राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। उज्जैन में वीर भारत न्यास को एक रुपये में सरकारी भूमि लीज पर देने के लिए मोहन यादव सरकार पर भ्रष्टाचार के कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के आरोप को औचित्यहीन करार देने के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बयान पर पार्टी के अंदर घमासान छिड़ा है।
भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर इसके खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति बनाने के लिए मंगलवार को हुई मध्य प्रदेश कांग्रेस की राजनीतिक मामलों की समिति की वर्चुअल बैठक में कुछ नेताओं ने जीतू पटवारी बनाम दिग्विजय के बयान का विषय उठाया। वहीं, वर्चुअल बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ नहीं जुड़े।
वर्चुअल बैठक में भोपाल मध्य विधानसभा क्षेत्र से विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि जीतू पटवारी ने वीर भारत न्यास को एक रुपये में करोड़ों की कीमत वाली सरकारी भूमि लीज पर देने का विषय उठाया मगर इसे जायज बताते हुए दिग्विजय सिंह ने कह दिया कि वह तो सरकारी ट्रस्ट है। मुख्यमंत्री इसके पदेन अध्यक्ष होते हैं। अब कार्यकर्ता इस विषय को लेकर कैसे जनता के बीच जाएं, वे पूछेंगे कि कौन सही है
पूर्व विधायक प्रवीण पाठक ने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रदेश अध्यक्ष के बयान के विपरीत बात करेंगे तो जनता के बीच क्या ले जाएंगे। मामला बढ़ता देख प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने हस्तक्षेप किया। कहा कि केंद्रीय संगठन के संज्ञान में यह विषय है, वहीं से निर्णय आएगा।
उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश कांग्रेस में अंतर्कलह की बात लगातार सामने आ रही है। इसके पहले राज्यसभा चुनाव को लेकर आयोजित पत्रकार वार्ता में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी के बीच मतभेद सामने आ चुके हैं।
दिग्विजय बोले- अंतर्कलह की बात भ्रामक, जीतू मेरे बेटे जैसा
अलबत्ता, बैठक के बाद भोपाल में जीतू पटवारी और दिग्विजय सिंह ने संयुक्त पत्रकार वार्ता करके यह संदेश देने का प्रयास किया कि हम सब साथ हैं। दिग्विजय ने कहा कि कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है। नेतृत्व के बीच प्रचारित की जा रहीं मतभेद की बातें पूरी तरह भ्रामक और निराधार हैं। जीतू मेरे बेटे जैसा है। उन्होंने कहा कि किसी भी नेता के लिए दलाल जैसे शब्द का प्रयोग नहीं कर सकता हूं। वो बात एक दलाल उपनाम के पत्रकार को लेकर थी, जिसे लेकर भ्रम फैलाया गया।
15 को घेराव, माह के अंत में उज्जैन में प्रदर्शन
पटवारी ने बताया कि चरणबद्ध आंदोलन की कड़ी में 15 जुलाई को मुख्यमंत्री हाउस का घेराव किया जाएगा और विधानसभा में मुख्यमंत्री से जवाब मांगा जाएगा। माह के अंत में उज्जैन में बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। विधायक दल ने राज्यपाल मंगुभाई पटेल को वस्तुस्थिति से अवगत कराने के लिए समय मांगा है। एक सप्ताह में पोर्टल भी बना रहे हैं, जिसमें कोई भी सरकार के भ्रष्टाचार की जानकारी दे सकेगा।