जिला स्तर पर होगी मॉनिटरिंग, उल्लंघन किया तो रिन्यू नहीं होगा रजिस्ट्रेशन
भोपाल। प्रदेश की सड़कों पर बेतरतीब दौड़ रहे और ट्रैफिक जाम का सबब बन रहे ई-रिक्शों के व्यवस्थित संचालन के लिए परिवहन विभाग ने एक बड़ा एक्शन प्लान तैयार किया है। विभाग अब भोपाल और इंदौर जैसे महानगरों सहित प्रदेश के सभी जिलों में शहरी और ग्रामीण स्तर पर जिला स्तरीय नियंत्रण प्रणाली लागू करने जा रहा है।
राजधानी भोपाल सहित पूरे प्रदेश में ई-रिक्शों का अनियंत्रित संचालन यातायात के लिए बड़ी चुनौती और सड़क हादसों का मुख्य कारण बना हुआ है। लंबे समय से इनके नियमन की कवायद चल रही थी, जिसे अब विभागीय तालमेल के जरिए अंतिम रूप दिया जा रहा है। नई व्यवस्था में स्थानीय स्तर पर निगरानी का जिम्मा जिला कलेक्टर और जिला सड़क सुरक्षा समिति को सौंपा गया है।
ड्राइविंग लाइसेंस जरूरी, रफतार पर भी लगाम
नए एक्शन प्लान के तहत अब ई-रिक्शा चालकों को सख्त नियमों के दायरे में रहना होगा। इसके तहत ई-रिक्शा की अधिकतम गति सीमा 25 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है, चालकों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस अनिवार्य होगा। साथ ही, रजिस्ट्रेशन की तारीख से 2 साल बाद पहला फिटनेस सर्टिफिकेट लेना जरूरी होगा। ई-रिक्शा में किसी भी तरह के बदलाव (मोडिफिकेशन) पर पूरी तरह रोक रहेगी। हेडलाइट, टेल लाइट और रियर व्यू मिरर होना अनिवार्य है। रिक्शा में म्यूजिक सिस्टम लगाने पर पूरी तरह बैन रहेगा। यदि कोई म्यूजिक सिस्टम बजाता मिला, तो सीधे रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जाएगा। आवंटित रूट और रंग के उल्लंघन पर रजिस्ट्रेशन निरस्त होगा और उसे दोबारा रिन्यू (नवीनीकृत) नहीं किया जाएगा।
जानिए किस क्षेत्र के लिए कौन सा रंग
नए नियमों के तहत ई-रिक्शों के संचालन क्षेत्र के हिसाब से उनके रंग तय किए गए हैं, जिन्हें रिक्शे पर स्पष्ट अक्षरों में लिखना होगा। इसके तहत कमर्शियल के लिए लाल, ग्रामीण क्षेत्र के लिए बैगनी, संस्था के लिए पीला, आवसीय क्षेत्र के लिए नीला, कनेक्टिंग मार्ग और फीडर के लिए हरा रंग मिलेगा। जिला प्रशासन और परिवहन विभाग की टीमें सड़कों पर उतरकर समय-समय पर आकस्मिक चेकिंग करेंगी, ताकि नियमों का उल्लंघन करने वाले चालकों पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।