
गोण्ड जनजाति में गेडी नृत्य जिसे मुरिया लोग डिटोंग पाटाय कहते हैं। लकड़ी की गेडी पर किया जाता है। इसमें केवल नृत्य होता है गीत नहीं गाये जाते। गेंडी नृत्य अत्यधिक गतिशील नृत्य है। पारंपरिक वेशभूषा और वाद्ययंत्र की ताल पर गेडी नृत्य किया जाता है।
बुन्देलखण्ड अंचल में जन्म विवाह और तीज-त्यौहारों पर बधाई नृत्य किया जाता है। मनौती पूरी हो जाने पर देवी-देवताओं के द्वार पर बधाई नृत्य होता है। इस नृत्य में स्त्रियाँ और पुरुष दोनों ही उमंग से भरकर नृत्य करते हैं। इस नृत्य में ढपला, टिमकी, रमतूला और बांसुरी आदि वाद्य प्रयुक्त होते हैं।
मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय़ में प्रत्येक रविवार को दोपहर 2 बजे से आयोजित होने वाली इस गतिविधि में मध्यप्रदेश के पांच लोकांचलों एवं सात प्रमुख जनजातियों की बहुविध कला परंपराओं की प्रस्तुति के साथ ही देश के अन्य राज्यों के कलारूपों को देखने समझने का अवसर भी जनसामान्य को प्राप्त होगा MG/PD/AV (20/07/2026)
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