छिंदवाड़ा से शुरू होगा मुख्यमंत्री का जन विश्वास अभियान
भोपाल। मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान 2026 के तहत अपनी नई पहल की शुरुआत छिंदवाड़ा जिले से करने जा रहे हैं। आगामी शुक्रवार, 7 अगस्त को होने वाला यह दौरा अभियान का पहला जिला स्तरीय भ्रमण होगा, जिसमें मुख्यमंत्री न केवल जनता की समस्याओं को व्यक्तिगत रूप से सुनेंगे, बल्कि प्रशासनिक समीक्षा, मीडिया संवाद और स्थानीय उद्योगपतियों के साथ चर्चा भी करेंगे।
मुख्यमंत्री के इस महत्वपूर्ण दौरे के दौरान जिला स्तरीय समाधान कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। मुख्य सचिव कार्यालय द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, छिंदवाड़ा के इस विशेष समाधान कार्यक्रम की रूपरेखा तय कर ली गई है। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सीएम हेल्पलाइन पोर्टल के माध्यम से संचालित होगी। विभिन्न विभागों से जुड़ी लगभग 20 से 25 प्रमुख शिकायतों का प्राथमिक चयन सोमवार, 3 अगस्त तक किया जाएगा। जिला कलेक्टर द्वारा इन सभी शिकायतों का आवश्यक परीक्षण करवाकर 5 अगस्त (बुधवार) तक सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर इनका निराकरण दर्ज कराया जाएगा। जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि चयनित शिकायतकर्ता और संबंधित विभागीय अधिकारी तय समय व स्थान पर अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें। छिंदवाड़ा का यह दौरा राज्य में सुशासन और जनता के विश्वास को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
पांच शिकायतकर्ताओं से सीधा संवाद
दर्ज समाधानों के आधार पर गुरुवार शाम तक 5 सबसे महत्वपूर्ण मामलों का चयन मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुतीकरण के लिए होगा। शुक्रवार को कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री इन चयनित 5 मामलों के शिकायतकर्ताओं से सीधे संवाद करेंगे और अधिकारियों की मौजूदगी में स्थिति की समीक्षा करेंगे।
2 मकान बनाने एनओसी का झंझट खत्म, ऑनलाइन मिलेगी अनुमति
नहीं काटने पड़ेंगे विभागों के चक्कर, 21 दिनों की समय-सीमा तय
भोपाल। प्रदेश में अब घर, व्यावसायिक परिसर या बिल्डर प्रोजेक्ट का नक्शा पास कराना और भवन निर्माण की अनुमति लेना बेहद आसान और पारदर्शी हो गया है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने प्रक्रियागत देरी को समाप्त करने और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मजबूती देने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक सुधार लागू किया है। अपर मुख्य सचिव संजय दुबे द्वारा जारी नए निर्देशों के तहत अब आवेदकों को अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाकर अनावश्यक अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) जुटाने की बाध्यता से मुक्ति दिला दी गई है।
नई व्यवस्था के तहत अब भवन अनुज्ञा से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं केवल ऑनलाइन माध्यम से ही संचालित होंगी। किसी भी आवेदक या डेवलपर को कार्यालयों में जाकर दस्तावेजों की हार्ड कॉपी जमा करने की जरूरत नहीं होगी। भूमि स्वामी को ऑनलाइन ही शपथ-पत्र देना होगा। भूमि स्वामी द्वारा हस्ताक्षरित शपथ-पत्र पोर्टल पर अपलोड करना होगा।
जीआईएस मैपिंग से तय होगी एनओसी की जरूरत
विभाग ने स्पष्ट किया है कि अब एयरपोर्ट अथॉरिटी (एएआई), राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (एनएमए) और हेरीटेज क्षेत्रों से जुड़ी एनओसी की आवश्यकता हर मामले में नहीं होगी। ऑनलाइन सिस्टम में जीआईएस आधारित सत्यापन के दौरान यदि भूखंड वास्तव में किसी प्रतिबंधित या प्रभावित क्षेत्र में पाया जाता है, केवल तभी संबंधित विभाग की अनुमति मांगी जाएगी। इसके अलावा, सहकारिता विभाग, गृह निर्माण सहकारी समितियों, विद्युत और नजूल विभाग से अनावश्यक रूप से मांगी जाने वाली एनओसी की अनिवार्यता पूरी तरह समाप्त कर दी गई है।
सात दिन में ट्रांसफर और इक्कीस दिन की समय-सीमा
