राजधानी भोपाल में छोला विश्रामघाट जाने वाले मार्ग पर भारी जाम लगा, जिसमें सांसद आलोक शर्मा भी फंसे। उन्होंने अधिकारियों को तत्काल यातायात व्यवस्था सुधारने और अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए।
भोपाल के छोला विश्रामघाट मार्ग पर दो घंटे का जाम।
सांसद आलोक शर्मा अंत्येष्टि में जाते समय जाम में फंसे।
सांसद ने अधिकारियों को यातायात सुधारने के निर्देश दिए।
डिजिटल डेस्क, भोपाल। राजधानी भोपाल के पुराने शहर में छोला विश्रामघाट जाने वाला करीब दो किलोमीटर का रास्ता बुधवार को भारी जाम की चपेट में आ गया। हालात इतने खराब थे कि इस छोटे से सफर को तय करने में करीब दो घंटे लग गए। किसी परिचित की अंत्येष्टि में शामिल होने जा रहे भोपाल सांसद आलोक शर्मा भी जाम में फंस गए। इसके बाद उन्होंने मौके से ही प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से फोन पर बात कर तत्काल यातायात व्यवस्था सुधारने के दिए निर्देश
सांसद के जाम में फंसने की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस का अमला सक्रिय हुआ। अधिकारी मौके पर पहुंचे और पूरे मार्ग का निरीक्षण किया। इस दौरान सड़क किनारे बेतरतीब खड़े ऑटो, वाहन, गुमठियां और अस्थायी दुकानों के कारण यातायात बाधित होने की स्थिति सामने आई।
आलोक शर्मा ने अधिकारियों के सामने नाराजगी जताते हुए कहा कि जब एक सांसद को महज दो किलोमीटर की दूरी तय करने में दो घंटे लग रहे हैं, तो आम लोगों को रोजाना कितनी परेशानी का सामना करना पड़ता होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
उन्होंने तत्काल सड़क किनारे अव्यवस्थित तरीके से खड़े ऑटो और वाहनों को व्यवस्थित कराने के साथ अतिक्रमण हटाने और यातायात सुचारु करने के निर्देश दिए।
सांसद ने कलेक्टर प्रियंक मिश्रा से भी इस संबंध में चर्चा की। इसके साथ ही पुलिस आयुक्त संजय कुमार से फोन पर बात कर संबंधित पुलिस अधिकारियों को तत्काल मौके पर भेजने के लिए कहा। कुछ ही देर में प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और यातायात व्यवस्था का जायजा लिया।
सांसद शर्मा ने कहा कि छोला विश्रामघाट जाने वाला मार्ग बेहद संवेदनशील है। यहां लोग अपने परिजनों की अंतिम यात्रा में शामिल होने और दुख की घड़ी में पहुंचते हैं। ऐसे रास्ते पर जाम और अतिक्रमण की स्थिति बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि केवल तत्काल राहत तक सीमित न रहते हुए मार्ग की यातायात व्यवस्था को स्थायी रूप से बेहतर बनाया जाए। सड़क किनारे खड़े वाहनों, गुमठियों और अस्थायी दुकानों को व्यवस्थित करने के साथ अतिक्रमण हटाने की प्रभावी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में लोगों को दो किलोमीटर का सफर तय करने में घंटों जाम से न जूझना पड़े।