विक्रम-1 की ऐतिहासिक उड़ान पर झूमीं फिल्मी हस्तियां राजामौली, महेश बाबू और चिरंजीवी ने दी बधाई

नई दिल्ली. भारत के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 की सफल पहली उड़ान के बाद देशभर में उत्साह का माहौल है. इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर फिल्म निर्देशक एस.एस. राजामौली और अभिनेता महेश बाबू तथा चिरंजीवी कोनिडेला ने स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम को बधाई देते हुए इसे भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया. तीनों हस्तियों ने युवा वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की उपलब्धि की सराहना करते हुए इसे नए भारत की क्षमता का प्रतीक बताया.

निर्देशक एस.एस. राजामौली ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर स्काईरूट एयरोस्पेस की सफलता को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया. उन्होंने कहा कि हैदराबाद स्थित कंपनी ने विक्रम-1 के माध्यम से भारत का पहला निजी रॉकेट सफलतापूर्वक कक्षा में पहुंचाकर इतिहास रच दिया है. उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस परियोजना पर काम करने वाली टीम की औसत आयु केवल 28 वर्ष है और यह उपलब्धि युवा भारत की प्रतिभा और क्षमता को दर्शाती है. उन्होंने पूरी टीम को बधाई देते हुए देश के लिए गर्व का क्षण बताया.

अभिनेता महेश बाबू ने भी विक्रम-1 की पहली ही उड़ान में कक्षा तक पहुंचने की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि हैदराबाद की युवा टीम ने यह साबित कर दिया है कि भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र तकनीकी क्षमता और दृढ़ संकल्प के साथ नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है. उन्होंने स्काईरूट एयरोस्पेस की पूरी टीम को इस उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए इसे भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक सफलता बताया.

अभिनेता चिरंजीवी कोनिडेला ने विक्रम-1 के सफल प्रक्षेपण को भारत की अंतरिक्ष यात्रा का ऐतिहासिक पड़ाव बताया. उन्होंने स्काईरूट एयरोस्पेस, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर (इन-स्पेस) को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि विशेष रूप से हैदराबाद के लिए गर्व का विषय है, क्योंकि रॉकेट का डिजाइन और विकास यहीं की युवा टीम ने किया है. उन्होंने विश्वास जताया कि यह सफलता देश के युवाओं को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी.

स्काईरूट एयरोस्पेस का विक्रम-1 टेस्ट फ्लाइट-1 भारत का पहला निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल श्रेणी का रॉकेट है, जिसने अपनी पहली ही उड़ान में सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा हासिल की. रॉकेट ने अंतिम चरण पूरा करते हुए अपने पेलोड को लगभग 450 किलोमीटर की कक्षा में स्थापित किया. इस उपलब्धि के साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जिनके पास निजी क्षेत्र की ऑर्बिटल लॉन्च क्षमता उपलब्ध है.

मिशन आगमन नाम से संचालित यह प्रक्षेपण सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया गया. 24 मीटर लंबे कार्बन-कॉम्पोजिट रॉकेट ने उड़ान के दौरान सभी निर्धारित चरण सफलतापूर्वक पूरे किए. इसमें चरणों का अलग होना, ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल का संचालन और अंतिम कक्षीय स्थापना शामिल रही. ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल में लगे 3डी प्रिंटेड लिक्विड इंजन ने अंतिम चरण में रॉकेट को कक्षा तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

विक्रम-1 तीन ठोस ईंधन वाले चरणों और एक लिक्विड ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल से लैस है. इसे 450 किलोमीटर की निम्न पृथ्वी कक्षा में अधिकतम 350 किलोग्राम तक के पेलोड स्थापित करने के लिए विकसित किया गया है. इसकी पहली उड़ान में कई पेलोड भेजे गए, जिनमें बेंगलुरु स्थित कॉसमॉस डायमंड्स द्वारा विकसित प्रयोगशाला में तैयार किया गया डायमंड लोटस भी शामिल था. इस सफल मिशन को भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है.


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