रक्षा प्रतिष्ठानों, म.प्र. गृह निर्माण मंडल और विकास प्राधिकरणों से जुड़े मामलों में भी आम नागरिकों और डेवलपर्स पर एनओसी लाने का दबाव नहीं रहेगा। आवेदन मिलने के 7 दिनों के भीतर सक्षम अधिकारी खुद संबंधित विभाग को मामला भेजेंगे। संबंधित विभाग को 21 दिनों के भीतर अपनी आपत्ति या अनापत्ति दर्ज करानी होगी। तय समय-सीमा में जवाब न मिलने पर इसे श्मानद स्वीकृतिश् मानते हुए प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया जाएगा।
वृक्ष कटाई और फायर एनओसी के नियम भी व्यावहारिक
पर्यावरणीय स्वीकृति अब केवल तय क्षेत्रफल से बड़ी परियोजनाओं के लिए ही अनिवार्य होगी। वहीं, पेड़ काटने की अनुमति केवल उन्हीं मामलों में लेनी होगी जहां वास्तव में साइट पर पेड़ मौजूद हों और उन्हें काटना प्रस्तावित हो। अग्निशमन (फायर एनओसी) से जुड़ी व्यवस्था को भी नेशनल बिल्डिंग कोड के अनुरूप व्यावहारिक बनाया गया है। सरकार के इस कदम से शहरी क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों और नए निवेश को गति मिलेगी, साथ ही आम नागरिकों को लालफीताशाही से राहत मिलेगी।
3 महीने के तीसरे बुधवार को कलेक्ट्रेट घेरेंगे किसान
बीकेयू ने खोला मोर्चा, आर-पार की लड़ाई का किया आह्वान
भोपाल। प्रदेष में खाद की किल्लत, कालाबाजारी और सिंचाई के लिए बिजली-पानी के संकट से जूझ रहे मध्य प्रदेश के किसानों ने अब सरकार के खिलाफ सीधे संघर्ष का बिगुल फूंक दिया है। किसान अब चुप नहीं बैठेगा, महीने के हर तीसरे बुधवार को किसान अपनी समस्या के समाधान के लिए अधिकारियों के पास पहुंचेगा, जब तक समस्या का हल नहीं होगा, तब तक वह वहां से नहीं हटेगा।
भिंड जिले के गांव बिड़खरी में आयोजित भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) की किसान महापंचायत में पहुंचे राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने प्रदेश के किसानों को एकजुट करते हुए एक बड़े आंदोलन की घोषणा की। किसानों को संबोधित करते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि मध्य प्रदेश के किसान अब चुप नहीं बैठेंगे। हर महीने के तीसरे बुधवार को किसान दिवस पर सभी किसान अपने-अपने जिला अधिकारी (डीएम) कार्यालय पहुंचें। अपनी समस्याएं लिखित रूप में दें और जब तक अधिकारी संतोषजनक जवाब न दें, वहां से बिल्कुल न हटें। हम डटे रहेंगे और सरकार को झुकाएंगे।
जरूरत 10 बोरी की, मिल रही एक बोरी खाद
महापंचायत में यूनियन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि 10 बोरी खाद की जरूरत वाले किसान को महज 1 बोरी दी जा रही है, जबकि बाकी खाद की धड़ल्ले से कालाबाजारी हो रही है। धान की फसल के ऐन सिंचाई के वक्त न तो पर्याप्त बिजली मिल रही है और न ही नहरों में पानी, जिससे फसलें सूखने की कगार पर हैं। बीकेयू के राष्ट्रीय महासचिव चौधरी युद्धवीर सिंह ने चेतावनी दी कि खाद के लिए किसानों को लाइनों में खड़ा करना अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
एकजुट होकर किसान उतरेगा मैदान में
राष्ट्रीय महासचिव ठाकुर राजवीर सिंह जादौन ने कालाबाजारी पर तुरंत सख्त कार्रवाई की मांग की। प्रदेश प्रभारी गजेंद्र सिंह परिहार और मीडिया प्रभारी विष्णु शर्मा ने स्पष्ट किया कि ग्वालियर-चंबल अंचल का किसान अब एकजुट है और यूनियन सड़क से लेकर सदन तक किसानों के हक की लड़ाई मुस्तैदी से लड़ेगी।
4 9 अगस्त को सार्वजनिक अवकाश और निजीकरण पर रोक की मांग
आदिवासी समाज की मांगों को लेकर कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से की मुलाकात
भोपाल। प्रदेश में आदिवासी वर्ग के अधिकारों, सम्मान और समस्याओं को लेकर कांग्रेस विधायक दल के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात की। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में मिले इस आदिवासी प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर प्रमुख मुद्दों पर शीघ्र कार्रवाई की मांग की।
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन के माध्यम से सरकार के समक्ष मुख्य रूप से तीन प्रमुख मांगें रखीं। इन मांगों में आगामी 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर राज्यस्तरीय सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाए, आदिवासी क्षेत्रों में संचालित शासकीय आईटीआई, आदिवासी छात्रावासों और स्वास्थ्य केंद्रों के निजीकरण की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए और रीवा में आदिवासी कांग्रेस के जिलाध्यक्ष की हत्या के मामले में शामिल दोषियों के खिलाफ सख्त और त्वरित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
