नई दिल्ली. देश की रिटायरमेंट व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) अपने प्रस्तावित ईपीएफओ 3.0 सुधारों के तहत ऐसी पेंशन व्यवस्था तैयार कर रहा है, जिसका दायरा सिर्फ नौकरीपेशा कर्मचारियों तक नहीं रहेगा.
रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार गिग वर्कर्स, प्लेटफॉर्म वर्कर्स और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को भी इस व्यवस्था में शामिल करने की तैयारी कर रही है. हालांकि, सरकार ने अभी इस योजना की आधिकारिक घोषणा नहीं की है और इस पर काम जारी है.
कितना अलग होगा नया मॉडल?
प्रस्तावित व्यवस्था मौजूदा ईपीएफ की तरह ही योगदान आधारित होगी. यानी कर्मचारी के काम करने के दौरान उसके खाते में नियमित रूप से पैसा जमा होगा. इस राशि का निवेश सरकारी सिक्योरिटीज में किया जाएगा और उस पर हर साल ब्याज भी मिलेगा. लेकिन सबसे बड़ा बदलाव रिटायरमेंट के समय देखने को मिल सकता है. अभी जहां ईपीएफ में आमतौर पर एकमुश्त रकम मिलती है, वहीं नई व्यवस्था में कर्मचारी अपनी जरूरत के हिसाब से नियमित पेंशन लेने या जमा रकम से समय समय पर पैसे निकालने का विकल्प चुन सकेगा.
रिटायरमेंट की योजना बनाना होगा आसान
ईपीएफओ 3.0 में टारगेट रिटायरमेंट सम जैसी सुविधा भी जोड़ी जा सकती है. इसके तहत सदस्य पहले से तय कर सकेगा कि रिटायरमेंट तक उसे कितनी रकम चाहिए और वह किस उम्र में काम छोड़ना चाहता है. इसके आधार पर सिस्टम यह बताएगा कि लक्ष्य तक पहुंचने के लिए हर महीने या हर साल कितना योगदान करना होगा. यदि बाद में सदस्य अपना लक्ष्य बदलना चाहे तो उसके अनुसार योगदान की गणना भी दोबारा की जा सकेगी.
मोबाइल पर मिलेगी पूरी जानकारी
नई व्यवस्था में हर सदस्य को एक डिजिटल डैशबोर्ड उपलब्ध कराया जा सकता है. इसमें अब तक जमा कुल योगदान, रिटायरमेंट फंड, लक्ष्य के मुकाबले प्रगति, रिटायरमेंट के समय मिलने वाली संभावित मासिक पेंशन और महंगाई को ध्यान में रखते हुए भविष्य की अनुमानित राशि जैसी जानकारियां एक ही जगह दिखाई देंगी. इससे लोगों के लिए अपनी रिटायरमेंट योजना पर लगातार नजर रखना आसान हो जाएगा.
सिर्फ कर्मचारी ही नहीं, कई स्रोतों से जमा हो सकेगा पैसा
प्रस्तावित व्यवस्था की एक बड़ी खासियत यह है कि इसमें रिटायरमेंट फंड में पैसा सिर्फ कर्मचारी और नियोक्ता ही नहीं, बल्कि कई अन्य स्रोतों से भी आ सकेगा. रिपोर्ट के मुताबिक, कम आय वाले लोगों के लिए सरकार योगदान दे सकती है. गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के मामले में संबंधित डिजिटल कंपनियां भी योगदान कर सकती हैं. इसके अलावा कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड, गैर सरकारी संगठन और अन्य संस्थाएं भी किसी व्यक्ति के रिटायरमेंट फंड में योगदान दे सकेंगी. यहां तक कि कुछ मामलों में डिजिटल भुगतान या टिप का एक हिस्सा भी सीधे सामाजिक सुरक्षा खाते में भेजने की व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है.
रिटायरमेंट के बाद पैसे निकालने की मिलेगी आजादी
नई व्यवस्था में रिटायरमेंट के बाद सदस्य के पास अपनी जरूरत के अनुसार पैसे निकालने की सुविधा होगी. वह चाहे तो पूरी राशि से एन्युटी खरीदकर हर महीने तय पेंशन ले सकता है या फिर सिस्टेमैटिक विदड्रॉल प्लान (एसडबलूपी) के जरिए समय समय पर अपनी जरूरत के हिसाब से रकम निकाल सकता है. उदाहरण के तौर पर यदि किसी के रिटायरमेंट फंड में एक करोड़ रुपये जमा हैं और उस पर 8 फीसदी सालाना ब्याज मिलता है, तो सिर्फ ब्याज से ही सालाना करीब 8 लाख रुपये की आय हो सकती है. जरूरत पडऩे पर सदस्य मूलधन का कुछ हिस्सा भी निकाल सकेगा.
गिग और असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों पर रहेगा सबसे ज्यादा फोकस
ईपीएफओ का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में करीब 2.5 करोड़ गिग वर्कर्स, प्लेटफॉर्म वर्कर्स और भवन निर्माण क्षेत्र के कर्मचारियों को इस व्यवस्था से जोडऩे का है. प्रस्ताव के मुताबिक, एक ही यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) के जरिए अलग अलग कंपनियों या डिजिटल प्लेटफॉर्म से मिलने वाले सभी योगदान का रिकॉर्ड एक जगह उपलब्ध होगा. इसके अलावा परिवार के सदस्यों के लिए फैमिली और सर्वाइवर पेंशन जैसी सुविधाएं भी प्रस्ताव का हिस्सा हो सकती हैं.
कोर बैंकिंग सिस्टम पर चलेगा ईपीएफओ 3.0
ईपीएफओ 3.0 को आधुनिक कोर बैंकिंग सॉल्यूशन तकनीक पर विकसित करने की तैयारी है. इससे खातों का मैनेजमेंट, योगदान का रिकॉर्ड और क्लेम के निपटारे की प्रक्रिया पहले से ज्यादा तेज और पारदर्शी हो सकेगी. ईपीएफओ पहले ही अपने 2.0 सुधारों के तहत 123 क्षेत्रीय डेटाबेस को एक केंद्रीय डेटाबेस में जोड़ चुका है और अब उसी तकनीकी आधार को और मजबूत किया जाएगा.
कब लागू होगी नई व्यवस्था?
फिलहाल ईपीएफओ 3.0 केवल प्रस्तावित योजना है. सरकार ने अभी इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की है और न ही इसे लागू करने की कोई समय सीमा तय की है. अगर सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो यह देश की सामाजिक सुरक्षा और रिटायरमेंट व्यवस्था में अब तक के सबसे बड़े बदलावों में से एक साबित हो सकता है.