एमपी में पदोन्‍नति में आरक्षण पर बड़ी खबर, सरकार ने नियम निरस्‍ती मामले को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती

सभी पक्षों को सुना जा चुका है और निर्णय आना है लेकिन अब यह तभी आएगा, जब सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले का निराकरण हो जाए। इसके लिए हाई कोर्ट ने सरकार स...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Navodit Saktawat  Publish Date: Wed, 05 Aug 2026 06:40:50 PM (IST)Updated Date: Wed, 05 Aug 2026 06:50:00 PM (IST)
एमपी में पदोन्‍नति में आरक्षण पर बड़ी खबर, सरकार ने नियम निरस्‍ती मामले को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती

पदोन्‍नति में आरक्षण मामला।

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट से निर्णय होने तक पदोन्नति पर लटकी रहेगी तलवार।
  2. पदोन्नति नियम-2002 निरस्त करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती।
  3. मध्‍य प्रदेश सरकार अब जल्द ही सुनवाई के लिए देगी आवेदन।

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। पदोन्नति में आरक्षण का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। जब तक वहां से कोई निर्णय नहीं हो जाता है तब तक अधिकारियों-कर्मचारियों की पदोन्नति पर तलवार लटकी रहेगी क्योंकि हाई कोर्ट पदोन्नति-2025 के नियम पर तब तक अंतिम निर्णय नहीं सुनाएगा। इसी नियम के आधार पर प्रदेश में पदोन्नतियां हो रही हैं। पदोन्नति नियम-2002 को हाई कोर्ट जबलपुर ने निरस्त किया गया था।

सरकार ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। मामला अभी विचाराधीन है। मई 2016 से पदोन्नतियां बंद हो गईं। कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ी तो सरकार ने उच्च पद का प्रभार देकर वैकल्पिक व्यवस्था बनाई। इस बीच नया पदोन्नति नियम-2025 लागू किया गया। इसे भी हाई कोर्ट में चुनौती दी गई लेकिन स्थगन नहीं मिला।

इसके आधार पर इसी वर्ष जून से विभिन्न विभागों में पदोन्नतियां प्रारंभ हुईं। अब तक लगभग 60 हजार पदोन्नतियां हो चुकी हैं। स्कूल शिक्षा और पुलिस कर्मचारियों की पदोन्नति होते ही यह संख्या एक लाख तक पहुंच सकती है। नए नियम को लेकर हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही है।

सभी पक्षों को सुना जा चुका है और निर्णय आना है लेकिन अब यह तभी आएगा, जब सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले का निराकरण हो जाए। इसके लिए हाई कोर्ट ने सरकार से कहा है कि वह जल्द सुनवाई के लिए प्रयास करे।

सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रकरण के निराकरण के लिए एक बार फिर जल्द सुनवाई का आवेदन दिया जाएगा।

वहीं, जब तक मामले का निराकरण नहीं हो जाता तब जब पदोन्नति पर तलवार लटकी रहेगी। वैसे भी पदोन्नति आदेश में स्पष्ट किया गया है कि ये न्यायालय के आदेश के अधीन हैं और जो निर्णय आएगा उसके आधार पर कदम उठाए जाएंगे।


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