छात्रावासों की जर्जर स्थिति सुधारने की जरूरत
मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि आदिवासी समाज के सम्मान, भविष्य और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े विषयों को सरकार के सामने प्रमुखता से उठाया गया है। उन्होंने आदिवासी छात्रावासों की जर्जर स्थिति को सुधारने की जरूरत पर बल देते हुए दोहराया कि कांग्रेस इस वर्ग के हितों के लिए लगातार संघर्ष करती रहेगी।
कांग्रेस जिला अध्यक्ष की हत्या, दोषियों पर कार्रवाई की मांग
कांग्रेस प्रतिनिधि मंडल ने मुख्ममंत्री को कांग्रेस के जिला अध्यक्ष की हत्या के दोषियों पर कड़ी कार्रवाई को लेकर भी पत्र सौंपा। उमंग सिंघार ने कहा, श्श् इस मामले में एक दिन पहले डीजीपी से भी मुलाकात की थी. मुलाकात के दौरान भी इस मुद्दे को मुख्यमंत्री के सामने रखा गया है।
5 भोपाल में इंदौर जैसा जल संकट, दूषित पानी सप्लाई का आरोप
गैस पीड़ित संगठनों ने पेश की जांच रिपोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी का दावा
भोपाल। राजधानी भोपाल में इंदौर के भागीरथपुरा जैसी गंभीर स्वास्थ्य आपात स्थिति का खतरा मंडरा रहा है। यूनियन कार्बाइड जहरीले हादसे के प्रभावित इलाकों में भोपाल नगर निगम द्वारा सीवेज (मल) से दूषित पानी की सप्लाई की जा रही है, जो सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना है। गैस पीड़ितों के चार प्रमुख संगठनों ने शुक्रवार को एक पत्रकार वार्ता में पानी की चौंकाने वाली लैंब जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करते हुए यह सनसनीखेज आरोप लगाया।
पत्रकार वार्ता में पेश की गई जांच रिपोर्ट के मुताबिक, प्रभावित इलाकों से लिए गए पीने के पानी के लगभग 70 फीसदी नमूनों में फीकल कोलीफॉर्म (मल का बैक्टीरिया) पाया गया है। यानी क्षेत्र के हजारों निवासी इस समय गंभीर रूप से दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। भोपाल गैस पीड़ित महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष नवाब खान ने आंकड़ों का खुलासा करते हुए बताया कि हमने इसी महीने प्रभावित 30 बस्तियों के नलों से पानी के 63 नमूने (सैंपल) एकत्र किए थे। जांच में 43 नमूनों (68 फीसदी) में फीकल कोलीफॉर्म की पुष्टि हुई है। इससे साफ है कि 30 में से 19 बस्तियों में सप्लाई हो रहा पानी पूरी तरह मल से दूषित है। उन्होंने आगे बताया कि बड़ा तालाब (अपर लेक) से आने वाले पानी के 90 फीसदी और कोलार डैम से आने वाले पानी के 25 फीसदी नमूने दूषित पाए गए हैं। भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की अध्यक्ष रशीदा बी ने क्षेत्र के जमीनी हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि जहरीला पानी पीने से पूरे के पूरे परिवार बीमारियों की गिरफ्त में हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की सरेआम उड़ रही हैं धज्जियां
भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष बालकृष्ण नामदेव ने बताया कि अगस्त 2018 में भी पाइपलाइन में मल का पानी मिलने की शिकायतें आई थीं। तब सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल नगर निगम को इस पूरे क्षेत्र में व्यवस्थित सीवेज लाइन बिछाने और ड्रेनेज (जल-निकासी) की उचित व्यवस्था करने का निर्देश दिया था, जिस पर आज तक अमल नहीं हुआ।
दोषियों पर हो सख्त कार्रवाई
भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन की रचना ढींगरा ने दूषित पानी की आपूर्ति के लिए जिम्मेदार नगर निगम अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने और सख्त कार्रवाई की मांग की है। रचना धींगरा ने चेतावनी देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन कर जनता की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों पर तुरंत गाज गिरनी चाहिए। क्या प्रशासन इंदौर के भागीरथपुरा की तरह यहाँ भी लोगों की जान जाने का इंतजार कर रहा है?
