मंत्री पद रहेगा सुरक्षित या बढ़ेगी मुश्किल, फैसले पर टिकीं नजरें

सरकारी रिकॉर्ड में नहीं मिला राजपूत होने का सबूत
भोपाल। राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र को लेकर चल रहे विवाद में राज्य-स्तरीय स्क्रीनिंग कमेटी का फैसला बेहद निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक, कमेटी प्रतिमा बागरी के पक्ष में फैसला सुना सकती है, क्योंकि छानबीन में उनके राजपूत समुदाय से जुड़े होने का कोई ठोस प्रशासनिक दस्तावेज नहीं मिला है। इस फैसले पर अब राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों की नजरें टिक गई हैं।
यह पूरा मामला कांग्रेस नेता प्रदीप अहिरवार की शिकायत के बाद गरमाया था, जिसके बाद स्क्रीनिंग कमेटी ने मंत्री प्रतिमा बागरी और शिकायतकर्ता अहिरवार दोनों के बयान दर्ज किए। सूत्रों का कहना है कि सतना जिले के रिकॉर्ड खंगालने के बाद कमेटी को ऐसा कोई भी दस्तावेज या साक्ष्य नहीं मिला है, जिससे यह साबित हो सके कि प्रतिमा बागरी राजपूत वर्ग से ताल्लुक रखती हैं। साथ ही, सतना में ऐसा कोई रिकॉर्ड भी सामने नहीं आया है जो बागरी और राजपूत समुदायों के बीच किसी भी तरह के पारिवारिक या वैवाहिक संबंधों की पुष्टि करता हो।
क्या है बागरी समुदाय का कानूनी गणित
दरअसल, इस पूरे विवाद के पीछे एक तकनीकी और ऐतिहासिक पहलू है। वर्ष 1976 तक बागरी समुदाय के लोग केवल मध्य भारत क्षेत्र में ही अनुसूचित जाति (एससी) श्रेणी के अंतर्गत आते थे। इसके बाद क्षेत्रीय सीमा हटा दी गई और पूरे प्रदेश में इस वर्ग को एससी का लाभ मिलने लगा। साल 2007 में राजपूत श्रेणी से जुड़े बागरी समुदाय के लोगों के नाम अनुसूचित जाति की सूची से हटा दिए गए थे। चूंकि सतना जिले के रिकॉर्ड में प्रतिमा बागरी के परिवार का राजपूत कनेक्शन साबित करने वाला कोई सबूत नहीं है, इसलिए नियमतः जब तक बागरी समुदाय के लोग एससी कैटेगरी का हिस्सा हैं, उन्हें इस आरक्षण का लाभ मिलता रहेगा।
कमेटी के फैसले के खिलाफ अदालत जाएगी कांग्रेस
इस बीच, मामले में शिकायतकर्ता और कांग्रेस नेता प्रदीप अहिरवार ने आक्रामक रुख अपना रखा है। उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि अगर राज्य-स्तरीय स्क्रीनिंग कमेटी का फैसला उनके दावों के पक्ष में नहीं आता है, तो वे चुप नहीं बैठेंगे। अहिरवार इस फैसले को चुनौती देने के लिए सीधे न्यायालय (कोर्ट) की शरण में जाएंगे, जिससे साफ है कि कमेटी के फैसले के बाद भी यह सियासी और कानूनी लड़ाई थमने वाली नहीं है।
 


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