भोपाल, 5 अगस्त 2026: Commercial activities in residential areas of Bhopal मामले में आज मध्य प्रदेश के सरकारी वकील को कड़ी फटकार लगाते हुए मुख्यमंत्री द्वारा बनाई गई समिति को भंग कर दिया। इतना ही नहीं इस मामले में व्यापारियों ने हाई कोर्ट से जितने भी स्टे आर्डर प्राप्त किए थे, उनको भी खत्म कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब हम मामला देख रहे हैं, तो फिर किसी और को देखने की क्या जरूरत है।
व्यापारियों ने पॉलीटिकल प्रेशर क्रिएट किया था
यह मामला भोपाल के रेजिडेंशियल इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों का है। अरेरा कालोनी समेत पूरे भोपाल में रेजिडेंशियल कॉलोनियों में दुकान, शोरूम, रेस्टोरेंट, अस्पताल यहां तक की बैंक की ब्रांच भी खुल गई है। कई इलाकों में तो समझ में ही नहीं आता कि यह बस्ती है या बाजार। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसी सभी व्यावसायिक गतिविधियों को तत्काल बंद करने के आदेश दिए थे लेकिन व्यापारी संगठनों ने भोपाल के विधायकों पर प्रेशर क्रिएट किया और विधायकों ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन हेतु 10 सदस्यों की समिति बनाई थी और नगर निगम को निर्देश दिए थे कि वह समिति के निर्देशानुसार काम करे।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा: जब हम देख रहे हैं तो फिर आप क्यों देख रहे हो
आज जब मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा तो यह मामला सामने आया। यह भी बताया गया कि व्यापारियों ने इस कार्रवाई के खिलाफ हाई कोर्ट से स्थगन आदेश प्राप्त कर लिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट द्वारा जारी किए गए सभी स्थगन आदेश निरस्त कर दिए। इसके अलावा मुख्यमंत्री द्वारा बनाई गई 10 सदस्य समिति को भी अस्वीकार कर दिया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मध्य प्रदेश शासन की ओर से पेश अधिवक्ता को भी कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के समानांतर किसी अन्य प्रक्रिया या जांच समिति के माध्यम से कार्रवाई प्रभावित नहीं की जा सकती।
नगर निगम ने सुप्रीम कोर्ट को बताया: बहुत पॉलीटिकल प्रेशर है
सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से अदालत को बताया गया कि निगम अवैध निर्माण और व्यावसायिक उपयोग के खिलाफ कार्रवाई करना चाहता है, लेकिन विभिन्न स्तरों पर बाधाओं के कारण प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून के पालन में किसी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। अवैध निर्माण और भूमि उपयोग के उल्लंघन के मामलों में निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई जारी रखी जाए। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद नगर निगम को फ्री हैंड मिल गया है। माना जा रहा है कि गुरुवार से नगर निगम की कार्रवाई फिर शुरू हो जाएगी।
भोपाल की जनता सड़कों पर उतरी
अवैध व्यावसायिक गतिविधियों के विरोध में अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर, बावड़ियाकलां सहित कई क्षेत्रों के रहवासियों ने संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति के बैनर तले प्रदर्शन और पैदल मार्च निकाला था। उनका कहना था कि आवासीय क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही व्यावसायिक गतिविधियों से यातायात, पार्किंग और सुरक्षा संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं।
याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने सुप्रीम कोर्ट में यह मुद्दा उठाया था कि नगर निगम ने जिन प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी, उनमें अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई और बाद में कई सील प्रतिष्ठान दोबारा खुल गए। उनका कहना था कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद कार्रवाई कमजोर पड़ गई।
भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज: प्रेशर पॉलिटिक्स कंटिन्यू
वहीं दूसरी ओर भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (बीसीसीआई) ने व्यापारियों के समर्थन में मिक्स लैंड यूज व्यवस्था लागू करने की मांग उठाई थी। संगठन का तर्क था कि वर्ष 2005 के बाद नया मास्टर प्लान लागू नहीं होने के कारण व्यापारियों को उनकी जरूरत के अनुरूप व्यावसायिक भूखंड उपलब्ध नहीं हो सके और मजबूरी में आवासीय परिसरों से व्यवसाय संचालित करना पड़ रहा है।

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