6 5.67 करोड़ से अधिक मतदाता तय करेंगे निकाय और पंचायत चुनावों की दिशा
भोपाल। प्रदेश में आगामी नगरीय निकाय और त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रदेश भर के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की फोटोयुक्त अंतिम मतदाता सूची का आधिकारिक प्रकाशन कर दिया है। मतदाता सूची के इस अंतिम आंकड़े के साथ ही अब प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों और चुनावी सरगर्मियों को नया बल मिल गया है।
राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव दिनेश श्रीवास्तव ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में कुल मतदाताओं की संख्या अब 5,67,21,353 पहुँच गई है। इनमें से पुरुष मतदाता 2,91,09,422, महिला मतदाता 2,76,10,389 और थर्ड जेंडर मतदाता 1,542 दर्ज किए गए हैं। आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण इलाकों में लोकतंत्र की नींव कहीं अधिक व्यापक है। अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग अब स्थानीय निकायों के चुनाव की तिथियों की घोषणा की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ गया है।
शहरी निकाय क्षेत्र में मतदाता
आयोग द्वारा जारी आंकडों के अनुसार ष्षहरी क्षेत्र में पुरुष मतदाता 81,75,766, महिला मतदाता 78,74,281, थर्ड जेंडर मतदाता 937 है। इस तरह कुल शहरी मतदाता की संख्या 1,60,50,984 है।
ग्रामीण क्षेत्र में मतदाता
आयोग के आंकड़ों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में पुरुष मतदाता 2,09,33,656, महिला मतदातारू 1,97,36,108 और थर्ड जेंडर मतदाता 605 है। इस तरह कुल ग्रामीण मतदाताओं की संख्या 4,06,70,369 है।
7 वरिष्ठ पत्रकार व साहित्यकार पद्मश्री कैलाश चंद्र पंत का निधन
भोपाल। प्रदेश के वरिष्ठ साहित्यकार, मूर्धन्य पत्रकार और प्रख्यात समाजसेवी पद्मश्री पंडित कैलाश चन्द्र पंत का शुक्रवार को 90 वर्ष की आयु में भोपाल में निधन हो गया। वे विगत कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं से जूझ रहे थे। इसी वर्ष मार्च में साहित्य एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें वर्ष 2025 के पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया था।
कैलाश चंद्र पंत का जन्म 26 अप्रैल 1936 को इंदौर जिले के महू में हुआ था। पिता लीलाधर पंत और माता हरिप्रिया पंत के संस्कारों में पले-बढ़े पंत ने साहित्याचार्य, साहित्य रत्न तथा हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर की उपाधियां प्राप्त कीं। किशोरावस्था से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े पंत जीवनभर आर्य समाज के सिद्धांतों और संत परंपरा के सामाजिक सरोकारों से गहराई से बंधे रहे। अनुशासन, स्वावलंबन और गहन अध्यवसाय उनके व्यक्तित्व का मूल आधार थे। मध्यप्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के माध्यम से उन्होंने हिन्दी के प्रचार-प्रसार और संरक्षण में ऐतिहासिक योगदान दिया।
मुख्यमंत्री ने व्यक्त किया शोक
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पद्मश्री कैलाश चंद्र पंत के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे साहित्य और पत्रकारिता जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया है। मुख्यमंत्री ने कहा श्री पंत ने मध्यप्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति को दीर्घकाल तक अपनी सेवाएं देकर हिन्दी साहित्य को समृद्ध किया। उनका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा। मुख्यमंत्री ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने तथा शोकाकुल परिजनों को यह असीम दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है।