
बजट से अधिक हुआ कर्ज, बढ़ी वित्तीय चिंता
प्रदेश का कुल कर्ज बढ़ते-बढ़ते बजट के आकार से भी अधिक हो चुका है। इसके कारण मूलधन और ब्याज अदायगी का दबाव लगातार बढ़ रहा है। GST लागू होने के बाद राज्य सरकार के पास कर लगाने के विकल्प सीमित हो गए हैं, जिससे आमदनी बढ़ाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है
पहली बार रोलिंग बजट की तैयारी
बेहतर वित्तीय प्रबंधन की आवश्यकता को देखते हुए राज्य सरकार ने पहली बार रोलिंग बजट (Rolling Budget) तैयार करने का निर्णय लिया है। इसके तहत एक साथ तीन वर्षों की वित्तीय आवश्यकताओं का आकलन किया जा रहा है, ताकि वित्तीय वर्ष 2028-29 तक की स्पष्ट कार्ययोजना अभी से बनाई जा सके।
2025-26 के बजट की स्थिति
राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 15 प्रतिशत वृद्धि के साथ 4,21,032 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तुत किया था। इसमें केंद्रीय करों में प्रदेश का हिस्सा 1,11,662 करोड़ रुपये और केंद्रीय सहायता अनुदान 48,661 करोड़ रुपये शामिल थे। वहीं, राज्य ने स्वयं के करों से सात प्रतिशत वृद्धि के साथ 1,09,157 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान लगाया था।
हालांकि, GST का पूरा हिस्सा न मिलने और केंद्रीय सहायता अनुदान कम प्राप्त होने के कारण राजस्व लक्ष्य हासिल करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
मुख्यमंत्री स्वयं कर रहे निगरानी
आमदनी बढ़ाने के प्रयासों की निगरानी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मुख्य सचिव अनुराग जैन और अपर मुख्य सचिव वित्त मनीष रस्तोगी स्वयं कर रहे हैं। प्रतिमाह राजस्व स्थिति की समीक्षा की जा रही है, ताकि विभागीय अधिकारियों पर लक्ष्य पूरा करने का दबाव बना रहे
लाड़ली बहना और बिजली अनुदान सबसे बड़ा खर्च
वेतन-भत्ते और ब्याज भुगतान को छोड़ दें तो बजट में सबसे बड़ा खर्च लाड़ली बहना योजना और बिजली बिल अनुदान पर हो रहा है। लाड़ली बहना योजना में प्रति लाभार्थी राशि एक हजार रुपये से बढ़कर 1,500 रुपये प्रति माह हो चुकी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इसके लिए 18,669 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, जो आगामी बजट में 20 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
वहीं, घरेलू, कृषि और औद्योगिक उपभोक्ताओं को रियायती बिजली उपलब्ध कराने पर सरकार लगभग 30 हजार करोड़ रुपये प्रतिवर्ष खर्च कर रही है।
अधोसंरचना और जल जीवन मिशन पर बढ़ा खर्च
सड़क, पुल-पुलिया, भवन निर्माण और अधोसंरचना विकास पर खर्च लगातार बढ़ रहा है। जल जीवन मिशन में केंद्र से सहायता न मिलने के कारण राज्य पर लगभग 8,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ा है।
आमदनी बढ़ाने पर सरकार का फोकस
सरकार आबकारी और खनिज क्षेत्र से आय बढ़ाने के विकल्प तलाश रही है। निवेश बढ़ाकर अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है। पूंजीगत व्यय 90 हजार करोड़ रुपये तक बढ़ाया जा सकता है, जिससे बाजार में तेजी और राजस्व में वृद्धि की उम्मीद है।
वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान लगातार बढ़ा
वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान का व्यय भी तेजी से बढ़ा है।
- 2023-24: 97,141 करोड़ रुपये
- 2024-25: 1,13,328 करोड़ रुपये
- 2025-26: 1,28,340 करोड़ रुपये