यूडीआईएसई प्लस 2025-26 की रिपोर्ट, 21 छात्रों पर एक शिक्षक, 2,269 स्कूलों में अब भी एकल व्यवस्था
भोपाल। प्रदेश में स्कूली शिक्षा के मोर्चे पर एक विरोधाभासी तस्वीर सामने आई है। केंद्र सरकार की यूडीआईएसई प्लस वर्ष 2025-26 की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में बच्चों का स्कूलों की तरफ रुझान तो बढ़ा है और दाखिलों (नामांकन) की स्थिति भी मजबूत हुई है। इसके साथ ही जीरो एनरोलमेंट (शून्य छात्र संख्या) वाले स्कूलों का आंकड़ा भी अब घटकर शून्य पर आ गया है, जो कि एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इन सकारात्मक संकेतों के बीच, प्रदेश के हजारों स्कूलों में एकल शिक्षक की व्यवस्था शिक्षा विभाग के दावों को चुनौती दे रही है।
रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि मध्यप्रदेश के 1,19,694 स्कूलों में 1,52,52386 (लगभग1.52 करोड़) विद्यार्थी नामांकित हैं। इन विद्यार्थियों के लिए प्रदेश में 7,29,057 शिक्षक तैनात हैं। इस लिहाज से राज्य का छात्र-शिक्षक अनुपात (पीटीआर) 21 का है, यानी औसतन हर 21 छात्रों पर एक शिक्षक उपलब्ध है। यह राष्ट्रीय मानकों के लिहाज से बेहद आदर्श स्थिति है, लेकिन जमीनी स्तर पर शिक्षकों के इस स्टाफ का वितरण अब भी एक बड़ी समस्या बना हुआ है।
एक ही गुरुजी के भरोसे 2,269 स्कूल
प्रदेश के 2,269 स्कूल ऐसे हैं जो पूरी तरह एकल शिक्षक (सिंगल टीचर) के भरोसे चल रहे हैं। इन स्कूलों में कुल 62,151 छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि एक अकेला शिक्षक प्रशासनिक कार्यों, बैठकों और मध्यान भोजन की व्यवस्था संभालने के साथ-साथ एक साथ कई कक्षाओं के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे दे पा रहा होगा।
प्रति स्कूल औसत बेहतर, पर संतुलन जरूरी
अगर पूरी रिपोर्ट का औसत देखें, तो प्रदेश के हर स्कूल में औसतन 127 छात्र और 6 शिक्षक आते हैं। यह आंकड़ा यह तो साफ करता है कि राज्य में शिक्षकों की कुल संख्या में कोई कमी नहीं है, बल्कि कमी उनके सही तालमेल और युक्तियुक्तकरण में है। जहां शहरी और सुगम इलाकों के स्कूलों में शिक्षकों की भरमार है, वहीं दूरदराज के 2,269 स्कूलों में एक ही शिक्षक के कंधे पर पूरा दारोमदार है।
शिक्षकों की कमी है चुनौती
यूडीआईएसई प्लस की यह रिपोर्ट साफ संकेत दे रही है कि सरकार स्कूल चलो अभियान और अन्य योजनाओं के जरिए बच्चों को स्कूल लाने में तो कामयाब रही है, लेकिन अब सबसे बड़ी चुनौती इन 2,269 एकल शिक्षक वाले स्कूलों में अतिरिक्त स्टाफ भेजकर शिक्षा के स्तर को सुधारने की है।