवाल
 पूर्व गृहमंत्री गोविंद सिंह ने हाईकोर्ट में दी चुनौती
भोपाल। प्रदेश में करीब 45 साल पुराने डकैत विरोधी कानून की प्रासंगिकता और संवैधानिक वैधता पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। पूर्व गृहमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. गोविंद सिंह ने मध्यप्रदेश डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र अधिनियम, 1981 को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उनका सवाल है कि जब प्रदेश में अब कोई सूचीबद्ध डकैत गिरोह सक्रिय नहीं है, तो फिर सामान्य आपराधिक मामलों में भी इस सख्त कानून का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है?
डॉ. गोविंद सिंह ने अपने अधिवक्ता और पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता राजीव शर्मा के माध्यम से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। याचिका में कानून की मौजूदा परिस्थितियों में प्रासंगिकता के साथ ही इसकी संवैधानिक वैधता पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिका में कहा गया है कि 1981 में यह कानून उस समय बनाया गया था, जब चंबल सहित प्रदेश के कई इलाकों में डकैत गिरोहों का आतंक बड़ी चुनौती बना हुआ था। उस दौर की परिस्थितियों से निपटने के लिए कानून में कड़े प्रावधान किए गए थे। याचिका में तर्क दिया गया है कि समय के साथ परिस्थितियों में बड़ा बदलाव आया है और जिन परिस्थितियों से निपटने के लिए यह कानून बनाया गया था, वे अब पहले जैसी नहीं हैं। इसके बावजूद कानून की कड़ी धाराओं का इस्तेमाल सामान्य आपराधिक मामलों में भी किए जाने का आरोप लगाया गया है। डॉ. गोविंद सिंह का दावा है कि मध्यप्रदेश में वर्तमान में कोई सूचीबद्ध डकैत गिरोह सक्रिय नहीं है। इसके बावजूद अधिनियम की धारा 11 और 13 जैसी कड़ी धाराओं के तहत मामले दर्ज किए जा रहे हैं। जनहित याचिका पर हाईकोर्ट की सुनवाई के बाद कानून की संवैधानिक वैधता और इसके तहत दर्ज मामलों को लेकर आगे की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है। मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर को होगी।
समानता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का हवाला
याचिका में इन प्रावधानों के इस्तेमाल को संविधान में दिए गए समानता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकारों के संदर्भ में चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता की ओर से कानून को मौजूदा परिस्थितियों में अनुपयुक्त बताते हुए इसे असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है।
 

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