AAP की वरिष्ठ नेता और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने राहुल गांधी के धरने को भाजपा के साथ जुगलबंदी कहा। उन्होंने कहा कि सीजेपी और सोनम वांगचुक से जुड़े लोग एक महीने से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन सरकार ने उनसे बातचीत नहीं की। आतिशी ने एक्स पर लिखा कि राहुल गांधी को प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने की अनुमति मिली और एक घंटे के भीतर सरकार बातचीत के लिए तैयार हो गई। राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी का प्रदर्शन सीजेपी के आंदोलन को कमजोर करने वाला साबित हुआ। वहीं, दिल्ली AAP अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि कांग्रेस के कई नेता इस आंदोलन पर चुप हैं, जबकि उनसे जुड़े सोशल मीडिया हैंडल और समर्थक आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।
वहीं, AAP नेता अनुराग ढांडा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस शुरू से ही छात्रों के आंदोलन के खिलाफ रही है और अब उसका उद्देश्य जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन से लोगों का ध्यान हटाना है। अनुराग ने कहा कि राहुल गांधी की कार्रवाई साफ तौर पर मिलीभगत की ओर इशारा करती है। प्रधानमंत्री ने मानो उन्हें अपने ही आवास के बाहर धरना देने का न्योता दिया और मीडिया को उसका व्यापक कवरेज देने के लिए कहा, ताकि जंतर-मंतर पर घायल छात्रों के मुद्दे से ध्यान भटक जाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पहले भी भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान राहुल गांधी के बयानों से असली मुद्दा भटक गया था और अब भी वही कोशिश दोहराई जा रही है।
सीजेपी ने अपनी प्रवक्ता को क्यों हटाया?
सीजेपी ने अपनी प्रवक्ता विजेता दहिया के व्यवहार की सार्वजनिक रूप से निंदा की है। पार्टी ने कहा कि जब शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी और संगठन के सदस्य पुलिस कार्रवाई का सामना कर रहे थे, उस दौरान सामने आए उनके वीडियो संगठन के मूल्यों के अनुरूप नहीं थे। सीजेपी ने इसे असंवेदनशील और गलत निर्णय बताया। इसके बाद पार्टी ने विजेता दहिया को प्रवक्ता पद से हटाने और उनकी सभी आधिकारिक जिम्मेदारियां वापस लेने का फैसला किया।
लाठीचार्ज पीड़ितों से मिलने अस्पताल पहुंचे जेपी नड्डा, सीजेपी ने कसा तंज
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा लाठीचार्ज में घायल हुए लोगों से मिलने अस्पताल पहुंचे। इस पर सीजेपी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर समय रहते युवाओं की बात सुन ली जाती तो लाठीचार्ज जैसी स्थिति पैदा नहीं होती। सीजेपी ने अपने बयान में कहा, "कल युवाओं को पिटवाकर आज मिलने का क्या मतलब मंत्री जी? अगर सरकार सही समय पर उनकी बात सुन लेती तो यह नौबत ही नहीं आती।" सीजेपी ने आरोप लगाया कि सरकार ने पहले प्रदर्शनकारियों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया, जिसके कारण हालात बिगड़े।
राहुल गांधी के धरने पर क्या बोले नितिन नवीन?
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने इस प्रदर्शन को निंदनीय बताते हुए कहा कि यह भारतीय राजनीति के इतिहास का काला दिन है।
उन्होंने आगे कहा, "आज राहुल गांधी ने जिस तरह का व्यवहार किया, वह गरिमाहीन और निंदनीय है। यह असहमति की राजनीति नहीं, बल्कि अराजकता की राजनीति है।" उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष खरगे के धरने में शामिल होने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और कांग्रेस नेताओं ने विरोध दर्ज कराने के बजाय अराजकता फैलाने की कोशिश की।
पीएम मोदी के पुराने बयान का जिक्र क्यों किया गया?
सीजेपी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक पुराने सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला देते हुए सवाल उठाया। पार्टी ने कहा कि जब अन्ना हजारे का आंदोलन चल रहा था, तब नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर लोकतंत्र विरोधी तरीके अपनाने का आरोप लगाया था और अन्ना के आंदोलन का समर्थन किया था। अब सीजेपी ने पूछा कि क्या वही नरेंद्र मोदी आज अपने खिलाफ हो रहे आंदोलन पर अलग रवैया अपना रहे हैं। पार्टी ने सवाल किया कि सरकार आंदोलनकारियों की बात सुनने और जिम्मेदारी लेने से पीछे क्यों हट रही है।
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के पोस्ट पर क्या कहा गया?
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने एक्स पर लिखा कि उनके घर के सामने धरना होने की वजह से उनके बेटे को परीक्षा केंद्र पहुंचने में आधे घंटे की देरी हुई। उन्होंने यह भी कहा कि वह धरने पर बैठे लोगों के लिए चाय, नाश्ता और कंबल लेकर पहुंचेंगे। इस पर सीजेपी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि आधे घंटे की देरी से इतनी परेशानी हो सकती है, तो उन युवाओं की स्थिति भी समझनी चाहिए जो अपने भविष्य को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। पार्टी ने कहा कि प्रदर्शनकारी केवल अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं और इस पहलू पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
इस पूरे विवाद की स्थिति क्या?
फिलहाल सीजेपी आंदोलन को लेकर सरकार, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और सीजेपी के अलग-अलग दावे सामने आए हैं। AAP ने कांग्रेस पर आंदोलन कमजोर करने का आरोप लगाया है, जबकि सीजेपी ने पुलिस कार्रवाई और सरकार के रवैये पर सवाल उठाए हैं। वहीं, कांग्रेस की ओर से इस आरोप पर इस सामग्री में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। ऐसे में आंदोलन अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का भी केंद्र बन गया है।