पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर बड़ा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा हिंदू धर्म नहीं, हिंदुत्व की राजनीति कर रही है और लोगों को डराकर सत्ता साध रही है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि बीजेपी हिंदुओं को और ओवैसी मुसलमानों को डराकर राजनीति करते हैं, जबकि हकीकत में किसी भी धर्म को कोई खतरा नहीं है। दिग्विजय सिंह ने जारी एक वीडियो संदेश में कहा, हिंदुत्व कोई धर्म नहीं, केवल एक पहचान है। भाजपा लोगों को भ्रमित कर रही है। जगह-जगह हिंदू सम्मेलन कराए जा रहे हैं, जनता से चंदा लिया जा रहा है और उसी पैसे से भंडारे खिलाए जा रहे हैं- यह कौन सा धर्म है
BJP-RSS और ओवैसी मिलकर डर का खेल खेल रहे
पूर्व सीएम ने कहा कि भाजपा और आरएसएस का धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। ये हिंदुओं को कहते हैं हिंदू खतरे में हैं, जबकि ओवैसी मुसलमानों से कहते हैं हिंदुओं से खतरा है। दोनों मिलकर समाज को बांटने का खेल खेल रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि न हिंदुओं को खतरा है, न मुसलमानों को। सावरकर-जिन्ना ने देश बांटा, अब मोहल्ले बांटे जा रहे
दिग्विजय सिंह ने कहा कि आपसी नफरत और राजनीति के कारण देश कमजोर हो रहा है। “सावरकर और मोहम्मद अली जिन्ना ने एक बार देश का बंटवारा कराया, अब देश नहीं, शहर और मोहल्ले बंट रहे हैं। आज हालात ऐसे हैं कि हिंदुओं के अलग मोहल्ले और मुसलमानों के अलग मोहल्ले बनते जा रहे हैं यह बेहद खतरनाक है
हिंदू कोई वैदिक शब्द नहीं, सनातन ही हमारा धर्म
उन्होंने कहा कि हिंदू कोई वैदिक शब्द नहीं बल्कि फारसी शब्द है। सिंध नदी के इस पार रहने वालों को फारसी बोलने वालों ने हिंदू कहा। दिग्विजय सिंह ने कहा कि मोहन भागवत भी सही कहते हैं कि हिंदू एक पहचान है, धर्म नहीं। “हमारा धर्म सनातन है, जिसका कोई अंत नहीं।
सनातन धर्म और आस्था पर चोट का आरोप
पूर्व सीएम ने भाजपा पर सनातन धर्म की आस्थाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मणिकर्णिका घाट तोड़ा गया, जो मोक्ष से जुड़ी हजारों साल पुरानी आस्था है। इसके अलावा मां अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा और महल तोड़े जाने को भी सनातन पर हमला बताया। दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से सवाल करते हुए कहा कि आप जो कर रहे हैं, वह सनातन धर्म के खिलाफ है। हिंदुत्व शब्द खुद सावरकर ने दिया था और उन्होंने साफ कहा था कि यह धर्म नहीं, पहचान है।